सतना रेलवे स्टेशन की पार्किंग सुविधा ठेकेदार द्वारा घाटे के चलते सरेंडर कर दी गई है। अब यात्री अपने दो और चार पहिया वाहनों की सुरक्षा खुद करेंगे। रेलवे ने फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है, जल्द नई निविदा प्रक्रिया शुरू होगी।

घाटे से आजिज पार्किंग ठेकेदार का सरेंडर
सतना, स्टार समाचार वेब
सावधान, अगर आप अपना दो पहिया या चार पहिया वाहन लेकर सतना जंक्शन जा रहे है तो रेलवे अब आपके वाहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं लेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सतना स्टेशन के पूर्वी दिशा की तरफ संचालित रेलवे की पार्किंग को लगातार घाटे के चलते ठेका कंपनी ने सरेंडर कर दिया है, जिसके चलते रविवार-सोमवार की मध्य रात्रि से पर्किंग ठेका खत्म हो गया । ऐसे में अब सतना जंक्शन में अपना वाहन खड़ा करने वालों को अपने वाहन की सुरक्षा का ख्याल स्वयं रखना होगा। हालांकि पार्किंग स्थल पर आरपीएफ एवं जीआरपी स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाएगी, लेकिन इसके बाद भी वाहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी यात्रियों के पाले में डाली गई है। जबलपुर मंडल अधिकारियों के अनुसार जल्द नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया की जा रही है।
मई 2027 तक का था ठेका
मंडल रेल प्रशासन ने प्रीमियम पार्किंग, व्हीआईपी पार्किंग की व्यवस्था को लागू करते हुए घंटे के हिसाब से पार्किंग संचालित करने का ठेका 20 मई 2022 को सुशील कुमार पांडेय को दिया था। ठेका शर्तो के अनुसार टेंडर की अवधि 19 मई 2027 तक थी, लेकिन प्रशासनिक असहयोग व रेलवे परिसर में जगह-जगह की अवैध पार्किंग ने पार्किंग ठेके के फायदे को घाटे में तब्दील कर दिया था। पार्किंग ठेकेदार सुशील पांडे की मानें तो सतना जंक्शन की अव्यवस्थाओं के चलते तीन सालों में तकरीबन 15 लाख का घाटा उठाना पड़ा है। इसी बीच रेलवे ने 10 प्रतिशत पार्किंग में बढ़ोत्तरी कर दी , जिसके कारण ठेकेदार के लिए पार्किंग ठेका सरेंडर करने के लिए बाध्य होना पड़ा।
चिट्ठी पर चिट्ठी, नतीजा सिफर, कामर्सियल एसएस भी असहाय
3 साल पूर्व पार्किंग ठेका मिलते ही पार्किं ग ठेकेदार ने रेल प्रशासन को चिट्ठियां लिखकर सर्कुलेटिंग एरिया की कई अघोषित पार्किंग से हो रहे घाटे से अवगत कराता रहा। आरपीएफ थाने के सामने , पुराने आरएमएस कार्यालय के पीछे समेत कई स्थलों पर खड़े होने वाले वाहनों से एक ओर जहां रेल परिसर का यातायात अराजक बना रहता है वहीं इससे पार्किंग ठेकेदार को भी खासी क्षति उठानी पड़ती है। रेल परिसर की पार्किंग व्यवस्था को दुरूस्त करने का काफी प्रयास कामर्सियल स्टेशन प्रबंधक अवध गोपाल मिश्रा ने भी की और उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया लेकिन वे भी रेल परिसर की पार्किंग व्यवस्था को दुरूस्त करा पाने में असहाय नजर आए।
हर साल शुल्क भर बढ़ाया, सुविधाएं नहीं
बताया गया कि रेलवे ने पार्कि ग ठेका 66 लाख 66 हजार 666 रुपए में दिया था। इस पार्किंग व्यवस्था में दो पहिया से लेकर चार पहिया वाहनों के लिए घंटों के हिसाब से दरें निर्धारित की थी। हालांकि यात्रियों से पिछले ठेके की अपेक्षा पार्किंग शुल्क ज्यादा लिया जा रहा है लेकिन सुविधाओं की यदि बात करें तो रेलवे ने वाहनों को छाया में रखने तक की सुविधा नहीं बढ़ाई है।
अब इस तरह से बिगड़ेगी व्यवस्था
यह सही है कि ठेकेदार ने ठेका सरेंडर कर दिया है। रेलवे जल्द ही पार्किंग ठेका के लिए निविदाएं आमंत्रित करेगा।
डॉ. मधुर वर्मा, सीनियर डीसीएम
हमें मजबूर होकर पार्किंग ठेका सरेंडर करना पड़ रहा है। रेल प्रशासन का अपेक्षित सहयोग न मिलने और हर साल शुल्क बढ़ाने से बेहद नुकसान हो रहा था।
सुशील पांडे, पार्किंग कांट्रैक्टर


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