मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमएसएमई विभाग के दो साल के कार्यों की समीक्षा की। पंजीकरण में 31% वृद्धि पर बधाई दी और ग्वालियर में ₹2 लाख करोड़ निवेश की इकाइयों के भूमिपूजन की तैयारी के निर्देश दिए।

भोपाल. स्टार समाचार वेब
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज खजुराहो में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) विभाग के पिछले दो वर्ष के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इंदौर और भोपाल जैसे मेट्रोपॉलिटन सिटीज को ध्यान में रखते हुए विकसिंत किए गए औद्योगिक क्षेत्रों का उद्योग जगत के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उनका उद्देश्य इन क्षेत्रों में अधिकतम औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित करवाना, व्यापक निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। बैठक में एमएसएमई मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप और मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'उद्योग वर्ष' के समापन के अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि इस माह के अंत तक ग्वालियर में लगभग ₹2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों के भूमिपूजन, औद्योगिक भूखंड आवंटन तथा शुभारंभ का एक व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने विभाग द्वारा एमएसएमई के पंजीकरण में हासिल की गई 31 प्रतिशत की जबरदस्त ग्रोथ पर संतोष व्यक्त किया और इसे पिछले दो वर्ष में राज्य शासन द्वारा छोटे उद्योगों के लिए बनाए गए बेहतरीन वातावरण का परिणाम बताया। उन्होंने अधिकारियों को फूड पार्क सहित ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को भी एमएसएमई के दायरे में लाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने MSME के पंजीकरण में हुई 31% की शानदार वृद्धि पर संतोष व्यक्त किया।
इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के औद्योगिक पार्कों का व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया गया।
ग्वालियर में लगभग ₹2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों का इस माह के अंत तक भूमिपूजन होगा।
फूड पार्क और कुटीर उद्योगों को MSME से जोड़कर उन्हें संगठित करने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत दो वर्ष में प्रदेश ने एमएसएमई और स्टार्टअप के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है। इस अवधि में प्रदेश में कई लाख करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है, साथ ही पुरानी और लंबित मांगों को भी पूरा किया गया है। विभाग ने एमएसएमई इकाइयों को ₹2,780 करोड़ की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई है, जिसमें वर्ष 2019 से लंबित प्रोत्साहन राशि का पूरा भुगतान शामिल है, जिसे मुख्यमंत्री ने एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि इन उपलब्धियों का मीडिया को मौके पर निरीक्षण कराया जाए, ताकि निवेश और रोजगार सृजन के कार्य पूरे देश में प्रचारित हो सकें।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि विभाग ने नीतिगत सुधारों के तहत एमएसएमई एवं स्टार्टअप के लिए नई नीतियाँ लागू की हैं। प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए भू-आवंटन एवं अन्य सभी प्रक्रियाओं को फेसलेस ऑनलाइन माध्यम से समयबद्ध सेवा के रूप में लागू किया गया है। औद्योगिक अधोसंरचना के विकास में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जहाँ 13 औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण पूरा हुआ है और 14 नए औद्योगिक क्षेत्रों को स्वीकृति मिली है। नवाचार को बढ़ावा देते हुए, विभाग द्वारा पहली बार गोविंदपुरा, भोपाल में फ्लैटेड इंडस्ट्रियल पार्क का विकास किया गया है।
वित्तीय समावेशन और युवा उद्यमिता को मजबूती देने के उद्देश्य से, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 15,838 युवाओं को लाभान्वित किया गया है और उन्हें ₹1,087.27 करोड़ की ऋण राशि वितरित की गई है। इसके अलावा, साख योजना के अंतर्गत वितरण की गई राशि में भी पिछले दो वर्षों की तुलना में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। विलंबित भुगतान के निराकरण के लिए एमएसएमई फेसिलिटेशन काउंसिल ने 439 प्रकरणों का निराकरण किया और सुनवाई पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की।
समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि प्रदेश में 4.51 लाख विनिर्माण उद्यम और 6,340 से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। पिछले दो वर्षों में 2 लाख से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ पंजीकृत हुई हैं। ग्वालियर स्टोन और छतरपुर वुडन फर्नीचर को दिसंबर 2025 में जीआई टैग प्राप्त हुआ है, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिली है। आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि 81 विधानसभा क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास होगा और स्टार्टअप्स की संख्या को 12,000 से अधिक करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंत में सभी विभागों को एमएसएमई और स्टार्टअप क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक ले जाने के लिए समन्वित प्रयास करने पर बल दिया।

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