एनएचआई ने स्वीकार किया है कि 2025 के दौरान 18 लाख मामलों में गलत तरीके से टोल वसूला गया। हालांकि बाद में लोगों का पैसा लौटाना पड़ा। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त 18 लाल मामलों में से हर तीसरे मामले में गाड़ी टोल प्लाजा तक पहुंची ही नहीं थी, फिर भी सिस्टम ने जेब काट ली।
By: Arvind Mishra
Jan 30, 202612:45 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
एनएचआई ने स्वीकार किया है कि 2025 के दौरान 18 लाख मामलों में गलत तरीके से टोल वसूला गया। हालांकि बाद में लोगों का पैसा लौटाना पड़ा। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त 18 लाल मामलों में से हर तीसरे मामले में गाड़ी टोल प्लाजा तक पहुंची ही नहीं थी, फिर भी सिस्टम ने जेब काट ली। फास्टैग सिस्टम में हुई गड़बड़ियों को लेकर अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। एनएचआई ने जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 18 लाख मामलों में टोल की रकम वापस की है। इनमें से 35 प्रतिशत मामलों में ऐसा पाया गया कि जिन गाड़ियों के फास्टैग से पैसा कटा है वो उस वक्त टोल प्लाजा पर मौजूद ही नहीं थी, फिर भी फास्टैग वॉलेट से टोल की रकम कट गई।
गलत नंबर कर देते हैं दर्ज
दावा किया जा रहा है कि इस तरह की गड़बड़ी ज्यादातर मामलों में टोल प्लाजा पर मैनुअल एंट्री के कारण हुई। जब किसी तकनीकी कारण से आॅटोमैटिक सिस्टम काम नहीं करता, तो टोल कर्मी वाहन का नंबर खुद सिस्टम में डालते हैं। इसी दौरान गलत नंबर दर्ज होने से दूसरे वाहन मालिक के फास्टैग से पैसा कट जाता है।
लोकसभा में मंत्री ने स्वीकारा
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि एनपीसीआई ने 2025 में 17.6 लाख ऐसे ट्रांजैक्शन रिपोर्ट किए, जिनमें गलत तरीके से टोल कटने के बाद रिफंड किया गया। यह आंकड़ा कुल 464 करोड़ फास्टैग ट्रांजैक्शन का है। प्रतिशत के हिसाब से यह संख्या भले ही सिर्फ 0.03 प्रतिशत हो, लेकिन केंद्र सरकार इसे गंभीरता से ले रही है।
मैनुअल एंट्री खत्म करने की तैयारी
ऐसा लंबे समय से देखा जा रहा है कि, लोगों के वाहनों के फास्टैग से गलत तरीके से पैसे काटे गए हैं। अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार टोल सिस्टम में वाहन नंबर की मैनुअल एंट्री पूरी तरह बंद करने पर विचार कर रही है। इससे गलत कटौती और लोगों की परेशानी दोनों कम होंगी। सरकार ने यह भी बताया कि फास्टैग लागू होने के बाद टोल प्लाजा पार करने में लगने वाला समय काफी कम हुआ है।
टोल पर अब सिर्फ 40 सेकंड
पहले जहां एक वाहन को टोल पार करने में औसतन 12.2 मिनट लगते थे। वहीं अब यह समय घटकर करीब 40 सेकंड रह गया है। सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से 50,195 करोड़ रुपए का टोल कलेक्शन हुआ है। वहीं पूरे पिछले वित्त वर्ष में कुल 61,508 करोड़ रुपए टोल वसूली हुई है।