हमें बताएं कि आप हॉस्पिटल के गलियारों में कितने कुत्ते घूमते हुए देखना चाहते हैं। वकील सीयू सिंह ने कहा- भारी संख्या में आवारा कुत्तों को एक ही शेल्टर में रखने से कई बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में कुत्तों के लिए 91,800 नए शेल्टर बनाए जाने चाहिए।
By: Arvind Mishra
Jan 08, 20261:26 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
आवारा कुत्तों के केस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज गुरुवार को भी हुई। कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए अन्य जानवरों के जीवन पर भी सवाल उठाए हैं। कुत्ता प्रेमियों की तरफ से केस लड़ने वाले वकील सीयू सिंह ने कोर्ट में कुत्तों का पक्ष रखते हुए कहा- जज साहब... अगर गलियों से आवारा कुत्तों को हटाया गया, तो चूहों की तादाद अचानक से बढ़ सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट तल्ख टिप्पणी करते हुए दो टूक शब्दों में कहा- तो क्या बिल्लियां ले आएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कुत्ते और बिल्लियां स्वाभाविक दुश्मन हैं और बिल्लियां चूहों को कंट्रोल करने में मदद करती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- क्या इसका कुत्तों को हटाने से कोई लेना-देना था। हल्के-फुल्के अंदाज में कहें तो, कुत्ते और बिल्लियां दुश्मन हैं। बिल्लियां चूहों को मारती हैं, इसलिए हमें ज्यादा बिल्लियों और कम कुत्तों को बढ़ावा देना चाहिए। यही समाधान होगा। हमें बताएं कि आप हॉस्पिटल के गलियारों में कितने कुत्ते घूमते हुए देखना चाहते हैं। वकील सीयू सिंह ने कहा- भारी संख्या में आवारा कुत्तों को एक ही शेल्टर में रखने से कई बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में कुत्तों के लिए 91,800 नए शेल्टर बनाए जाने चाहिए।
कुत्तों की मॉनिटरिंग जरूरी
सीनियर एडवोकेट ध्रुव मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा-आखिरी बार कुत्तों की मॉनिटरिंग 2009 में हुई थी। तब दिल्ली में सिर्फ 5,60,000 कुत्ते थे। मगर, अब इनकी संख्या बढ़ चुकी है। इसलिए कुत्तों की मॉनिटरिंग करना बेहद जरूरी है। कोर्ट में एक अन्य याचिकाकर्ता की तरफ से दलील देते हुए सीनियर एडवोकेट नकुल दीवान ने कहा- मेरे क्लाइंट एक एनजीओ चलाते हैं, जिसमें 45 लोग काम करते हैं। उनकी टीम ने अब तक 66000 से ज्यादा कुत्तों की जान बचाई है और 15000 कुत्तों की नसबंदी करवाई है।
बंदरों की संख्या बढ़ जाएगी
वकील सीयू सिंह ने अदालत में कहा- कई क्षेत्रों में बंदरों की समस्या भी बनी हुई है। अगर हम अचानक से सभी कुत्तों को हटा लेंगे, तो बंदरों की संख्या बढ़ सकती है, जिसके दुष्प्रभाव भयंकर होंगे। इसलिए हमें बैलेंस बनाने की जरूरत है। 20-30 साल पहले सूरत में क्या हुआ था, ये सबको पता है।
कपिल सिब्बल ने सुझाया नया मॉडल
वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया है कि सभी आवारा कुत्तों को पकड़ना इसका समाधान नहीं है। उन्होंने इंसान-जानवर के बीच टकराव को सुलझाने के लिए एक वैज्ञानिक, विश्व स्तर पर स्वीकार्य तरीके की मांग की। उन्होंने कोर्ट से सीएसवीआर मॉडल अपनाने की अपील की। पकड़ो, नसबंदी करो, टीका लगाओ और छोड़ दो। इससे आवारा कुत्तों की आबादी को मैनेज करने में मदद मिलेगी और कुत्ते के काटने की घटनाओं में धीरे-धीरे कमी आएगी।
जानवरों की वजह से मौतों पर कोर्ट की चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कमियों को उजागर करते हुए कहा-देश में मौतें सिर्फ कुत्तों के काटने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आवारा जानवरों से जुड़े सड़क हादसों से भी होती हैं। बेंच ने कहा-सड़कें कुत्तों और आवारा जानवरों से साफ होनी चाहिए। यह सिर्फ कुत्तों के काटने की बात नहीं है, बल्कि सड़कों पर आवारा जानवरों का घूमना भी खतरनाक साबित हो रहा है। हादसों का कारण बन रहा है। नागरिक निकायों को नियमों, मॉड्यूल को सख्ती से लागू करना होगा।