सीधी जिले में बिजली की अघोषित कटौती ने ग्रामीण और शहरी जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। उमस भरी गर्मी में बिजली गायब, वहीं फाल्ट के बहाने घंटों कटौती की जा रही है। इसके विपरीत, लोगों को भारी भरकम बिजली बिल भेजे जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ता परेशान और नाराज़ हैं।

हाइलाइट्स
सीधी, स्टार समाचार वेब
सीधी जिले में बिजली की अघोषित कटौती का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। बरसात के दिनों में लोगों को उम्मीदें थी कि बिजली खपत कम होने से कटौती कम होगी लेकिन इसका विपरीत ही असर दिख रहा है। सरकार द्वारा जहां कहा जा रहा है कि प्रदेश में खपत से ज्यादा बिजली उपलब्ध है वहीं सीधी जिले में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों द्वारा सरकार के दावे को ही पूरी तरह से झुठलाया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में बिजली की अघोषित कटौती का असर भले ही कम हो लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों को 24 घंटे में 10 घंटे की बिजली मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती का असर भी अलग-अलग है। जो ग्रामीण क्षेत्र शहरी इलाके के नजदीक हैं वहां बिजली की ज्यादा कटौती नहीं हो रही है। लेकिन जो गांव शहरी क्षेत्र से दूर हैं वहां 10-12 घंटे की बिजली दी जा रही है। वर्तमान में भले बारिश का मौसम हो परंतु ओवरआॅल पर्याप्त वर्षा की कमी के बने हालात से उमस भरी गर्मी का प्रकोप चरम पर है। बिना कूलर पंखे के लोग बेहाल नजर आते हैं। उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोगों को कूलर एवं पंखा के सामने ही बैठा हुआ देखा जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दिन के समय बिजली की अघोषित कटौती सबसे ज्यादा है। रात में भी फाल्ट के बहाने कई घंटे बिजली गुल कर दी जाती है। बिजली न मिलने से लोगों को हो रही भारी असुविधा से लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। चर्चा के दौरान कुछ लोगों ने कहा कि भीषण गर्मी के कारण लोगों को बिजली की जरूरत सबसे ज्यादा इन दिनों है। ऐसे समय में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों द्वारा सबसे ज्यादा लाईन फाल्ट की बहानेबाजी कर कई घंटे बिजली की सप्लाई ठप्प कर दी जाती है। सीधी जिला मुख्यालय में भी फाल्ट के बहाने फीडरों में घंटो बिजली की सप्लाई बंद की जा रही है। बिना किसी पूर्व सूचना के ही बिजली की सप्लाई घंटों करने के पीछे विभाग के अधिकारी यही जवाब देते हैं कि 11 केव्ही लाईन के फाल्ट हो जाने से बिजली की सप्लाई ठप्प हो गई है। फाल्ट के बहाने बंद होने वाली बिजली कई घंटों बाद ही शुरू हो पाती है तब तक लोग पसीने से तर-बतर होने को मजबूर रहते हैं।
बिजली के बिल से उपभोक्ताओं को लग रहा करंट
जिले में बिजली की सप्लाई भले ही घंटों बंद हो रही है लेकिन विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों द्वारा भारी भरकम बिजली का बिल लोगों को प्राथमिकता के साथ भेजकर उसकी वसूली करनें में पूरी मुस्तैदी दिखाई जा रही है। गर्मी के दिनों में विद्युत कटौती का अघोषित ग्राफ भले ही बढ़ गया है लेकिन हर महीने बिजली का बिल बढ़ाकर भेजा जा रहा है। ऐसा आभाष होता है कि विद्युत वितरण केंद्रों के प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में भारी-भरकम विद्युत बिल भेजने एवं वसूली करने का रिकार्ड बनाना चाह रहे हैं। चर्चा के दौरान कुछ विद्युत कर्मचारियों का कहना है कि विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर के बड़े अधिकारियों का सख्त निर्देश है कि ज्यादा से ज्यादा बिजली बिल की वसूली का कार्य किया जाए। जिन विद्युत वितरण केंद्रों में वसूली का कार्य किन्हीं कारणों से प्रभावित होता है वहां से प्रभारी को बड़े अधिकारियों की काफी धौंस सुननी पड़ती है। इसी वजह से विद्युत वितरण केंद्र के प्रभारी भी बिजली के भारी भरकम देयकों में कमी करने से कतराते हैं। उनको डर रहता है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिजली का बिल कम कर दिया गया तो उन्हें जबलपुर मुख्यालय से काफी फटकार मिलेगी। विद्युत वितरण केंद्र के प्रभारी भी भारी भरकम विद्युत देयकों का सुधार नहीं करते हैं। उपभोक्ता बिजली के बिल लेकर लगातार कार्यालयों का चक्कर काटता रहता है लेकिन उसकी समस्या दूर नहीं की जाती।


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