सीधी और सिंगरौली के सहकारी बैंकों में ट्रैक्टर फाइनेंसिंग के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया है। आदिवासियों के नाम पर फर्जी ऋण निकालकर ट्रैक्टर एजेंसियों व बैंक कर्मियों ने सुनियोजित धोखाधड़ी की। जांच टीमें गठित तो हुईं, लेकिन कार्रवाई फाइलों तक सीमित रह गई।

टीम तो गठित होती है लेकिन जांच के नाम पर खानापूर्ति तक रह जाती है कार्यवाही
सीधी, स्टार समाचार वेब
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक सीधी एवं सिंगरौली में ट्रैक्टर घोटाले के रूप में चर्चित करोड़ों का घोटाला होने के बाद भी फाइलें जांच के नाम पर दब जाती हैं। दिखावे के लिए टीम गठित होती है लेकिन कार्यवाही की खानापूर्ति करने के बाद कोई पहल नहीं हो रही है। जबकि विभाग के अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं उसके बाद भी वहां जाना उचित नहीं समझ रहे हैं। यही वजह है कि सहकारी बैंक के कर्मचारी घोटाला करने के बाद भी आराम फरमाते देखे जा रहे हैं। उन पर कार्यवाही की आंच नहीं आ रही है। मालूम हो कि ट्रैक्टर घोटाले को लेकर तत्कालीन सीधी विधायक द्वारा मामले को उजागर किया गया था। उस दौरान आनन-फानन में छ: सदस्यीय टीम गठित कर जांच शुरू की गई थी। ट्रैक्टर घोटाले के मामले में पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद नई टीम भी गठित की गई थी। फिर भी कार्यवाही जिस तत्परता के साथ होनी चाहिए वह सामने नहीं आई।
दरअसल इस घोटाले में जिले के केंद्रीय सहकारी बैंक शाखा गांधीग्राम में ट्रैक्टर फाइनेंस करने के नाम पर उक्त घोटाला को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। बैंक कर्मचारियों के साथ ही इसमें ट्रैक्टर एजेंसियों की संलिप्तता भी सामने आई थी। यह मामला राजधानी तक गूंजने और पूर्व विधायक की शिकायत पर मुख्यमंत्री द्वारा इस पर प्राथमिकता से जांच के निर्देश दिए गए थे। प्राथमिक जांच में ही यह बात सामने आई कि आदिवासियों के नाम से ऋण दर्शाकर ट्रैक्टर फाइनेंस कर दिया गया था। आदिवासियों को उनके नाम से ट्रैक्टर का ऋण निकलने की जानकारी तब सामने आई जब बैंक कर्मी वसूली करने के लिए नोटिस लेकर उनके घर पहुंचे। लाखों का ऋण निकलने की जानकारी मिलने पर पीडित आदिवासियों ने तत्कालीन विधायक से मिलकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई थी। सीधी विधायक द्वारा इस मामले को उच्च स्तर तक उठाया गया।
इन पर दर्ज हुआ था आपराधिक प्रकरण
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित सीधी शाखा गांधीग्राम के अन्तर्गत सहकारी समितियों के माध्यम से ट्रेक्टर हेतु षडयंत्र पूर्वक कूटरचित दस्तावेज तैयार कर हितग्राहियों के नाम पर विभिन्न ट्रेक्टर एजेंसियों के माध्यम से ऋण की राशि आहरित कर गवन करने संबंधी शिकायत पर थाना जमोड़ी में अपराप क्रमांक 449/2021 घारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया था। दर्ज कराई गई एफआईआर में आरकेएस चौहान सीईओ, अयोध्या प्रसाद पाण्डेय अधीक्षक, राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय प्रबंध लेखा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्या सीधी, सुरेश कुमार पाण्डेय लिपिक गांधीग्राम, दिलराज सिंह शाखा प्रबंधक, सुखेन्द्र सिंह समिति प्रबंधक गांधीग्राम, शैलेन्द सिंह समिति प्रबंधक गांधीग्राम, विकाश सिंह समिति प्रबंधक गांधीग्राम, बृजेन्द्र सिंह समिति प्रबंधक गांधीग्राम, सुनील सिंह प्रो. विवेक मोटर सीधी, कल्पना सिंह प्रो. कृष्णा आटो मोबाइल सीधी एवं संचालक राजपूत एजेंसी सीधी के विरूद्ध मामला पंजीबद्ध किया गया था।
आदिवासियों के नाम पर किया गया था लंबा घोटाला
जांच में यह सामने आया कि ऐसे आदिवासी जिनके पास कृषि योग्य भूमि नहीं है उनके नाम से भी ट्रैक्टर फाइनेंस करने का खेल बैंक कर्मचारियों द्वारा खेला गया था। सीधी जिले के इस चर्चित मामले में आरंभ में काफी तत्परता के साथ जांच कार्यवाही शुरू हुई और इसमें घोटाला करने पर कई नाम सामने आए। तत्कालीन कलेक्टर द्वारा इस मामले में छ: सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। अपर कलेक्टर के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने एसडीएम गोपद बनास, एसडीओपी, तहसीलदार गोपद बनास, सहकारी निरीक्षक सहकारिता विभाग सीधी, वरिष्ट सहकारी निरीक्षक सहकारिता विभाग सीधी को शामिल किया गया था। टीम को सात दिवस के अंदर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना था किंतु टीम द्वारा जांच का दायरा ज्यादा बताते हुए इस पर अपनी जांच कागजों में ही जारी रखी गई। जिसके चलते आज तक मामले में कोई सार्थक कार्यवाही सामने नहीं हो सकी है।

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