टाइगर के साथ चीता स्टेट बन चुका मध्य प्रदेश फिर से इतिहास रचने को तैयार है। कूनो नेशनल पार्क चीतों का पसंदीदा आवास स्थल बन चुका है। अब दक्षिण अफ्रीका के नामीबिया और बोत्सवाना से 8 और चीते आ रहे हैं। 28 फरवरी को ये चीते भारत की सरजमीं पर कदम रखेंगे। कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
By: Arvind Mishra
Feb 10, 202612:06 PM
श्योपुर। स्टार समाचार वेब
टाइगर के साथ चीता स्टेट बन चुका मध्य प्रदेश फिर से इतिहास रचने को तैयार है। कूनो नेशनल पार्क चीतों का पसंदीदा आवास स्थल बन चुका है। अब दक्षिण अफ्रीका के नामीबिया और बोत्सवाना से 8 और चीते आ रहे हैं। 28 फरवरी को ये चीते भारत की सरजमीं पर कदम रखेंगे। कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बात की पुष्टि सीएम डॉ. मोहन यादव ने की है। दरअसल, भारत में चीता संरक्षण की सबसे बड़ी और सफल कहानी बन चुके मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। दक्षिणी अफ्रीकी देश बोत्सवाना से आठ नए चीते भारत लाए जाएंगे, जिनमें दो वयस्क मादा चीते और उनके छह नन्हें शावक शामिल होंगे।
पहली बार शावक भी आएंगे
यह पहला मौका होगा जब मादा चीते अपने शावकों के साथ भारत आएंगी। इस कदम को भारत में स्थायी और स्वाभाविक चीता आबादी की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। इन चीतों के आने से कूनो नेशनल पार्क न सिर्फ भारत, बल्कि वैश्विक स्तर पर चीता संरक्षण का सबसे बड़ा और सफल माडल बनकर उभरेगा।
कूनों में बनाए जा रहे विशेष बड़े
चीतों की अगवानी को लेकर कूनो में बाड़ों से लेकर पशु चिकित्सा, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था तक हर स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बोत्सवाना की राजधानी गैबोरोन स्थित सर सेरेत्से खामा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारतीय वायुसेना का विशेष विमान इन चीतों को लेकर उड़ान भरेगा।
हेलीकाप्टर पहुंचेंगे कूनो
लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के बाद विमान ग्वालियर वायुसेना स्टेशन पर लैंड करेगा। यहां से चीतों को एयरफोर्स के हेलीकाप्टर के जरिए सीधे कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया जाएगा। यह पूरा ट्रांसफर आपरेशन हाई सिक्योरिटी और तय प्रोटोकाल के तहत होगा। चीतों की सेहत, तनाव स्तर और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा की हर कड़ी को बेहद सावधानी से डिजाइन किया गया है।
कूनो में सब मिलाकर 35 चीते
वर्तमान में मध्य प्रदेश में वयस्क चीतों और शावकों को मिलाकर कुल 35 चीते हैं। दुनिया भर में जहां चीतों के जीवित रहने की औसत दर करीब 40 प्रतिशत है, वहीं कूनो में यह आंकड़ा 62 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो भारत के संरक्षण माडल की वैश्विक सफलता को दर्शाता है।