सतना जिला अस्पताल में कान की विकलांगता जांच के लिए जरूरी बेरा टेस्ट मशीन पिछले 5 साल से खराब पड़ी है। इसी कारण मरीजों को विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए जबलपुर या अन्य हायर सेंटर भेजा जा रहा है। हाल ही में एक बच्चे का मामला सामने आने पर परिजनों और डॉक्टरों के बीच विवाद भी हुआ।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल में शुक्रवार को एक मामला सामने आया जब विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने आये आवेदक को जबलपुर जांच कराने के लिए कहा गया। इस बात पर आवेदक और चिकित्सक के बीच बहस शुरू हो गई। आवेदक द्वारा विवाद का वीडियो बनाया गया और शोसल मीडिया में वायरल कर दिया गया। बताया गया कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार इस समय कान की विकलांगता टेस्ट करने के लिए बेरा टेस्ट की अनिवार्यता जरूरी है, जबकि जिला अस्पताल में स्थापित बेरा टेस्ट मशीन विगत पांच सालों से खराब पड़ी है। बताया गया अब यह मशीन कंडम हो गई है। जिला अस्पताल की बेरा टेस्ट मशीन खराब होने के कारण मरीजों को हायर सेंटर का रुख करना पड़ रहा है।
क्या है मामला
बताया गया कि आशीष कुशवाहा उम्र 5 साल निवासी ग्राम पंचायत पैकोरी पोस्ट करसरा अपने परिजन के साथ शुक्रवार को जिला अस्पताल विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचा। परिजनों द्वारा सबसे पहले पीडियाट्रिक ओपीडी में जांच कराइ गई। वहां से बच्चे का टेस्ट कराने आंख और ईएनटी के चिकित्सा विषेशज्ञों के पास भेज दिया गया। मरीज के परिजनों के साथ आये करसरा के जनपद सदस्य उपेंद्र शुक्ला भी मौजूद थे, जिनके द्वारा बच्चे को सबसे पहले आंख के डॉक्टरों के पास ले जायेगा। जिला अस्पताल के आंख के चिकित्सकों के जांच करने पर चिकित्सा विषेशज्ञों ने कहा कि 30 प्रतिशत आंख की विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा। जनपद सदस्य ने बताया कि बच्चे की मानसिक स्थित बहुत कमजोर थी जिस कारण उसे सुनाई भी कम पड़ता था, इस पर आंख के चिकित्सक द्वारा कान का टेस्ट कराने की सलाह दी गई। परिजनों द्वारा मरीज बालक को कान के डॉक्टर के पास लाया गया जहां जांच के लिए आॅडियोलॉजिस्ट के पास भेजा गया। जांच से लौटे परिजन ने कहा कि आॅडियोलॉजिस्ट ने कहा है कि एक जांच यहां नहीं हो पायेगी।
बताया गया कि पदस्थ ईएनटी के डॉक्टर अमर सिंह ने बेरा टेस्ट की जांच हायर सेंटर से कराने की सलाह दी गई। चिकित्सक ने कहा कि जिला अस्पताल की बेरा टेस्ट मशीन कई वर्षों से खराब पड़ी हुई है। इस बात को लेकर आवेदक और चिकित्सक के बीच विवाद छिड़ गया और मासूम को बिना जांच के विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाये ही वापस लौटना पड़ा।
जिला अस्पताल में कान के विकलांगता प्रमाण पत्र बनाये जा रहे हैं। शासन की गाइडलाइन के अनुसार अब कान की विकलांगता के लिए बेरा टेस्ट अनिवार्य है। जिला अस्पताल की बेरा टेस्ट मशीन खराब पड़ी है, जिसके लिए हायर सेंटर से जांच की सलाह दी जा रही है। रीवा की भी मशीन खराब होने के कारण अन्य हायर सेंटर जाने को कहा जा रहा है।
डॉ. मनोज शुक्ला, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल

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