परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण आज सुबह से शुरू हुआ। कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे संवाद किया। परीक्षा पे चर्चा नए अंदाज में आयोजित की गई। देशभर के छात्रों को जोड़ने और उनके सवालों के सीधे जवाब देने पर खास जोर दिया गया। छात्रों से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण आज सुबह से शुरू हुआ।
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण आज सुबह 10 बजे से शुरू हुआ। कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे संवाद किया। परीक्षा पे चर्चा नए अंदाज में आयोजित की गई। देशभर के छात्रों को जोड़ने और उनके सवालों के सीधे जवाब देने पर खास जोर दिया गया। छात्रों से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। युवाओं को अपने अंदर कौशल, आत्मविश्वास और अच्छी सेहत विकसित करनी चाहिए। देश को आगे बढ़ाने के लिए मेड इन इंडिया को अपनाना बहुत जरूरी है। साथ ही साफ-सफाई का ध्यान रखना और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना हमारी जिम्मेदारी है। समय की अहमियत बताते हुए भारतीय मानक समय को लेकर भी सोच बदलने की बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि हम रोजमर्रा की जिदगी में कई ऐसी चीजें इस्तेमाल करते हैं, जो बाहर के देशों में बनी होती हैं। हमें धीरे-धीरे भारतीय उत्पादों को अपनाने की आदत डालनी चाहिए। जब हम खुद अपने देश की चीजों पर भरोसा दिखाएंगे, तभी दुनिया भी उन्हें सम्मान देगी। पीएम मोदी ने छात्रों से कहा- अभी मेरे जन्मदिन पर 17 सितंबर को एक नेता ने फोन किया और कहा कि आपके 75 साल हो गए, तो मैंने उसे कहा कि 25 अभी बाकी हैं। मैं बीते हुए को नहीं, बल्कि बचे हुए को गिनता हूं।

पढ़ाने की गति से मेल नहीं बैठा पाता...
एक छात्र ने कहा कि कई बार वह स्कूल या शिक्षक की पढ़ाने की गति से मेल नहीं बैठा पाता। जो पाठ छूट जाता है, उसे पूरा करने की कोशिश में आगे की पढ़ाई भी छूटने लगती है। छात्र ने पूछा कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। इस पर पीएम ने कहा-उनका जवाब खास तौर पर शिक्षकों के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह छात्रों की गति से सिर्फ एक कदम आगे रहें, उससे ज्यादा नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो हमारी पहुंच में हो, लेकिन जिसे पाने के लिए हमें थोड़ा प्रयास करना पड़े। लक्ष्य इतना दूर नहीं होना चाहिए कि हम हताश हो जाएं।
मेहनत और धैर्य से मिलती है मंजिल
एक छात्र ने प्रधानमंत्री मोदी से मार्गदर्शन मांगा। जवाब में प्रधानमंत्री ने सबसे पहला सुझाव दिया कि महान लोगों की जीवनियां पढ़नी चाहिए। इससे यह समझ आता है कि आज जो लोग बड़े और सफल हैं, वे भी कभी हमारी ही तरह सामान्य हालात में थे। पीएम मोदी ने बताया कि जीवनियां पढ़ने से हमें सही और व्यावहारिक योजना बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यह याद रहता है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि सीढ़ी की तरह कदम-दर-कदम आगे बढ़कर हासिल होती है। हर सफल व्यक्ति भी एक इंसान होता है, जिसने मेहनत और धैर्य से मंजिल पाई होती है।

