मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग एक हजार 200 करोड़ का पूरक पोषण आहार आंगनबाड़ियों के माध्यम से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती, धात्री माताओं और किशोरियों को दिया जाता है। लेकिन अनियमितता की शिकायतों के कारण शिवराज सरकार ने एमपी एग्रो से यह काम लेकर महिला स्व-सहायता समूहों के महासंघों को सौंपा था।
By: Arvind Mishra
Feb 13, 202610:57 AM

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग एक हजार 200 करोड़ का पूरक पोषण आहार आंगनबाड़ियों के माध्यम से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती, धात्री माताओं और किशोरियों को दिया जाता है। लेकिन अनियमितता की शिकायतों के कारण शिवराज सरकार ने एमपी एग्रो से यह काम लेकर महिला स्व-सहायता समूहों के महासंघों को सौंपा था। संयंत्र की स्थापना के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया, लेकिन अब इन्हीं संयंत्रों में गड़बड़ी को आधार बनाकर दोबारा ठेकेदारी व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले महिला वित्त विकास निगम के द्वारा टेंडर जारी कर इस व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपा जाएगा। प्रदेश के मंडला, सागर, नर्मदापुरम, देवास, धार, रीवा और शिवपुरी में सात संयंत्र हैं, जिनमें टेक होम राशन तैयार होता है। इनका संचालन महिला स्व सहायता समूहों के महासंघ करते हैं।
प्रस्ताव तैयार भी हो चुका
यह व्यवस्था हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के राशन आपूर्ति बड़े ठेकेदारों से नहीं कराने संबंधी व्यवस्था दिए जाने के बाद बनाई गई थी। कमल नाथ सरकार ने व्यवस्था में परिवर्तन कर फिर से काम एमपी एग्रो दे दिया था, जिसे शिवराज ने बदलकर स्व-सहायता समूहों को सौंप दिया था। तब से यही व्यवस्था चली आ रही है, लेकिन आपूर्ति में विलंब, स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित संयंत्रों में गड़बड़ी सहित अन्य को आधार बनाकर फिर ठेकेदारी व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। प्रस्ताव तैयार भी हो चुका है।
टेक होम राशन विवादों में रहा
मध्यप्रदेश में टेक होम राशन की व्यवस्था पहले भी विवादों में रही है। 2024-25 की कैग रिपोर्ट में परिवहन में ट्रकों के नंबर की जगह बाइक, टैंकर, कार और आटो के मिले। 62 करोड़ 72 लाख रुपए का 10,176 टन पोषण आहार न गोदाम में मिला और न परिवहन के प्रमाण मिले। 58 करोड़ के आहार का फर्जी उत्पादन बताया गया। 237 करोड़ कीमत के 38 हजार 304 टन पोषण आहार की स्वतंत्र एजेंसी से जांच ही नहीं कराई, वितरण व्यवस्था पर भी संदेह जताया गया।
अमानक राशन पर थमाया नोटिस
प्रदेश की 49 आंगनबाड़ी केंद्रों में शाला त्यागी किशोरी बालिकाएं तीन दर्ज थीं, लेकिन एमआईएस पोर्टल पर 63 हजार 748 और 2018 से 2021 के बीच 29 हजार 104 को टेक होम राशन वितरित किया गया। इधर,विभाग ने 38 हजार 304 टन टेक होम राशन को अमानक पाने पर 38 करोड़ रुपये भुगतान काटने की बात स्वीकारते हुए नोटिस भी जारी किया।