ईडी ने जेपी ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के दिल्ली जोनल आफिस से जारी बयान में बताया कि जेपी ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में प्रिवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत लगभग 400 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी तौर पर अटैच किया गया है।
By: Arvind Mishra
Jan 08, 202612:04 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
ईडी ने जेपी ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के दिल्ली जोनल आफिस से जारी बयान में बताया कि जेपी ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में प्रिवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत लगभग 400 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी तौर पर अटैच किया गया है। अटैच की गई संपत्तियां जयप्रकाश सेवा संस्थान और पेज 3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड की हैं। यह कार्रवाई जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और उनकी संबंधित कंपनियों द्वारा जेपी विस्टाउन और जेपी ग्रीन्स हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़े बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और फंड के डायवर्जन की चल रही जांच का हिस्सा है।
विश्वासघात का आरोप
ईडी ने यह जांच दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की इकोनॉमिक आफेंस विंग द्वारा घर खरीदारों की शिकायतों पर दर्ज की गई कई एफआईटार के आधार पर शुरू की। एफआईआर में जेआईएल, जेएएल और उनके प्रमोटरों और निदेशकों, जिसमें मनोज गौर भी शामिल हैं, पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप हैं।
घर बनाने के नाम पर लिया पैसा
आरोप है कि कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने फ्लैट खरीदारों से घर बनाने के नाम पर पैसा लिया गया, लेकिन उन पैसों का इस्तेमाल प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि दूसरी जगहों पर किया गया। इससे प्रोजेक्ट अधूरे रह गए और लोगों को लाखों-करोड़ों का नुकसान हुआ।
खरीदारों से लिए 14599 करोड़
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि जयप्रकाश एसोसिएट्स और जयपी इंफ्राटेक ने 25000 से ज्यादा घर खरीदारों से 14599 करोड़ रुपए लिए। इन फंड्स का एक बड़ा हिस्सा कंस्ट्रक्शन के अलावा दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल किया गया। इसे जयपी सेवा संस्थान, जयपी हेल्थकेयर लिमिटेड, और जयपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड जैसी ग्रुप की दूसरी कंपनियों को ट्रांसफर किए गए।
जांच में चौंकाने वाली बातों का खुलासा
ईडी ने यह भी पाया कि जेपी सेवा संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी मनोज गौर डाइवर्ट किए गए फंड्स के मुख्य लाभार्थी थे। यानी कि जेएसएस को भेजा गया पैसा उन्हें मिला। जांच में जेआईएल और जेएएल की संपत्तियों को पेज 3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी दूसरी कंपनियों को ट्रांसफर करने की बात भी सामने आई, जिस पर कथित तौर पर हनी कटियाल का कंट्रोल और मालिकाना हक है।