मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई। साथ ही यह भी कहा कि लोकतंत्र की जड़ों को खोंखला किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सावाल उठाया कि मात्र 12 राज्यों को क्यों और बाकी राज्यों को क्यों नहीं।

भोपाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आपत्ति और लोकतंत्र की जड़ों पर पड़ने वाले खतरों को रेखांकित किया।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई। साथ ही यह भी कहा कि लोकतंत्र की जड़ों को खोंखला किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सावाल उठाया कि मात्र 12 राज्यों को क्यों और बाकी राज्यों को क्यों नहीं। चयन मानदंडों का पारदर्शी खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया, जिससे निर्णय की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। दरअसल, मध्यप्रदेश सहित 12 राज्यों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए है। भोपाल में अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने कहा कि चुनाव आयोग ने इसे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का नाम दिया है, लेकिन वे इसे सिलेक्टिव इंटेंसिव रिमूवल मानते हैं यानी वोटर लिस्ट से चुनिंदा नाम हटाने की प्रक्रिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग हर साल स्पेशल समरी रिवीजन करता आया है, तो अब एसआईआर की जरूरत क्यों पड़ी। हर साल जनवरी में नाम जोड़ने और हटाने का काम होता है, तो क्या आयोग को अपनी ही प्रक्रिया पर विश्वास नहीं है। अगर आयोग को खुद पर भरोसा नहीं, तो जनता उस पर कैसे भरोसा करेगी।
सिंघार ने कहा कि उन्होंने 19 अगस्त को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वोट चोरी के कई प्रमाण पेश किए थे, लेकिन अब तक न मप्र चुनाव आयोग और न ही भारत चुनाव आयोग ने कोई जवाब दिया है। भाजपा ने चुनाव आयोग के एजेंट के रूप में जवाब दिया था। सिंघार ने कहा-दो महीने में 16 लाख वोट बढ़े थे, और 9 जून 2025 को आयोग ने पत्र जारी कर कहा कि अंतिम सूची के बाद जो नाम जोड़े जाएंगे, उनकी जानकारी न तो किसी वेबसाइट पर डाली जाएगी, न किसी को दी जाएगी।
सिंघार ने बताया कि प्रदेश में 5 करोड़ 65 लाख मतदाता और 65 हजार मतदान केंद्र हैं। देश में 51 करोड़ मतदाता हैं। 4 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच सिर्फ एक महीने में साढ़े पांच करोड़ मतदाताओं की जांच कैसे संभव है। यह आयोग का अजूबा काम हो रहा है। इतनी कम अवधि में हर व्यक्ति के दस्तावेज सत्यापित करना संभव नहीं है, ऐसे में पारदर्शिता कैसे बनी रहेगी।
सिंघार ने कहा कि बिहार में लाखों लोगों को वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। कई मजदूर जो बाहर काम कर रहे थे, उन्हें डिलीट लिस्ट में डाल दिया गया। उन्होंने लोकसभा में 20 जुलाई 2023 को दिए गए एक जवाब का हवाला देते हुए कहा कि 50 लाख एमपी के लोग बाहर काम करते हैं, तो क्या उन्हें एमपी वापस आना पड़ेगा कि वे यहां के निवासी हैं। 50 लाख लोगों के नाम काटने की साजिश रची जा रही है।
सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी मतदाताओं के वोट काटने की तैयारी कर रही है। आदिवासियों के पास न इंटरनेट है, न कंप्यूटर। तीन लाख आदिवासियों के वनाधिकार पट्टे खारिज कर दिए गए, यानी 12 से 18 लाख वोट काटने की तैयारी पहले ही कर ली गई। सिंघार ने चेतावनी दी कि यह साजिश दलित, अल्पसंख्यक और ओबीसी समुदायों तक भी पहुंचेगी। ये लोग भी रोजगार के लिए बाहर जाते हैं, और जब बूथ लेवल अधिकारी उन्हें घर पर नहीं पाएंगे, तो उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे।


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