सतना जिले के रघुराजनगर तहसील के सोहौला में करोड़ों की जमीन को फर्जीवाड़े के जरिए सिर्फ 12 लाख में बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कलेक्टर के सख्त रवैये के बाद रजिस्ट्री रद्द हो सकती है और सरपंच व पटवारी पर FIR दर्ज होने की संभावना है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के रघुराजनगर तहसील के सोहौला में गलत तथ्यों के आधार पर कराई गई रजिस्ट्री के मामले में कलेक्टर के सख्त रवैये के बाद माना जा रहा है कि विस्तृत जांच के बाद इसकी रजिस्ट्री रद्द हो सकती है और इस मामले में तथ्यों को छिपाकर गलत सजरा बनाने पर सरपंच के खिलाफ एफआईआर कराई जा सकती है और धारा 40 की कार्रवाई भी प्रस्तावित हो सकती है। पिछले मंगलवार को जनसुनवाई में यह मामला सुर्खियों में आया था। मंगलवार को एक बार फिर यह मामला जनसुनवाई में कलेक्टर के पास आया जिसमें देवकली सिंगरहा पत्नी शिव कुमार सिंगरहा ने पूरे मामले की विस्तृत व मौके से जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने और फर्जी तरीके से किए गए वारसाना नामान्तरण को निरस्त कर रिकार्ड सुधार की कार्रवाई कराए जाने की मांग की है।
मृतक त्रिवेणी के नाम थी 1.5870 हेक्टेयर आराजी
जनसुनवाई में कलेक्टर सतीश कुमार एस को दिए अपने आवेदन में देवकली सिंगरहा ने कहा कि रघुराजनगर तहसील के सोहौला में मेरे बेटे त्रिवेणी के नाम आराजी नं. 195/2, 196/2, 197/2, 198/द/1/2, 211/2, 242/2, 254/2, 258/4क/2/2, 334/3/2, 291/2, 293/1क/2 रकवा क्रमश: 0.121, 0.025, 0.076, 0.096, 0.035, 0.021, 0.134, 0.066, 0.102, 0.860 हे. कुल 12 किता रकवा 1.587 हे. दर्ज थी जो उसकी मृत्यु के बाद फर्जी तरीके से त्रिवेणी की पत्नी अनीता ने अपने नाम करा लिया।
दो लोगों को बेंची गर्ई जमीन
बताया जाता है कि वारसाना नामान्तरण अकेले अपने नाम कराकर अनीता ने उक्त भूमि को 20 जून 2025 को मोना सिंह पति अखिलेश सिंह व साधना पटनहा पत्नी अरुण कुमार पटनहा को बेंच दिया है जिसका आदेश 25 जून को पारित कर अभिलेख दुुरुस्त किए गए।
स्टे लेने की सलाह
जनसुनवाई में पहुंची देवकली सिंगरहा के आवेदन को कलेक्टर ने गंभीरता से लेते हुए एसडीएम कोर्ट में अपील कर रजिस्ट्री के खिलाफ स्टे आर्डर लेने की सलाह दी और एसडीएम को इस मामले की गहनतम जांच के आदेश दिए। इतना ही नहीं आनन- फानन में हुई रजिस्ट्री पर कलेक्टर ने एसडीएम जांगड़े को जमकर फटकार लगाई और उनसे सवाल किया कि यह क्या तरीका है? एक ही दिन में सब काम कैसे हो गया? वारसाना बन गया, नामान्तरण हो गया।
करोड़ों की जमीन 12 लाख में बिकी
जमीन के कारोबार से जुड़े जिन लोगों ने अनीता की जमीन खरीदी है पर्दे के पीछे से सारा खेल राजस्व महकमे के साथ मिलकर उन्होंने खेला था। बताया जाता है कि करोड़ों की भूमि की रजिस्ट्री महज 16 लाख में हुई है। इसमें से त्रिवेणी की बेवा अनीता को मात्र 12 लाख रुपए ही मिले हैं और इसमें से 4 लाख बैंक कर्ज बताकर काट लिया गया जबकि बताया यह जा रहा है कि बैंक का कर्ज 2 साल पहले ही चुकता का प्रमाण पत्र लिया जा चुका है।
पटवारी व राजस्व महकमे पर आवेदिका ने उठाए सवाल
जनसुनवाई में पहुंची आवेदिका देवकली सिंगरहा ने तत्कालीन पटवारी और राजस्व महकमे और सरपंच की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पटवारी द्वारा साजिश रचकर करोड़ों की जमीन को आनन- फानन में फर्जी कार्रवाई करते हुए बिकवा दिया। उन्होंने अपने आरोप में कहा कि सबसे पहले वारसाना नामान्तरण अनीता के नाम किया गया, वह सरपंच द्वारा दिए गए गलत सजरा खानदान व हल्का पटवारी द्वारा दी गई गलत रिपोर्ट के आधार पर किया गया। सजरा खानदान बनाया गया उसमें किसी तारीख का उल्लेख नहीं है। कलेक्टर को दिए अपने शिकायती आवेदन में आवेदिका ने कहा है कि हल्का पटवारी द्वारा रिकार्ड सुधार की कार्रवाई त्रिवेणी प्रसाद सिंगरहा के आवेदन पर की गई। आवेदन आॅनलाइन 16 जून 2025 को पेश किया गया जबकि आवेदक त्रिवेणी प्रसाद सिंगरहा की मृत्यु 3 जुलाई 2021 को हो गई थी। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत की सरपंच शकुंतला चौरसिया ने गलत सजरा बनाया जिसमें मृतक त्रिवेणी सिंगरहा की पत्नी अनीता की तपा में हुई दूसरी शादी का उल्लेख नहीं किया गया और न ही माता- पिता और भाई का उल्लेख सजरा में किया गया।
