मध्य प्रदेश के गुना ज़िले में खाद के लिए लाइन में लगी आदिवासी महिला भुरिया बाई की दुखद मौत हो गई। प्रशासन ने ₹2 लाख की सहायता की घोषणा की है, जबकि कांग्रेस विधायक ने खाद की कालाबाजारी का आरोप लगाया है।

गुना: स्टार समाचार वेब.
किसानों की जान ले रही खाद.. मामला मप्र के गुना जिले का है। खाद के लिए कुशेपुर गांव की आदिवासी महिला भुरिया बाई दो दिन से लाइन में लगी थीं। दिन में खाद का इंतजार और रात को वहां सोना किसानों के लिए सामान्य स्थिति बनी हुई है।
भुरिया बाई को बुधवार की देर रात महिला को अचानक उल्टियां होने लगीं। पहले उन्हें बमोरी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद महिला को गुना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गुरुवार सुबह एसडीएम शिवानी पांडे, कलेक्टर किशोर कन्याल और पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया भी गांव पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर ढांढस बंधाया।

दो लाख देगा प्रशासन
गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बताया कि महिला खाद के लिए बागेरी केंद्र पर थी। महिला को उल्टियां होने लगी, तो उसे शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। महिला को 450 शुगर थी, उसके पति को भी टीबी की बीमारी है। फिलहाल स्वजनों को 5000 रुपये की अंत्येष्टि राशि एवं 10000 रुपये की राशि रेडक्रास से उपलब्ध कराई गई है। दो लाख रुपये का प्रकरण भी तैयार किया गया है।
खाद की काला बाजारी हो रही है
बमोरी कांग्रेस विधायक ऋषि अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन भले ही खाद की कमी न होने का दावा कर रहा हो, लेकिन हकीकत इससे परे है। क्योंकि, बागेरी केंद्र पर अन्नदाता दो से तीन दिन से खाद के लिए कतार में लग रहा है, तो दर्द मौसम में खुले आसमान तले रात भी गुजारने मजबूर है। खाद की कतार में लगी महिला की मौत का जिम्मेदार कौन होगा। खाद वितरण प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त है और खाद की कालाबाजारी हो रही है।

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