सतना जिले में कुपोषण गंभीर चुनौती बना हुआ है। 1357 बच्चे अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में हैं, लेकिन पोषण पुनर्वास केंद्रों में बेड खाली पड़े हैं। विभागीय समन्वय की कमी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर मां की आय ज्यादा है, पिता अपने नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। अदालत ने कहा- बच्चों का पालन-पोषण दोनों माता-पिता की कानूनी, नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है और किसी एक की अधिक आय दूसरे की जिम्मेदारी खत्म नहीं करती।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट बैठक में बड़वाह-धामनोद 4-लेन मार्ग, आंगनवाड़ी पोषण 2.0 और जबलपुर विधि विश्वविद्यालय के लिए करोड़ों की राशि स्वीकृत की गई। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
सतना जिले में कुपोषण का संकट फिर उजागर हुआ है। नागौद क्षेत्र के पनास आंगनवाड़ी केंद्र में स्वास्थ्य जांच के दौरान 7 बच्चे अति गंभीर कुपोषित पाए गए। चार माह पहले मझगवां क्षेत्र में मासूम रजा हुसैन की मौत के बाद भी जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से लेकर स्वास्थ्य अमले तक की लापरवाही जारी है। आंकड़े बताते हैं कि सतना के 125 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में कुपोषण का स्तर सरकारी मानकों से कई गुना अधिक है। योजनाओं और बजट के बावजूद नतीजे नहीं दिख रहे, जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौन हैं।
सिरमौर सिविल अस्पताल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्म दिवस पर आयोजित स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान की बैठक में बाल रोग विशेषज्ञ ने चिंता जताई कि क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की भरमार है, जबकि पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में बेड खाली पड़े हैं। आगामी कार्यशालाओं में इस समस्या पर जनभागीदारी से काम होगा।
सतना जिले में दस्तक अभियान का समापन नजदीक है लेकिन लक्ष्य से विभाग पीछे है। 3 दिन में 30 हजार से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग बाकी। रिपोर्ट में एनीमिया, कुपोषण और डायरिया जैसे गंभीर मामले उजागर हुए हैं।
सतना जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर। गर्भवती महिलाओं को 50 रुपए के बजट की जगह सिर्फ 20 रुपए का आहार दिया गया। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल, एजेंसी पर कार्यवाही की तैयारी।
हनुमना के ग्रामीण आंगनवाड़ी केंद्रों की जांच में खुलासा-आधे से ज्यादा केंद्रों पर हमेशा ताला, बच्चों का पोषण आहार दुकानदारों को बेचा जाता है, खिलौने और सामग्री कार्यकर्ताओं के घरों में, सुपरवाइजर–ठेकेदारों की मिलीभगत से लाखों का गोरखधंधा।
1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है विश्व स्तनपान सप्ताह। जानें माँ और शिशु के लिए स्तनपान के अद्भुत फायदे, इसके पीछे का महत्व, और क्यों है यह एक वैश्विक अभियान। पूरी जानकारी हिंदी में।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सतना-मैहर में दस्तक अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत 22 जुलाई से होगी। 0-5 साल के बच्चों में दस्त, निमोनिया, कुपोषण जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए 2.97 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग, दवा वितरण और माता-पिता की काउंसिलिंग की जाएगी।






















