डॉ. मोहन यादव सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट से मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विंध्य से नए चेहरों के शामिल होने की अटकलें तेज हैं। सतना, रीवा, सीधी, शहडोल और उमरिया के कई विधायक दावेदारी में हैं। जातीय समीकरण और चुनावी रणनीति तय करेगी तस्वीर।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है, माना जा रहा है कि डॉ मोहन यादव सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार इसी माह या फिर बिहार चुनाव के बाद हो सकता है। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की आहट आते ही मंत्री बनने की चाहत रखने वाले नेताओं की सक्रियता जहां तेज हो गई है वहीं विंध्य से कौन मंत्री बन सकता है, इसको लेकर भी कयासों के दौर शुरू हो गए हैं । मंत्रिमंडल में स्थान पाने के लिए विंध्य के नौ जिलों के 10 विधायकों के नाम अभी तक सामने आए हैं। फिलहाल प्रदेश मंत्रिमंडल में विंध्य से चार विधायक मंत्री हैं जिनमें से एक डिप्टी सीएम हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान विशुद्ध जातीय समीकरण के मकड़जाल में उलझे विंध्य से यदि किसी और विधायक को मंत्री बनाने की बात आती है तो मंत्री बनाते समय अनुभव व जातीय समीकरण का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
प्रदेश मंत्रिमंडल में विंध्य से अभी कोई क्षत्रिय विधायक मंत्री नहीं है, ऐसे में पार्टी सूत्रों की माने तो संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में विंध्य से क्षत्रिय वर्ग से आने वाले किसी विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है। प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल के विस्तार को देखते हुए फिलहाल विंध्य के 10 विधायकों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल की रेस में माना जा रहा है। संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में विंध्य के कम से कम एक विधायक को और शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हाल ही में पार्टी ने मंत्रियों के काम - काज को लेकर प्रदेश भर में एक सर्वे कराया है जिसमें जिन मंत्रियों का काम-काज ठीक नहीं पाया गया है,उनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है और उनके स्थान पर किसी अन्य को मौका दिया जा सकता है। एक संभावना यह भी है कि बगैर किसी मंत्री को हटाए जातीय समीकरण बैठाते हुए किसी विधायक को और मंत्रिमंडल में मौका दे दिया जाए, वैसे भी प्रदेश में अभी तीन पद खाली हैं। विधान सभा सदस्यों के हिसाब से प्रदेश में 34 मंत्री हो सकते हैं फिलहाल डा. मोहन यादव सरकार में 21 कैबिनेट मंत्री, 6 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, 4 राज्यमंत्री शामिल हैं जबकि 3 पद अभी भी खाली हैं।
2028 के विस चुनाव को ध्यान में रखकर होगा विस्तार
2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों को भले ही अभी तीन साल से ज्यादा का समय बकाया हो लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। इन्हीं तैयारियों को देखते हुए माना जा रहा है कि प्रदेश का संभावित मंत्रिमंडल विस्तार आगामी विधानसभा चुनाव को सामने रखकर किया जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो विशुद्ध जातीय समीकरण के मकड़जाल में उलझे विंध्य से कम से कम एक विधायक को और मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। प्रदेश के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को देखते हुए विंध्य के दस विधायकों के नाम सामने आ रहे हैं। आने वाले समय में संभावित मंत्रिमंडल के विस्तार में यदि विंध्य को और प्रतिनिधित्व देने की बात आती है तो इस दौरान जातीय समीकरण को साधते हुए युवा जोश और वरिष्ठता को मौका मिल सकता है।
सतना के तीनों विधायकों का दावा
विंध्य के प्रवेश द्धार सतना जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा के विधायक हैं। फिलहाल प्रदेश मंत्रिमंडल में भी सतना को प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। रैगांव विधानसभा से पार्टी की विधायक प्रतिमा बागरी,डॉ. मोहन यादव कैबिनेट में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री हैं। वावजूद इसके मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार में सतना के तीनों विधायक भी मंत्री बनने के दावेदार माने जा रहे हैं। इनमें नागौद विधायक पूर्व मंत्री नागेन्द्र सिंह, चित्रकूट विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार एवं रामपुर बाघेलान विधायक विक्रम सिंह विक्की का नाम शामिल है। प्रदेश मंत्रिमंडल में विध्य से एक भी क्षत्रिय विधायक मंत्री नहीं है, जबकि यहां भाजपा के पांच क्षत्रिय विधायक हैं ऐसे में राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रदेश मंत्रिमंडल का जब भी विस्तार होगा तब सतना के किसी न किसी एक विधायक के नाम पर गंभीरता के साथ विचार होगा वह विधायक चाहे दीर्घकालिक राजीतिक अनुभव वाला हो या युवा।
रीवा से नागेन्द्र व दिव्यराज
