सेमरिया क्षेत्र में पशु चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पशु अस्पताल में न डॉक्टर आते हैं, न इलाज होता है। बरसात में बढ़ी बीमारियों से पशुपालक परेशान हैं। अस्पताल की गंदगी, अफसरों की लापरवाही और डॉक्टरों की गैरमौजूदगी ने ग्रामीणों की उम्मीदें तोड़ दी हैं।

हाइलाइट्स
सेमरिया, स्टार समाचार वेब
क्षेत्र में लगातार पशुओं की संख्या में गिरावट आ रही है, बावजूद इसके पशु चिकित्सा विभाग पशुओं की संख्या में इजाफा करा पाने में पूरी तरह से लाचार दिखाई दे रहा है। ग्रामीण अंचल में निवास करने वाले लोगों के लिए पशु चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से कई प्रयास किए गए हैं। अफसोसजनक पहलू यह है कि पशु मालिकों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है जिससे उन्हें तरक्की में बांधा आ रही है।
सरकार के द्वारा पशुओं के त्वरित उपचार को लेकर जो प्रयास किए गए उसकी सराहना तो हो रही है लेकिन उन प्रयासों के बाबजूद जो सुविधाएं ग्रामीण अंचल के लोगों को उपलब्ध करायी गई हैं, वह उन्हें मिल नही पा रही हैं। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। केवल नाम का सेमरिया में पशु चिकित्सा केंद्र संचालित हैं इसमें या तो चिकित्सक तैनात नहीं है उसकी जगह अगर कोई फार्मासिस्ट हैं तो वह गाहे-बगाहे ही ग्रामीणों को देखने के मिलता है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र में बने पशु चिकित्सा केद्रों पर गांव के दबंगों ने अपना कब्जा कर अधिकार जमा लिया है। जिस ओर स्वास्थ्य विभाग मुड़कर भी नहीं देख रहा। तहसील क्षेत्र के पशु चिकित्सा केन्द्रों की बात की जाए तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा ज्यादातर पंचायत स्तर पर पशु चिकित्सा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। जिनमें खारा और जदुआ शामिल हैं, वह भी किराए के भवन में संचालित है वह भी अधिकतर बंद पड़े रहते हैं। इन पशु चिकित्सा केन्द्रों की हालत आज के समय बहुत ही दयनीय है।
बारिश में ज्यादा समस्या
बरसात के सीजन में पशुओं की बीमारियां बढ़ी हैं गलघोटू, खुरपका जैसी बीमारियों से पशुपालक हलाकान हैं। गौरतलब है कि सेमरिया में पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सा केंद्र का निर्माण स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराया गया था जिसमें कुछ समय तक तो स्थिति ठीक-ठीक चली उसके बाद यहां स्वास्थ्य विभाग ने अपनी नजर मोड़ ली, जिससे इस पशु चिकित्सा केंद्र ही हालत आज के समय खस्ता है। पिछले एक वर्ष से यहां किसी चिकित्सक की तैनाती न होने के कारण आज के समय यह पशु चिकित्सा केंद्र पूरी तरह बंद पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार यहां किसी फार्मासिस्ट की तैनाती है जो कभी आता ही नहीं है। ऐसे में पशुओं का उपचार कैसे हो सकता है। पशुओं के उपचार कराने हेतु गांव से लोगों को दूशरे शहर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र पर जाना पड़ता है।
अव्यवस्था चरम पर
पशु मालिक का पूरा दिन आने जाने में व्यतीत हो जाता है तथा पशुओं को वाहन में लाद कर लाने के कारण खर्चा भी बहुत हो जाता है। ऐसी स्थिति में अगर चिकित्सक छुट्टी पर हो या किसी अन्य कारण वश कहीं चले जाए तो उनका आना जाना बिल्कुल बेकार होता है ऊपर से पशु के बीमार होने के कारण और कष्ट झेलना पड़ता है। पशु चिकित्सा केन्द्र के न चलने के कारण यहां एक वर्ष के अंदर सैकड़ों से अधिक पशु काल कलावित हो चुके हैं, लेकिन इस ओर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाही बरत रहा है। अगर स्वास्थ्य विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो पशु चिकित्सालय का भवन जीर्ण-शीर्ण हो जाने के चलते जल्द गिर भी जाएगा।
अस्पताल में गंदगी का डेरा
सेमरिया पशु अस्पताल पूरी तरह गंदगी से भरी हुई है, अस्पताल के अंदर जाकर देखा जाय तो यह नहीं लगता कि यहां चिकित्सक या अन्य कर्मचारी बैठते होंगे क्योकि गंदगी जितनी बाहर है उतनी ही अंदर भरी हुई है साथ ही अस्पताल प्रांगण के सामने व इर्द-गिर्द देखने से ऐसा लगता है कि यह अस्पताल कभी भी नहीं खुलती है। इसे देखकर खुद ही ऐसा लगता है कि यह पशु औषधालय खुद ही लम्बी बीमारी की हालत से गुजर रही है और लावारिश है जिसका कोई माई-बाप नहीं है। तभी तो क्षेत्र के पशु बेमौत मर रहे हैं। जिसे कोई देखने व सुनने वाला नहीं है औषधालय के वरिष्ठ अधिकारी कब आते हैं कि नहीं कोई सहीं पता नहीं बता सकता।
किसी की नहीं है जिम्मेदारी
सेमरिया पशु औषधालय में पदस्थ चिकित्सक माह में एकाध बार ही मुख्यालय आते हैं इसकी वजह आज तक न ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और न ही क्षेत्र के विधायक -सांसद ही यह पूंछ -परख कर सके कि आखिर इस अस्पताल के साथ ऐसा दुर्भाव का व्यवहाार किया क्यों किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि या तो यहां कि चिकित्सक डरते होंगे या कि मिली भगत के चलते कुछ लम्बी साठ-गांठ होगी, इसीलिए चिकित्सक नहीं आते और अस्पताल नहीं खुलती है।
हर तरफ मनमानी
बताया जाता है कि सेमरिया पशु औषधालय में वर्षों से पदस्थ डाक्टर कभी भी औषधालय में दिखाई नहीं देते और उनके अधीनस्थ स्टाफ भी पूरी तरह अपनी मनमर्जी पर उतारू हैं। इतना ही नहीं यहां का विभाग पशुपालकों के बुलाने पर भी बीमार पशुओं की दवा करने नहीं जाते हैं।


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