रीवा जिले में एमपीआरडीसी ने गोविंदगढ़ से भरतपुर तक वन भूमि पर बिना अनुमति सड़क चौड़ीकरण कर डाला। वन विभाग ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच रिपोर्ट भोपाल भेजी है। अब यह मामला पर्यावरण मंत्रालय तक पहुंच गया है। एमपीआरडीसी पहले भी खराब सड़कों और अवैध टोल वसूली के कारण विवादों में रहा है।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
एमपीआरडीसी का बड़ा कारनामा सामने आया है। गोविंदगढ़ से भरतपुर तक वन भूमि में सड़क का चौड़ीकरण बिना केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिले ही कर दिया गया। इसमें रीवा और मैहर दोनों ही जगह निर्माण एजेंसी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। प्रकरण दर्ज करने के बाद अग्रिम कार्रवाई के लिए प्रस्ताव डीएफओ कार्यालय से भोपाल भेज दिया गया है।
मप्र रोड डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन अपनी कार्यशैली के कारण विवादों में ही रहा है। खराब सड़कें, टोल नामों में अवैध वसूली एमपीआरडीसी बदनाम ही रहा है। अब नया मामला विभाग की मनमानी का भी सामने आया है। इस मनमानी के कारण एमपीआईडीसी के अधिकारी बुरी तरह से उलझ कर रह गए हैं। वन विभाग ने प्रकरण तो दर्ज ही किया है साथ ही प्रकरण में कार्रवाई का प्रस्ताव भी शासन स्तर पर भेज दिया गया है। एमपीआईडीसी ने वन विभाग की भूमि पर सड़क का चौड़ीकरण करने में इतनी जल्दबाजी की कि अनुमति मिलने का इंतजार तक नहीं किया। पर्यावरण मंत्रालय के पास आवेदन करने के साथ ही ठेका कंपनी को सड़क चौड़ीकरण की अनुमति दे दी। वन भूमि में उत्खनन और मिट्टी का भंडारण शुरू करा दिया। एमपीआईडीसी की काफी हद तक सड़क भी बन गई है। वन क्षेत्र में दिन रात काम चला। जब इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को हुई तो मौका पंचनामा तैयार कर प्रकरण दर्ज कर दिया गया। इसके बाद से अब एमपीआरडीसी के अधिकारी मामले को निपटाने में लगे हुए हैं। हालांकि अब पूरा प्रकरण ही भोपाल और दिल्ली तक पहुंच गया है।
यह है पूरा मामला
भरतपुर (भैसरहा) से गोविंदगढ़ व्हाया जिगना दो लेन मार्ग का चौड़ीकरण किया जाना था। एमपीआरडीसी निर्माण एजेंसी है। एमपीआरडीसी ने सड़क चौड़ीकरण में फंस रही वन भूमि की स्वीकृति के लिए आवेदन किया था। पूर्व में बनी सड़क के अलावा 9-9 मीटर दोनों तरफ अर्थात कुल 30 मीटर की अनुमति चाही गई थी। इसके लिए आवेदन किया गया था। पूर्व में संचालित 12 मीटर के अंदर 10.5 मीटर में डामरीकरण तथा एक तरफ करीब 3 मीटर तथा दूसरी तरफ 2 मीटर में बाहर से लोकल मिट्टी का भराव व समतलीकरण कार्य किया जा रहा था। इसी मामले में उप वन मंडल मुकुंदपुर ने मप्र सड़क विकास निगम इकाई रीवा के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम के तहत वन अपराध प्रकरण क्रमांक 108/24 दिनांक 17 अप्रैल 2025 तथा 111/7 में 17 अप्रैल 205 को प्रकरण दर्ज किया था। इसी तरह रीवा वन मंडल ने भी वन भूमि क्षेत्र में अवैध तरीके से सड़क निर्माण किए जाने पर प्रकरण दर्ज किया था। बाद में आपत्ति दर्ज करने पर दोबारा भी मामले की जांच कराई गई थी।
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एमपीआरडीसी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद मामला हाईलाइन हो गया। भारत सरकार, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भोपाल से चार बिंदुओं पर जानकारी चाही गई। इसेक बाद वन विभाग ने व्यपवर्तित वन भूमि का फिर से निरीक्षण कराया। इसके बाद जांच रिपोर्ट भोपाल भेज दी है। इसमें स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना स्वीकृति के ही एमपीआरडीसी वन भूमि पर सड़क का निर्माण कार्य करा रहा था। इसके कारण ही निर्माण एजेंसी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया।


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