रीवा जिले से पार्टी के दो क्षत्रिय विधायक नागेन्द्र सिंह और दिव्यराज सिंह भी मंत्री बनने की रेस में बताए जा रहे हैं। एक पार्टी का अनुभवी तो एक युवा चेहरा है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक नागेन्द्र सिंह गुढ़ से पांचवीं बार विधायक हैं वे चार बार भाजपा से एक बार कांग्रेस से इसी तरह दिव्यराज सिंह सिंरमौर से तीसरी बार विधायक हैं, पर पार्टी रीवा से मंत्रिमंडल में किसी को शामिल करेगी इस पर अभी संशय है।
पहली बार विधायक हैं प्रतिमा व राधा
प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों की बात करें तो अभी सबसे अनुभवी मंत्री डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल हैं जबकि दो महिला नेत्रियां हैं और दोनों पहली बार विधायक निर्वाचित हैं। नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी संगठन से सत्ता की राजनीति में आई हैं और एससी वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वे डिंडोरी जिले की प्रभारी मंत्री हैं। चितरंगी विधायक राधा सिंह भी पहली बार ही विधानसभा पहुंची हैं, वे प्रदेश की पंचायत व ग्रामीण विकास राज्यमंत्री हैं। पूर्व मंत्री जगन्नाथ सिंह की बहू राधा सिंह पहले संविदा शिक्षक थीं, विवाह के बाद इस्तीफा देकर वे राजनीति में आर्इं और आज परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। राधा सिंगरौली जिले की पहली जिला पंचायत अध्यक्ष भी रही हैं। प्रदेश में एसटी वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रही राधा सिंह मैहर जिले की प्रभारी मंत्री हैं। विंध्य से ही एक अन्य मंत्री दिलीप कुमार जयसवाल प्रदेश सरकार में कुटीर एवं उद्योग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं। कोतमा से दूसरी बार विधायक श्री जयसवाल मंडला जिले के प्रभारी मंत्री हैं।
शरद कोल दूसरी बार विधायक पर मजबूत दावा
शहडोल जिले की ब्यौहारी विधानसभा सीट से दूसरी प्रतिनिधित्व कर रहे शरद कोल को भी प्रदेश के संभावित मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चचार्एं आम हैं। जानकारों का दावा है कि वे पार्टी के एसटी वर्ग के युवा चेहरे हैं। विंध्य में गोणवाना गणतंत्र पार्टी का अपना एक अलग आस्तित्व है, ऐसे में गोंगपा के साथ खड़े नजर आ रहे अदिवासी वोटरों को अपने साथ लाने के लिए भाजपा शरद कोल पर भी मंत्रिमंडन विस्तार के दौरा दांव लगा सकती है। शरद कोल के पिता जुगलाल कोल गोंगपा के बड़े नेताओं में से एक थे और इनका इस वर्ग में एक अलग पैठ थी, इसका लाभ आगमी चुनाव में भाजपा को मिल सकता है।
मीना सिंह: पार्टी का आदिवासी चेहरा, 5वीं बार विधायक, मंत्री भी रहीं
उमरिया जिले की मानपुर विधायक मीना सिंह की बात करें तो वे लगातार पांच बार से विधायक हैं। पहली बार 2003 में नौरोजाबाद विधानसभा से विधायक चुनी गईÞ, जबकि पिछले चार बार से वे मानपुर से लगातार विधायक हैं। मीना सिंह को शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में मंत्री भी रह चुकी हैं। पार्टी का बड़ा आदिवासी चेहरा और समूचे विंध्य में सभी वर्गाें के बीच अच्छी पकड़ भी रखती हैं। जमीन से जुड़ी मीना सिंह की वजह से एक तरह से मानपुर विधानसभा सीट भाजपा का गढ बन चुकी है। मीना सिंह को मंत्री की रेस में प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
मरावी 3 अलग- अलग विस से छठवीं बार विधायक
जय सिंह मरावी पार्टी के बड़े अदिवासी चेहरा व वरिष्ठ विधायक हैं वे तीन अलग- अलग विधानसभा से छठवीं बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। जय सिंह मरावी 1 बार जयसिंह नगर, 2 बार कोतमा एवं तीन बार जैतपुर से विधायक निर्वाचित हुए हैं। श्री मरावी को भी मंत्री की रेस में माना जा रहा है। राजनीति के जानकारों की माने तो विंध्य में भाजपा के एसटी के 9 विधायक और इस वर्ग के वोट बैंक को अपने साथ जोड़े रखने के लिए पार्टी अपने वरिष्ठ विधायक को मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है।
गिरीश का दावा पर फिलहाल चांस नहीं
मउगंज जिले की देवतालब विधानसभा से विधायक गिरीश गौतम को भी मंत्री की रेस में बताया तो जा रहा है पर इसके चांस काफी कम है। इसके पीछे जानकारों के दो तर्क हैं, एक तो पार्टी ने 2018 में उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया था तो दूसरा पार्टी ने डिप्टी सीएम इसी वर्ग से बनाया है ऐसे में इसी वर्ग के किसी अन्य विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना संभव नहीं है।
सीधी : टेकाम व रीति का दावा
सीधी जिले की चार विधानसभा सीटों में से तीन में भाजपा के विधायक हैं, फिलहाल प्रदेश मंत्रिमंडल में सीधी से अभी कोई मंत्री नहीं। मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार में दावे की बात करें तो सीधी जिले से दो विधायकों को दावेदार माना जा रहा है। सीधी विधायक व पूर्व सांसद रीति पाठक और धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम। इनमें से विंध्य से ब्राम्हण डिप्टी सीएम होने की वजह से रीति पाठक का दावा पहली नजर में ही खारिज हो जाता है बचे कुंवर सिंह टेकाम तो पार्टी इनके नाम पर विचार कर सकती है, श्री टेकाम धौहनी से चौथी बार विधायक हैं।
रिपोर्ट: धीरेन्द्र सिंह राठौर

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