मध्यप्रदेश का सीएम हाउस पहला होगा, जहां भारतीय काल गणना पर आधारित दुनिया की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। इस घड़ी और नवनिर्मित प्रवेश द्वार का उद्घाटन किया गया। सीएम ने एक एप भी तैयार कराया है, जिसमें 189 भाषाओं को समाहित किया गया है।

डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के लोकार्पण कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश का सीएम हाउस पहला होगा, जहां भारतीय काल गणना पर आधारित दुनिया की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। इस घड़ी और नवनिर्मित प्रवेश द्वार का उद्घाटन किया गया। सीएम ने एक एप भी तैयार कराया है, जिसमें 189 भाषाओं को समाहित किया गया है। दरअसल, मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित प्रवेश द्वार पर स्थापित की गई विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का सीएम डॉ. मोहन यादव ने अनावरण किया। लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उज्जैन से 51 ब्राह्मण मुख्यमंत्री निवास पहुंचे थे। जहां वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दी। यह घड़ी न केवल समय बताएगी बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग, व्रत, त्यौहार जैसी विस्तृत जानकारी भी देगी और भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाएगी। इस मौके पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मंत्री कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा और विष्णु खत्री मौजूद रहे। समारोह के दौरान सीएम ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से जुड़े मोबाइल ऐप का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सभी त्योहार अंग्रेजी तिथियों के आधार पर नहीं आते। वर्ष की गणना भी तिथियों और छह ऋतुओं के आधार पर की गई है। इसलिए समय की गणना सूर्योदय से सूर्योदय तक होनी चाहिए। रात 12 बजे दिन बदलने का कोई औचित्य नहीं है। हमारी प्राचीन गणना पद्धति में 60 सेकेंड का मिनट नहीं, बल्कि 30 घंटे में 30 मुहूर्त माने जाते हैं। यह कोई बंधन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की धरोहर और विचार का विषय है। उन्होंने कहा कि अतीत के इतिहास में खगोल विज्ञान को सूर्य की छाया से समझा जाता था। भारत का सेंटर पॉइंट उज्जैन माना गया है, लेकिन यह भी समय के साथ दोलायमान हुआ और 32 किमी दूर डोंगला तक पहुंचा। भगवान श्रीकृष्ण भी समय गणना का केंद्र खोजने डोंगला के पास नारायणा गांव आए थे, जहां उनके साथ बलराम और सुदामा भी मौजूद थे। सीएम ने आगे कहा कि 10 हजार साल पहले सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण कब हुआ था, इसकी गणना आज का कंप्यूटर भी नहीं कर पाएगा, लेकिन हमारी वैदिक काल गणना तुरंत सटीक जवाब देती है। सावन के महीने में छाता लेकर चलने की परंपरा भी इसी अनुभवजन्य गणना का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ग्रह, नक्षत्र और तिथियों के आधार पर जीवन के सभी निर्णय तय किए जाते थे। हमने विधानसभा में भी यही परंपरा अपनाने का प्रयास किया है- रात में भी काम हो सकता है, लेकिन अमावस्या के दिन अवकाश होना चाहिए।
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि आज से भारत के समय की नई परिभाषा लिखी जा रही है। उन्होंने कहा- जब हम मां की कोख में आते हैं तो ईश्वर प्रारब्ध पहले ही लिख देता है। मुख्यमंत्री ने वैदिक घड़ी लगवाकर वास्तव में भारत के समय की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक कदम उठाया है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म हिंदू संस्कृति में हुआ है। यह घड़ी हमें काल गणना की वैदिक परंपरा से जोड़ेगी और भारत को सोने की चिड़िया बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगी।
मंत्री कृष्णा गौर ने कहा- आज हमारा मुख्यमंत्री निवास विरासत और विकास का साक्षी बना है। इस घड़ी के माध्यम से हमें अपना स्वाभिमान लौटा है। मैं युवाओं से कहना चाहती हूं कि भविष्य आपके कंधों पर टिका है। मध्यप्रदेश के युवा दुनियाभर में नाम रोशन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का संबल सबके साथ है। मुझे विश्वास है कि आप आगे बढ़कर प्रदेश और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
सीएम के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने कहा कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है। भारतीय काल गणना सर्वाधिक विश्वसनीय पद्धति का पुनर्स्थापन विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के रूप में उज्जैन में पीएम मोदी द्वारा 29 फरवरी 2024 को किया गया था। जिसे देश और दुनिया में अच्छा रेस्पांस मिला। वैज्ञानिक दृष्टि से समृद्ध और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी यह विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय संस्कृति और हमारी पुरातन काल गणना पद्धति को वैश्विक स्तर पर एक नया आयाम देगी।


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