अनीता ने छिपाई दूसरी शादी
इस बीच पूरे मामले की प्रारम्भिक जांच करते हुए अनुविभागीय अधिकारी रघुराजनगर ग्रामीण ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को दी है जिसमें उन्होंने तथ्यों के आधार पर बताया है कि वारसाना नामान्तरण आवेदन करते समय आवेदनकर्ता अनीता सिंगरहा द्वारा अपनी दूसरी शादी के संबंध में तथ्यों को छिपाया गया है एवं उक्त संदर्भ में शपथ पत्र एवं सरपंच ग्राम पंचायत सोहौला द्वारा सजरे में सिर्फ त्रिवेणी प्रसाद सिंगरहा (मृतक) को जायज वारिस बताया गया है। उसके भाई, बहन, माता- पिता का कोई उल्लेख नहीं है। इसी आधार पर हल्का पटवारी द्वारा अपना आवेदन लगाया गया है। उनके द्वारा मौके से जांच करने संबंधी पंचनामा प्रकरण में संलग्न नही है। तत्कालीन पटवारी से रिपोर्ट प्राप्त कर नायब तहसीलदार वृत्त सोहावल द्वारा आदेश पारित कर सिंचित भूमि को असिंचित दर्ज किया गया जिसके आधार पर रजिस्ट्री कराई गई। शिकायतकर्ता द्वारा अपने शिकायत में तत्कालीन पटवारी रश्मि शुक्ला की शिकायत की गई है जो कि वर्तमान में नागौद तहसील में पदस्थ हैं।
कमीशन की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे
नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा कमीशन न दिए जाने से परेशान राशन विक्रेताओं ने जन सुनवाई में पहुंचकर अपनी गोहार लगाई। कलेक्टर को दिए अपने आवेदन में नगर निगम (एफपीएस) के समस्त विक्रेताओं ने प्रबंधन नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा कमीशन न दिए जाने का आरोप लगाते हुए कमीशन की मांग की। उन्होंने बताया कि पीएमवाई का अक्टूबर व नवम्बर 2022 रेग्यूलर जनवरी 2024, फरवरी, जून, जुलाई 2025 का कमीशन नहीं दिए जाने की बात कही।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती में भ्रष्टाचार
सतना। हाल ही में जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की हुई भर्ती में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। भर्ती में भ्रष्टाचार का आलम तो यह रहा कि पात्र को अपात्र और अपात्र को पात्र किया गया है। भर्ती में हुए भ्रष्टाचार का मामला अब धीरे-धीरे खुलने लगा है। मामले की शिकायतें सार्वजनिक होने लगी हैं। कुछ ऐसी ही शिकायतें मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर के पास तक पहुंची। परियोजना अधिकारियों द्वारा मनमानी तरीके से की गई भर्तियों पर कलेक्टर डा. सतीश कुमार एस ने इस मामले में डीपीओ को जमकर फटकार लगाई। वैसे तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की भर्ती में गड़बड़ी के कई मामलों की शिकायतें जनसुनवाई में आईं लेकिन एक मामला नागौद के मुंगहर आंगनवाड़ी केन्द्र का आया जिसमेंं फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नियुक्ति प्राप्त कर ली गई है। यहां उल्लेखनीय है कि जिले में 24 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और 329 सहायिकाओं की भर्ती हुई है। इनमें से ज्यादातर में सिकवा- शिकायतें सामने आ रही हैं।
2020 में हायर सेंकेंडरी और 2022 में कम्पलीट हो गया बीए
नागौद के मुंगहर आंगनवाड़ी केन्द्र में भर्ती में हुई गड़बड़ी का जो मामला जनसुनवाई में पहुंचा उसमें आवेदिका द्वारा 2020 में हायर सेकेंडरी और उसके दो साल में ही 2022 में बीए कम्पलीट कर लेने वाली महिला को नियुक्ति दे दी गई। आरोप है कि इसी आंगनवाड़ी केन्द्र में सबसे अधिक अंक लाने वाली महिला को दूसरे स्थान पर रखा गया जबकि फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वाली को नियुक्ति दे दी गई।
नहीं हुआ सूची का प्रकाशन
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं- सहायिकाओं की भर्ती में कई प्रकार की गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप तो यहां तक है कि गड़बड़ियां छिपाने के लिए चयन सूची का प्रकाशन नही किया गया और न ही सूची पर दावा - आपत्तियां मंगाई गई और तो और आवेदकों को दावा- आपत्तियां कहां करनी है इसकी भी जानकारी नहीं दी गई। बताया जाता है कि जनसुनवाई में शिकायत लेकर आने वाले आवेदकों को डीपीओ ने आॅनलाइन आपत्ति दर्ज कराने की सलाह दी।

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