रीवा वनमंडल में 20 फरवरी से गिद्धों की गणना शुरू, छह रेंज चिन्हित, वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
बाघों की गणना पूरी भी नहीं हुई थी कि नई तैयारी शुरू हो गई। 20 फरवरी से रीवा वनमंडल में गिद्धों की गणना की जाएगी। मंगलवार को वनकर्मियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। 6 रेंज चिन्हित किए गए हैं। इन्हीं 6 रेंजों में गिद्धों का बसेरा है।
आपको बता दें कि हर साल फरवरी में पहले चरण की गिद्धों की गणना की जाती है। इसके बाद दूसरा चरण अप्रैल महीने में होता है। फरवरी शुरू हो गई है। भोपाल से आदेश पहुंचते ही रीवा में गिद्धों के गणना की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। 13 फरवरी को वृत्त स्तर पर वनकर्मियों को रीवा में ट्रेनिंग दी गई थी। मंगलवार को रीवा वनमंडल के वनकर्मियों को गिद्धों के गणना की ट्रेनिंग दी गई। वनकर्मियों को बताया गया कि गिद्धों की गणना कैसे और कब करनी है। क्या क्या डाटा जुटाने हैं। क्षेत्रों की भी जानकारी दी गई।
सुबह की जाएगी गणना
रीवा वन मंडल में रीवा, सेमरिया, अतरैला, डभौरा, सिरमौर, हनुमना वन परिक्षेत्र में गिद्ध पाए जाते हैं। इन्हीं वनपरिक्षेत्रों में गणना की जाएगी। वनकर्मियों को सुबह 6 बजे ही मैदान में निकलना होगा। सभी वनकर्मियों को गिद्धों की बैठी हुई या फिर उनके आवास में बैठे हुए की फोटो लेनी होगी।
बढ़ रही है गिद्धों की संख्या
रीवा वनमंडल अंतर्गत जंगलों में गिद्धों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर साल होने वाली गणना के आंकड़े ही बताते हैं कि पिछले पांच सालों में संख्या दोगुनी पहुंच गई है। वर्ष 2021 में जहां रीवा में गिद्धों की संख्या 345 थी। वहीं वर्ष 2024 में 541 और वर्ष 2025 में 456 गिद्ध से भी अधिक गिद्ध गणना में मिले थे।
बाघों की गणना अभी अधूरी है
रीवा में 112 बीटों में गणना होनी थी। सिर्फ 88 बीट में ही ट्रांजिट लाइन खींची गई। अधूरी तैयारी के साथ वन विभाग ने गणना शुरू कर दी। वनकर्मियों को नए बीट में तैनात भी कर दिया गया। बाद में पता चला कि ट्रांजिट लाइन ही नहीं है। ऐसे में नई बीट में जिनकी ड्यूटी लगाई गई थी। उन्हें वापस बुलाना पड़ा। अभी तक 24 बीटों में ट्रांजिट लाइन नहीं खिंच पाई है। इसके कारण अब तक रीवा वनमंडल में बाघों की गणना अधूरी है। ऐसा प्रदेश का पहला वनमंडल रीवा है जहां एक ही काम दो चरणों में होगा।


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