सफलता कर्म से ही मिलेगी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सपने देखना कोई अपराध नहीं है। सपने तो जरूर देखने चाहिए, लेकिन सिर्फ सपनों के बारे में सोचते रहना या उन्हें गुनगुनाते रहना किसी काम का नहीं होता। उन्होंने कहा कि जीवन में कर्म सबसे जरूरी है। हमें यह सोचकर मेहनत करनी चाहिए कि हम जहां हैं, वहीं से सफल होना है। सही मेहनत और लगन से हर जगह से सफलता हासिल की जा सकती है।
आराम से बाहर निकलना ही आगे बढ़ने की कुंजी
एक छात्र ने सवाल किया कि छोटे घर और कामकाज के माहौल में पढ़ाई करना बहुत मुश्किल होता है। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि सुविधाएं हों तभी क्षमता आती है। बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे नंबर लाने वाले कई छात्र छोटे-छोटे गांवों से होते हैं, जहां सुविधाएं कम होती हैं। लेकिन मेहनत, लगन और सही सोच से कोई भी छात्र आगे बढ़ सकता है।
मेहनत करते रहो और खुद को साबित करो
एक छात्र ने मोदी से कहा कि उसे गेमिंग में रुचि है, लेकिन समाज और लोग उसे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देने को कहते हैं। छात्र ने बताया कि उसे लगता है कि उसका भविष्य गेमिंग में है और उसने पूछा कि उसे क्या करना चाहिए। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया कि शुरुआत में माता-पिता अक्सर मना करते हैं, यह सामान्य बात है। लेकिन उन्होंने छात्र को सलाह दी कि शांत रहकर मेहनत करते रहो और खुद को साबित करो। पीएम मोदी ने कहा कि जब आप अपने काम में सफलता पा लेते हैं और कोई मेडल या पहचान हासिल कर लेते हैं, तो वही सफलता माता-पिता और परिवार का सम्मान बन जाती है। इसके बाद कोई आपको रोकता नहीं है।
इंटरनेट पर समय बिल्कुल भी बर्बाद न करें
पीएम ने कहा इंटरनेट सस्ता है। लेकिन इंटरनेट पर अपना किमती समय बिल्कुल भी बर्बाद न करें। वहीं कैसे हो परीक्षा का पैटर्न सवाल पर पीएम ने बच्चों से कहा सबका पैटर्न अलग होता है, जैसे कुछ लोगों को रात में पढ़ना अच्छा लगता है, तो किसी को सुबह। ऐसे में सबका पढ़ाई करने का पैटर्न अलग होता है। लेकिन आपको अपने पैटर्न के बारे में पता होना चाहिए और अपने ही पढ़ाई के पैटर्न पर भरोसा रखें। इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा किसी के कहने पर न जाएं और आप केवल अपने अनुभव के हिसाब से फैसला लें।
विकसित भारत को अपना सपना बनाएं
पीएम बोले- जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे तब आप लोग 39-40 साल के होंगे। आपको अभी से विकसित भारत को अपना सपना बनाना चाहिए। भगत सिंह आजादी का सपना दिल में रखकर फांसी पर झूल गए। जो आजादी से 25 साल पहले, 30 साल पहले बलिदान किए गए, उसी से आजादी मिली। अपना सपना बनाएं कि विकसित भारत के लिए मुझे क्या करना है।
खुद पर भरोसे से भगाएं कोई भी डर
छात्र ने सवाल किया कि प्रेजेंटेशन देते समय मैं घबरा जाता हूं। इस डर को कैसे भगाऊं... पीएम ने कहा- कभी देखा है कि फुटपाथ पर कोई गरीब महिला भी जब टीवी पर किसी घटना के बारे में बताती है तो कितने आत्मविश्वास से बात करती है। क्या उसने इंटरव्यू की कोई प्रैक्टिस की है, नहीं। उसका आत्मविश्वास आता है सच्चाई है। उसे पता है कि उसने जो देखा वही कहना है। आप भी अपने किए हुए पर भरोसा रखें तो प्रेजेंटेशन का डर भाग जाएगा।
देश की अमर कहानियों पर गेम बनाओ
गोवा के श्रीजीत गाडगिल ने सवाल किया, मेरा गेमिंग में बहुत इंटरेस्ट है। मगर पेरेंट्स नहीं समझते। मैं क्या करूं। पीएम ने जवाब दिया- भारत देश कहानियों से भरा हुआ है। आप खुद के गेम बनाओ। पंचतंत्र की कहानियों पर गेम बनाओ। अभिमन्यु की कहानी पर गेम बनाओ और अपनी वेबसाइट बनाकर उसपर लॉन्च करो। धीरे-धीरे देखोगे कि कितने लोग तुम्हारे गेम्स खेल रहे हैं।एक छात्र के सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा- पता नहीं ये नंबर - नंबर की बीमारी कैसे फैल गई है। आप लोगों को पिछले साल के टॉप 1 से 10 तक के नाम याद हैं क्या, ये उप्लब्धि तो कुछ देर के लिए होती है। हमें ये देखना चाहिए कि पढ़ाई से हमारे जीवन पर क्या असर हुआ है। न कि ये कि हमारे नंबर कितने आए हैं।
स्किल या नंबर में से एक को चुनो
एक स्टूडेंट ने पीएम से सवाल किया कि स्किल जरूरी है या नंअर... पीएम मोदी ने कहा कि इस सवाल का कोई सही जवाब नहीं है। अगर एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे ही। जीवन में स्किल की जरूरत तो होगी ही और स्टूडेंट होने के नाते नंबर लाने भी जरूरी हैं। सही जवाब है कि दोनों के बीच संतुलन चाहिए।


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