जबलपुर में 4 लाख की रिश्वत लेते पकड़े गए CGST असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा और इंस्पेक्टर सचिन खरे को रिमांड के बाद जेल भेज दिया गया है। जानें क्या है पूरा मामला

जबलपुर. स्टार समाचार वेब
जबलपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई (CBI) की कार्रवाई तेज हो गई है। होटल कारोबारी से रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए केंद्रीय जीएसटी (CGST) के असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा और इंस्पेक्टर सचिन खरे को तीन दिनों की रिमांड खत्म होने के बाद जेल भेज दिया गया है।
बीती 17 दिसंबर को सीबीआई ने ग्वारीघाट स्थित जीएसटी कार्यालय में छापामार कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई एक होटल कारोबारी की शिकायत पर की गई थी। अधिकारियों ने कारोबारी के 'ओयो ट्रांजैक्शन' पर आपत्ति जताते हुए 1 करोड़ रुपये की रिकवरी का नोटिस थमाया था। इस नोटिस के निराकरण और मामले को रफा-दफा करने के बदले में अधिकारियों ने 10 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी थी।
सीबीआई ने जाल बिछाकर असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा और इंस्पेक्टर सचिन खरे को 4 लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। हालांकि, इस मामले का तीसरा आरोपी, कार्यालय अधीक्षक मुकेश वर्मन, सीबीआई की दबिश से पहले ही फरार होने में कामयाब रहा।
तीन दिनों की पूछताछ और रिमांड के दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। दोनों अधिकारियों के बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। कार्यालय से केस से संबंधित आवश्यक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। विशेष न्यायाधीश रूपेश कुमार गुप्ता की अदालत ने रिमांड अवधि समाप्त होने पर दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजने का आदेश दिया है। सीबीआई फिलहाल फरार अधीक्षक मुकेश वर्मन की तलाश में जुटी है।

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