सतना-मानिकपुर रेलखंड पर वन्यजीवों की मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा। निर्देशों के बावजूद ट्रेन स्पीड, फेंसिंग और अंडरपास की अनदेखी जारी है। ताजा मामले में बाघ शावक की ट्रेन से कटकर मौत ने एक बार फिर जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर कर दी है।

हार्न बजाकर ट्रेन संचालन के थे निर्देश उसका भी पालन नहीं
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के वनाच्छादित क्षेत्रों से गुजरने वाला सतना-मानिकपुर रेलखंड बीते कई सालों से वन्य प्राणियों के रक्त से रक्तरंजित हो रहा है। बीते कुछ सालों में इस रेललाइन पर कई जंगली जानवरों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। रविवार की सुबह भी इस ट्रैक ने बाघ के पांच माह के शावक की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई है। मृतक शावक का मुकुंदपुर टाइगर सफारी में अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले 2016 में एक बाघ की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई थी उस समय सतना- मानिकपुर रेलखंड में लगातार बाघ मूवमेंट को लेकर रेलवे ने लोको पायलटों को इस सेक्शन से गुजरने पर हार्न बजाते हुए टेÑन संचालित करने के निर्देश दिए थे जो अभी भी बरकरार हैं। निर्देश में यह भी कहा गया था कि बाघ अगर ट्रैक पर नजर आए तो उसे बचाने के लिए टेÑनों की संभवत: स्पीड कम करें, लेकिन लगभग नौ सालों बाद भी स्थित जस की तस है विभागों ने इस दौरान कोई सबक नहीं लिया।
संजीदा नहीं अधिकारी
सतना-मानिकपुर रेललाइन जिले के उन इलाकों से होकर गुजरती है,जहां घने जंगल हैं और पन्ना व रानीपुर वन्य अभयारण्य के बीच का टाइगर कारीडोर हैं। ट्रेनें तेज रफ्तार से चलती हैं और जंगलों में वन्य प्राणी अक्सर रेलवे ट्रैक पार करते समय उसकी चपेट में आ जाते हैं। कई बार अंधेरे या कोहरे के कारण जानवरों को ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं देती और हादसा हो जाता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि न तो रेलवे प्रशासन और न ही वन विभाग इस दिशा में कोई ठोस कदम उठा रहा है। न तो ट्रैक के पास कोई चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही ट्रेन की गति नियंत्रित की जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि इस क्षेत्र में ट्रेन की स्पीड कम की जाए और ऐसे स्थानों की पहचान कर वहां पर अंडरपास या ओवरब्रिज बनाए जाएं। सतना-मानिकपुर रेलखंड अब वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए पूरी तरह से असुरक्षित हो जाएगा। आवश्यक है कि रेलवे, वन विभाग और जिला प्रशासन मिलकर इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाले और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता में शामिल करें।
न वन विभाग ने बनाए अंडर पास, न रेलवे ने की फेंसिंग
वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए बनाई गई तमाम योजनाओं के बाद भी वाइल्ड लाइफ की मौत का रास्ता बने सतना-मानिकपुर रेलखंड में आखिर कब तक निरीह वन्य प्राणी अपनी जान गंवाते रहेंगे या फिर घायल होते रहेंगे? यह यक्ष प्रश्न जिले वासियों के साथ-साथ वन्य प्राणी प्रेमियों के जेहन में आए दिन रेलवे ट्रैक में घायल होते व जान गंवाते वन्य प्राणियों की निरीहता के कारण उठ रहे हैं। वर्ष 2016 में भी चितहरा स्टेशन के निकट रेल ट्रैक पर एक बाघ की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है। उस दौरान इस घटना ने समूचे प्रदेश के वन्य प्राणियों का ध्यान आकर्षित किया था जिसके बाद वन विभाग ने बाघ संरक्षण की नीति बनाने के बड़े-बड़े दावे किए थे। रेल अधिकारियों के साथ आनन -फानन में बैठकें की गई और तय किया गया कि रेलवे बाघों के मूवमेंट कारीडोर में फेंसिंग कराएगा जबकि वन विभाग कारीडोर से निकलने के लिए मार्ग तैयार करेगा, लेकिन समय बीतते ही दोनों विभागों ने चुप्पी साध ली जो अभी तक बनी हुई है। वन विभाग के आंकड़ों और स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो पिछले एक वर्ष में ही 10 से अधिक वन्य प्राणियों की जान इस रेलखंड पर जा चुकी है। हाल ही में रामपुर बाघेलान और उचेहरा के बीच रेलवे ट्रैक पर एक मादा तेंदुए और दो नील गायों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है।
उधर दधीचि टोला में घुसा मगरमच्छ रात भर रहा हड़कंप
मैहर जिले के अमपाटन वनपरिक्षेत्र अंतर्गत दधीच टोला रामनगर में एक मगरमच्छ ने ग्र्रामीणों की नींद हराम कर दी। इस संबंध में जब मैहर वन मंडलाधिकारी मयंक चांदीवाल से जनकारी ली गई तो उन्होने बताया कि बारिश के कारण बाण सागर बांध से ही मगरमच्छ अपना रास्ता भटककर गांव के अंदर पहुंचा होगा, जिसकी जानकारी मिलते ही रेस्कयू दल भेजकर पकड़ लिया गया और मारकंडेय बांध में डोड़ दिया गया है।
कई घंटों तक वन अमले ने की मशक्कत
दरअसल अमरपाटन रेंज के रामनगर दधीच टोला में शनिवार की रात तकरीबन सवा 8 बजे ग्रामीणों ने बस्ती के निकट ही एक मगरमच्छ को रेंगते देखा जो आबाादी की ओर बढ़ रहा था। भारी-भरकम वयस्क मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों की घिघ्घी बंध गई जिसके बाद इसकी सूचना अमरपाटन वनपरिक्षेत्र अधिकारी सतीश चंद्र मिश्रा को दी गई। सूचना से मैहर वन मंडलाधिकारी मयंक चांदीवाल को अवगत करा उनके निर्देश पर रेंजर सतीश चंद्र मिश्रा व शुभम खरे, डिप्टी रेंजर अमरपाटन, शिवम परोहा, अभिषेक परिहार, अभिषेक विश्वकर्मा, अखिलेश मिश्रा, व्यास पाण्डेय, सुशील पाण्डेय, अरुण सिंह, सीताराम, संजय को मिलाकर मुकुंदपुर सफारी व अमरपाटन रेंज के वनकर्मियों का एक संयुक्त दल गठित कर मगरमच्छ के रेस्क्यू की कार्रवाई शुरू की गई। हालंकि मगरमच्छ ने मुकुंदपुर सफारी व अमरपाटन रेंज के फारेस्ट कर्मियों को खूब दौड़ाया लेकिन टीम ने अंतत: तड़के तकरीबन साढ़े 3 बजे उस पर काबू पा लिया। रेस्कयू दल ने मगरमच्छ को पकड़कर जब बाणसागर के मारकंडेय डैम में छोड़ा तब कहीं जाकर दधीचि टोला के रहवासियों ने राहत की सांस ली।

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