मध्यप्रदेश का कटनी जिला इन दिनों सुर्खियों में है। अभी भाजपा विधायक संजय पाठक का मामला निपटपा भी नहीं था और अब एक अन्य भाजपा नेता पर आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। भोपाल, इंदौर और जबलपुर की टीम के दो दर्जन अधिकारी पहुंचे, जिससे जिले में हड़कंप मच गया।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा व उनके भाई शंकरलाल विश्वकर्मा के विभिन्न ठिकानों पर तड़के आयकर विभाग ने छापेमारी की।

भाजपा नेता और जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा।
कटनी। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश का कटनी जिला इन दिनों सुर्खियों में है। अभी भाजपा विधायक संजय पाठक का मामला निपटा भी नहीं था और अब एक अन्य भाजपा नेता पर आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। भोपाल, इंदौर और जबलपुर की टीम के दो दर्जन अधिकारी पहुंचे, जिससे जिले में हड़कंप मच गया। दरअसल, कटनी में भाजपा नेता और जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा व उनके भाई शंकरलाल विश्वकर्मा के विभिन्न ठिकानों पर बुधवार तड़के आयकर विभाग ने छापेमारी की। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति और टैक्स चोरी की शिकायतों के आधार पर की गई है।
तीन संभागों की टीम पहुंची घर
सुबह चार बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में जबलपुर, भोपाल और इंदौर से आए आयकर विभाग के दो दर्जन से अधिक अधिकारी शामिल थे। सुरक्षा बलों के साथ टीम ने अशोक विश्वकर्मा के छर पर दबिश दी। कार्रवाई की गोपनीयता इतनी अधिक थी कि स्थानीय पुलिस को भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए अंतिम समय पर सूचित किया गया। बीएमसी विश्वकर्मा माइनिंग ग्रुप से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।
दुकान और निजी ठिकानों पर सर्चिंग
टीमों ने विश्वकर्मा परिवार के कई व्यापारिक और निजी ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इनमें जालपा देवी वार्ड, गौतम मोहल्ला स्थित तीन मकान और मुख्य कार्यालय शामिल हैं। टिकरिया स्थित बॉक्साइट खदानें, माइनिंग से जुड़े अन्य ठिकाने, बरगवां स्थित होटल परिसर और शहर में स्थित पानी की फैक्ट्री में भी दबिश दी गई। अधिकारियों ने इन सभी स्थानों पर किसी के भी अंदर या बाहर आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
आय से अधिक संपत्ति का मामला
जांच का मुख्य फोकस आय से अधिक संपत्ति और माइनिंग कारोबार में हुए टर्नओवर पर है। टीमें बैंक खातों, लॉकर, जमीन के दस्तावेजों और पिछले कुछ वर्षों के आयकर रिटर्न का बारीकी से मिलान कर रही हैं। भारी मात्रा में डिजिटल डेटा और फाइलें भी जब्त की गई हैं। जब्त किए गए दस्तावेजों की संख्या और ठिकानों के विस्तार को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जांच लंबी चलेगी।


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