पन्ना जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली के बीच शहर के कई मेडिकल स्टोर अवैध क्लीनिक बनकर संचालित हो रहे हैं। दिन में बाहरी डॉक्टरों से गैरकानूनी इलाज और रात में मेडिकल स्टोर बंद रहने से आपात मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

हाइलाइट्स:
पन्ना, स्टार समाचार वेब
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल स्थिति जगजाहिर है, सरकारी अस्पताल में डाक्टरों की कमी हैं, तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था झोलाछाप डाक्टरों के हवाले हैं। वहीं इस क्रम में जिले के मेडिकल स्टोर भी पीछे नहीं हैं। आम लोग जो अपने उपचार की व्यवस्था कहीं से कर लेते हैं, तो इन्हीं मेडिकल स्टोर से उन्हें दवाएं मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन यहां शहर के मेडिकल स्टोर दवाएं बेचने में कम मनमाने ढ़ंग से धन कमाने में जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि पन्ना शहर में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि रात 11 बजे के बाद एक भी मेडिकल स्टोर खुला नहीं मिलता। आपात स्थिति में मरीज तड़पते रहते हैं, पर दवाएं नसीब नहीं होतीं। वहीं दिन के उजाले में कई मेडिकल स्टोर अवैध क्लीनिक बनकर आम जनता को लूटने का संगठित खेल खेल रहे हैं। विदित हो कि पन्ना शहर में रात्रिकालीन मेडिकल सुविधा पूरी तरह ठप है। रात 11 बजे के बाद शहर में एक भी मेडिकल स्टोर संचालित नहीं होता। दुर्घटना, अचानक गंभीर बीमारी, प्रसव या अन्य आपात स्थिति में मरीजों के परिजन दवाओं के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। कभी जिला अस्पताल के सामने रेडक्रास मेडिकल स्टोर पूरी रात खुला रहता था और जरूरतमंदों को दवाएं मिल जाती थीं, लेकिन अब वह व्यवस्था भी खत्म हो चुकी है। सवाल यह है कि क्या पन्ना के लोगों की जान की कीमत इतनी सस्ती हो गई है कि रात में दवा तक उपलब्ध नहीं कराई जा सके। इससे भी ज्यादा चिंताजनक तस्वीर दिन में सामने आती है, जब शहर के कई नामी मेडिकल स्टोर अवैध मेडिकल प्रैक्टिस के अड्डे बने हुए हैं। वर्षों से यह खेल चल रहा है, लेकिन न तो स्वास्थ्य विभाग जागा और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई की। इन मेडिकल स्टोरों में बाहर से एमबीबीएस और तथाकथित विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए जाते हैं। न उनकी डिग्री सार्वजनिक की जाती है, न पंजीयन की जानकारी दी जाती है। आम जनता अंधेरे में रखी जाती है और इलाज के नाम पर मोटी फीस वसूली जाती है। मेडिकल स्टोर के भीतर बाकायदा डॉक्टरों के बैठने की व्यवस्था की जाती है। मरीजों से परामर्श शुल्क लिया जाता है और फिर उन्हीं मेडिकल स्टोर से मनमाने दामों पर दवाएं थमा दी जाती हैं। विकल्प कहीं और जाने का नहीं होता, क्योंकि मरीज पहले ही डर और मजबूरी में फंसा होता है। कुल मिलाकर यह आम जनता को लूटने का सुनियोजित फामूर्ला है, जो लंबे समय से बिना किसी डर के लागू किया जा रहा है।
अवैध गतिविधियों का प्रचार
कानून की धज्जियां उड़ाने की हद तो तब हो जाती है, जब ये मेडिकल स्टोर अखबारों में पम्पलेट लगाते हैं, सोशल मीडिया पर विज्ञापन देते हैं और यहां तक कि लाउडस्पीकर से खुलेआम ऐलान कर लोगों को अपने स्टोर पर बुलाते हैं। पिछड़े जिले में शुमार पन्ना में न्यूरोसर्जन, डमेर्टोलॉजिस्ट, हृदय रोग विशेषज्ञ जैसे बड़े-बड़े नाम उछाले जाते हैं, ताकि लोग झांसे में आ जाएं।
स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे जिले में यह झूठा सपना दिखाकर लोगों की जेब पर सीधा हमला किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में मेडिकल स्टोर संचालन के लिए जारी लाइसेंस में लाइसेंसधारी दुकानदार के समाज के प्रति कर्तव्य और दायित्व भी स्पष्ट किए गए हैं। जानकरों की मानें तो नियमों के तहत मेडिकल स्टोर पर केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट की मौजूदगी में ही दवाओं की बिक्री हो सकती है। मेडिकल स्टोर परिसर में किसी भी प्रकार की मेडिकल प्रैक्टिस, डॉक्टर द्वारा मरीज देखने या परामर्श देने की सख्त मनाही है। बिना वैध पर्चे के दवाओं की बिक्री अपराध है। भ्रामक विज्ञापन, झूठे दावे और प्रचार-प्रसार प्रतिबंधित है। लेकिन पन्ना में ये सभी नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। जमीनी हकीकत यह है कि मेडिकल स्टोर संचालक खुद को कानून से ऊपर समझ बैठे हैं।
यह बेहद गंभीर विषय हैं, लायसेंसधारी मेडिकल स्टोर संचालक स्टोर में कोई मेडिकल प्रेक्टिस गतिविधियां संचालित नहीं कर सकते हैं, यदि ऐसा हो रहा है, तो गलत है, मैं जांच कराऊंगा, रात्रि में मेडिकल स्टोर खोलना जरूरी है, इस बारे में भी मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिए जायेंगे।
राजेश कुमार तिवारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

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