गंजबासौदा। नगर पालिका ने मूर्तिकारों की बैठक ली, एनजीटी ने जन जागरण किया, सामाजिक संगठनों प्रेरित किया मिट्टी की प्रतिमा बनाने और शासन की रोक से अवगत कराया। कार्रवाई की चेतावनी दी। लेकिन इसका कोई असर नगर के मूर्ति कारों पर नहीं हुआ। बड़ी प्रतिमाओं को छोड़कर तहसील के सामने खुले बाजार में बुधवार को 4 हजार से ज्यादा पीओपी से श्री गणेश की प्रतिमाओं को लोगों ने मजबूरी में खरीदा। दरअसल प्रतिमा विक्रय के लिए जो काउंटर लगाए गए थे। उन पर छोटी 10% मिट्टी से बनी प्रतिमाएं थी। जबकि 90% 3 फुट से छोटी प्रतिमाएं प्लास्टर ऑफ पेरिस की ही बनी रखी थी। नगर पालिका पर्यावरण सुरक्षा के लिए एनजीटी और सरकार के निर्देश पर पिछले 10 सालों से लगातार श्री गणेश और नवदुर्गा प्रतिमा निर्माण होने से पहले मूर्ति कारों की बैठक आयोजित करता है। उसमें प्रतिबंध सहित प्रदूषण के खतरे को बताते हुए मिट्टी की प्रतिमाएं बनाने के लिए निर्देशित करता है। लेकिन इन निर्देशों को दरकिनार करके प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएं बनाते हैं। बेचते हैं। जिम्मेदार देखते हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।
करीब 100 काउंटर लगे:
प्रतिमा विक्रय के लिए पूरे नगर में जगह-जगह करीब 100 काउंटर लगे। बड़े मूर्तिकारों ने 3 फुट से लेकर 5 और 6 फीट की श्री गणेश प्रतिमाएं मिट्टी की बनाई। लेकिन घरों में स्थापित होने वाले 6 इंच से लेकर ढाई फीट तक की श्री गणेश प्रतिमा प्लास्टर ऑफ पेरिस की बाजार में बेची गई।
सामाजिक संगठनों से लेकर धर्म गुरुओं ने भी आवाहन किया। सनातन धर्म मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करने और पूजन करने का विधान है। लेकिन लोगों को घर में स्थापित करने बाली मिट्टी की प्रतिमाएं आकर्षक नहीं मिली तो उन्होंने जो बाजार में मिल रही थी उनको ही खरीदा। घर में स्थापित कर पूजा की।
प्लास्टर ऑफ पेरिस से निर्मित प्रतिमा से प्रदूषित होती है नदी, जीवों को नुकसान
पूर्व नपा स्वास्थ्य अधिकारी आर के नेमा ने कहा कि प्लास्टर ऑफ पेरिस से निर्मित प्रतिमा नदी के पानी में नष्ट नहीं होती। केमिकल का उपयोग घातक होता है। पानी में घुलकर जल जीवों को हानि पहुंचाते हैं। इसके आती रिक्त मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होती है। इसीलिए एनजीटी ने पर्यावरण के खतरे को देखते हुए पीओपी प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगाई है। इसके बावजूद बैठक में भरोसा दिलाते हैं सरकार के निर्देशों का पालन करेंगे। लेकिन उसके बावजूद भी चोरी छुपे बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित प्रतिमा निर्माण करते हैं। पर्व के दौरान जन भावनाओं को देखते हुए कार्रवाई संभव नहीं हो पाती इसके कारण निर्माता फायदा उठा रहे हैं।
परिश्रम ज्यादा, सुखाने में भी दिक्कत
मूर्तिकारों का कहना है मिट्टी की प्रतिमा निर्माण में ज्यादा समय लगता है। सुखाने में दिक्कत आती है। टूटने का डर रहता है। फिनिशिंग ज्यादा नहीं आती। दूसरी तरफ प्लास्टर का पेरिस की प्रतिमा हल्की होती है। कई आकर के सांचे से जल्द बन जाती है। सूखने में समय नहीं लगता। फिनिशिंग और चमक अच्छी रहती है। इसलिए जल्द बिकती है। मेहनत भी कम लगती है। वर्तमान में मजदूरी बढ़ गई है। मिट्टी की प्रतिमा बनाने में खर्च ज्यादा आता है। इसके कारण जितने में छोटी प्रतिमा मिलती है। उतने में ही प्लास्टर ऑफ पेरिस की उससे डेढ़ गुना बड़ी मिल जाती है।
नपा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयासरत
नगर पालिका पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। समय-समय पर कार्यशाला और बैठक आयोजित कर रही है।
शशि यादव अध्यक्ष नगर पालिका गंजबासौदा।