रीवा जिले की आदिवासी बस्तियों पर वन विभाग की कार्रवाई को लेकर विवाद गहराया। दशकों से रह रहे 150 से अधिक परिवारों को बेदखली के नोटिस, कांग्रेस और आप ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया।

सतना, स्टार समाचार वेब
गत वर्ष रैगांव विधानसभा क्षेत्र के कोठी से लगे वनक्षेत्र से सटी आदिवासी बस्ती को ढहाने के बाद अब इसी विधानसभा क्षेत्र की कुछ आदिवासी बाहुल्य बस्तियां वन विभाग के निशाने पर आ गई हैं। वन विभाग ने कई आदिवासी परिवारों को नोटिस भेजकर उस जमीन को खाली करने के निर्देश दिए हैं जिन जमीनों पर आदिवासी समाज के लोग पिछले सौ वर्षों व कई पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं।
मंगलवार को नागौद तहसील के ग्राम तेंदुनी मोटवा,मजरा टोला खुटकहा आदि के रहवासियों ने जनसुनवाई में गुहार लगाते हुए नियमपरक कार्रवाई की मांग की है। इस मसले को लेकर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस और आप ने कार्रवाई को प्रताड़ित करने वाली बताते हुए सड़क पर उतरकर आर पारकी लड़ाई का ऐलान किया है।
पहले दिए पट्टे, अब उजाड़ रहे आशियाना
वन विभाग द्वारा बहोरीलाल वर्मा,राहुल पाल, देवेन्द्र,राजमन पाल,रामशरण यादव, छोटेलाल , भइया राम यादव,सीताराम यादव,छोटेलाल,राम प्यारे यादव , बच्चू लाल वर्मा ,अच्छे लाल वर्मा ,मिजाजी चौधरी राम विश्वास वर्मा भगवान दीन गोड, काशी गोड ,राजमन पाल, राम सुरेश कुशवाहा ,देवेंद्र वर्मा ,शंभू वर्मा ,मनोज वर्मा ,राम सिया वर्मा ,सहित तकरीबन 150 लोगों को नोटिस देकर विभाग ने बताया है कि वे बीती कई पीढ़ियों से जिस अराजी क्रमांक 492/1 पर वे निवासरत हैं उसे अब प्लांटेशन के लिए आरक्षित जमीन बताकर खली करने को कहा जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार 150 से अधिक परिवारों को उजाड़ने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है जबकि उन्हें 1975-76 में सरकारी पट्टे भी दिए गए थे।
स्टार समाचार से बातचीत में बहोरीलाल बताते हैं कि उनकी उम्र 63 साल है जबकि पिता 100 साल की उम्र में वर्ष 2012 में काल कवलित हुए। दादा भी यहीं निवासरत थे, ऐसे में अब उनकी जमीन को वनभूमि बताकर खाली कराना कहां तक न्यायसंगत है? राजस्व अमले की उदासीनता यह रही कि जमीनें तो दे दी गर्इं लेकिन सीमांकन नहीं किया गया नतीजतन अब वन विभाग इसी का फायदा उठाकर बुलडोजर लेकर दौड़ने की फिराक में है। नोटिस मिलने से सहमे पीड़ितों ने बताया कि उनके पास स् पट्टे, खसरा-खतौनी, राशन कार्ड, आवास योजना, किसान सम्मान निधि, बिजली कनेक्शन से संबंधित सभी वैध सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, जो उनके स्थायी निवास को प्रमाणित करते हैं , बावजूद इसके वन विभाग ने नोटिस भेजकर लोगों के बीच डर पैदा कर दिया है। कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौपते हुए ग्रामीणों ने गांव को वनग्राम घोषित कर पात्रों को ‘फारेस्ट राइट पट्टा’प्रदान करने, जबरन बेदखली और तोड़फोड़ की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई है।
कांग्रेस और आप का आर-पार की लड़ाई का ऐलान
गरीबों के झोपड़े हटाने वन विभाग द्वारा दी गई नोटिस को लेकर सियासत भी गरमा रही है। दरअसल यह क्षेत्र राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी है और यह दूसरा बड़ा मामला है जब इसी क्षेत्र में वन विभाग ने कार्रवाई की रणनीति बनाई है। ऐसे में आम आदमी पार्टी के साथ-सथ कांग्रेस भी सवाल खड़े कर रही है। पूर्व विधायक कल्पना वर्मा ने पीड़ित ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ कलेक्टर व डीएफओ से मिलकर प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराया। श्रीमती वर्मा ने कहा कि हरिजन आदिवासियों की जमीनों के अधिकार पत्र ऋण पुस्तिका एवं खसरा है उसी जमीन पर आदिवासियों को सरकारी आवास ,बिजली की सुविधा समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। ऐसे में यदि उनके जमीन एवं घरों में छेड़खानी की गई तो लड़ाई आर पार की होगी एवं कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी । मंगलवार को ज्ञापन सौपने पहुंचे ग्रामीणों के साथ आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष डा. अमित सिंह,जिला उपाध्यक्ष क्रमश: सुखेन्द्र सिंह, रोहित पाण्डेय एवं ध्रुव सिंह परिहार,ओबीसी विंग के जिलाध्यक्ष इंजी नरेन्द्र कनौजिया समेत अन्य पदाधिकारियों ने मौजूदगी दर्ज कराते हुए कार्रवाई का विरोध किया।


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