क्या सिर के पास मोबाइल रखकर सोने से कैंसर हो सकता है? जानें डॉ. मायरो फिगुरा की चेतावनी और भारतीय ऑन्कोलॉजिस्ट की राय। मोबाइल रेडिएशन के सच और नींद पर इसके प्रभाव की विस्तृत रिपोर्ट।
By: Ajay Tiwari
Feb 12, 20264:08 PM
लाइफ स्टाइल डेस्क। स्टार समाचार वेब
भारत में स्मार्टफोन अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि एक लत बन चुका है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश भारतीय सोने से ठीक पहले तक मोबाइल स्क्रॉल करते हैं और फिर उसे सिर के पास रखकर सो जाते हैं। हाल ही में लॉस एंजेलिस के प्रसिद्ध एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. मायरो फिगुरा के एक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट ने इस आदत को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आइए जानते हैं दावे की सच्चाई।
क्या मोबाइल रेडिएशन वाकई कैंसर का कारण है?
डॉ. फिगुरा के अनुसार, मोबाइल फोन उस समय भी रेडिएशन निकालता है, जब वह इस्तेमाल में नहीं होता। उनका दावा है कि लंबे समय तक फोन को सिर के पास रखने से न केवल अच्छी नींद प्रभावित होती है, बल्कि यह सिरदर्द और भविष्य में कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन का विज्ञान
विशेषज्ञ बताते हैं कि मोबाइल से निकलने वाली तरंगें 'नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन' की श्रेणी में आती हैं। यह सूरज की पराबैंगनी किरणों या एक्स-रे (आयोनाइजिंग रेडिएशन) की तरह सीधे हमारे डीएनए को नुकसान नहीं पहुँचातीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मोबाइल रेडिएशन को 'संभावित रूप से कार्सिनोजेनिक' (Possibly Carcinogenic) की श्रेणी में रखा है।
क्या कहते हैं कैंसर एक्सपर्ट?
कैंसर विशेषज्ञों के विचार इस मुद्दे पर थोड़े अलग और स्पष्ट हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में ऐसा कोई वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध नहीं है जो सीधे तौर पर मोबाइल की रेडियोफ्रीक्वेंसी को ब्रेन ट्यूमर या कैंसर से जोड़ सके। अब तक किए गए वैश्विक अध्ययनों में मोबाइल रेडिएशन और कैंसर के बीच कोई ठोस संबंध (Strong Link) नहीं हो पाया है।
कैंसर नहीं नींद को ज्यादा खतरा
नींद और मानसिक स्वास्थ्य डॉक्टरों का मानना है कि कैंसर से कहीं ज्यादा बड़ा और तात्कालिक खतरा आपकी नींद (Sleep Cycle) को लेकर है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को रोकती है, जिससे नींद आने में कठिनाई होती है। नोटिफिकेशन, वाइब्रेशन और अलर्ट की वजह से हमारा दिमाग सोते समय भी पूरी तरह शांत नहीं हो पाता। चार्जिंग के दौरान फोन को तकिए के नीचे रखने से वह गर्म हो सकता है, जिससे आग लगने या बैटरी फटने का जोखिम रहता है।
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