सतना जिला अस्पताल परिसर में खड़ी 108 एम्बुलेंस मरीज को ले जाने से पहले ही बंद हो गई। ड्राइवर ने कई कोशिशों के बाद जब वाहन स्टार्ट नहीं किया तो धक्का लगाकर किनारे किया गया। कई घंटे बाद दूसरी एम्बुलेंस का इंतजाम हो पाया। जिले में 60 से अधिक 108 एम्बुलेंस होने के बावजूद मॉनिटरिंग के अभाव में मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिल पा रही।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
कहने को तो जिले में 60 एम्बुलेंस संचालित हैं जिनमें से कुछ ही 108 एम्बुलेंस मरीजों का जीवन बचा रही हैं। इसके अलावा सभी 108 एम्बुलेंस कब और कहां बंद हो जाएं कोई भरोसा नहीं। बुधवार को जिला अस्पताल परिसर में चौकी की पास खड़ी 108 एम्बुलेंस वाहन क्र. सीजी 04 एनटी/2460 को मरीज को रेफर करने की लिए कॉल आया जिस पर एम्बुलेंस के ड्राइवर द्वारा गाड़ी शुरू करनी चाही लेकिन गाड़ी स्टार्ट नहीं हो पाई। गाड़ी के चालक द्वारा कोशिशें की गई लेकिन कुछ हल नहीं निकला। अंतत: गाड़ी को धक्का लगाकर अस्पताल के गेट के आगे साइड में खड़ा करना पड़ा। मरीज के परिजन आश लगाए अस्पताल की गेट पर खड़े रहे और ड्राइवर द्वारा कोई आश्वासन नहीं दिया गया जब पानी सिर के ऊपर जाने लगा तो उसने कहा कि आपके लिए दूसरी गाड़ी अरेंज करवाता हूं। कई घंटे बाद मरीज के लिए दूसरी एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।
मानीटरिंग न होने से बिगड़ रही व्यवस्था
उल्लेखनीय है कि हाल ही में रामनगर से रेफर मरीज को मौके पर एम्बुलेंस के न मिलने पर सीएमएचओ डॉ. एलके तिवारी द्वारा एम्बुलेंस ’संचालक और अटेंडर की सेवा समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद भी इस सुविधा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। इसका सबसे बड़ा कारण है इन एम्बुलेंस की मॉनिटरिंग न होना। जिले में जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेज द्वारा संचालित एम्बुलेंस की देखरेख के लिए अधिकारी को रखा गया है। इस मामले में एम्बुलेंस समन्वयक अधिकारी नीलेश द्विवेदी से बात करने के लिए कई बार फोन लगाया गया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
ठेके पर गई 108 के बिगड़ते हालात
ठेके पर दी गई जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेज की 108 एम्बुलेंस सेवा के हाल बेहाल हैं। कहने को तो जिले में 60 से अधिक 108 एम्बुलेंस वाहनों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन मरीजों को समय पर कभी उपलब्ध नहीं हुई। जिला अस्पताल में भी कई मामले सामने आए जब अस्पताल परिसर के बाहर कई गाड़ियां मौके पर मौजूद रहने के बावजूद मरीजों को गाड़ियों को आॅन रोड बताकर गुमराह किया गया। जानकारी के मुताबिक इसका संचालन भोपाल से होता है इसलिए इसके समन्वयक अधिकारी भी जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहते, न तो इनके बैठने का कहीं ठिकाना है और न ही कहीं दफ्तर।
सालों से सर्विसिंग नहीं कबाड़ वाहन से ढो रहे मरीज
जानकारी के मुताबिक जिले में 108 एम्बुलेंस की कई गाड़ियां खराब हुई पड़ी हैं या आॅफ रोड हो चुकी हैं। नाम न छापने की शर्त पर एम्बुलेंस के ड्राइवर ने बताया कि कई गाड़ियों की सालों से सर्विसिंग तक नहीं कराई गई है। एम्बुलेस गाड़ियों में लगा सपोर्ट सिस्टम तक खराब पड़ा है, जिसे ध्यान देने वाला कोई नहीं है। ड्राइवरों ने बताया कि नियमन गाड़ी की सर्विसिंग 22 हजार किमी. चलने के बाद की जानी चाहिए, लेकिन इस व्यवस्था पर कोई जिम्मेदार ध्यान देने वाला नहीं है, जिसके चलते गाड़ियों में कभी भी परेशानी आ जाती है।

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