गंजबासौदा। स्मार्ट सिटी योजना के तहत बन रहे बेदनखेड़ी पारासरी पुल का काम अभी अधूरा है। कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी को निर्देश दिया था कि बारिश से पहले पुल और पहुंच मार्ग का संरक्षण कार्य पूरा हो जाए। लेकिन आधी बारिश निकलने के बाद भी ठेकेदार न तो पिचिंग कर पाया और न ही पुल को कटाव से बचाने के लिए जरूरी टो बॉल का निर्माण पूरा कर सका। अब अगर सितंबर में 2019 या 2023 जैसी तेज बारिश हुई, तो नए पुल के दोनों ओर बने स्लोब और मिट्टी के भराव को नुकसान होने का खतरा है। इससे पहुंच मार्ग बिस सकता है। यातायात पर संकट आ सकता है।
दो करोड़ 85 लाख रुपए की लागत से बने रहे इस पुल के दोनों तरफ करीब 100-100 मीटर लंबे पहुंच मार्ग हैं। इन्हें मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए स्लोब बनाया गया है। इसके नीचे भरी गई मिट्टी और मलबे को नदी के बहाव से बचाने के लिए आरसीसी टो वॉल और पत्थरों की पिचिंग जरूरी है। लेकिन फिलहाल केवल एक तरफ टो वॉल की फाउंडेशन ही डाली गई है। आगे का काम ठप पड़ा है।
नगर के लिए अहम है बेदनखेड़ी पुल
वर्तमान में गंजबासौदा के 70 फीसदी हैवी ट्रैफिक का दबाव इसी बायपास पर है। पचमा बायपास पर बने पुराने पुल की ऊंचाई कम होने के कारण बरसात में अक्सर यातायात बंद हो जाता है। इसी कारण बेदनखेड़ी पर ऊंचाई वाला नया पुल तैयार किया गया, जिससे बारिश के दौरान भी ट्रैफिक निर्बाध चल सके। लेकिन संरक्षण कार्य अधूरा होने से खतरा जस का तस है।
ठेकेदार पर दबाव, लेकिन काम अटका
प्रशासन ने ठेकेदार पर दबाव भी बनाया था, लेकिन जिम्मेदारी से काम नहीं हुआ। अब आधा सीजन बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है। ठेकेदार की गारंटी अवधि होने के कारण यदि कोई नुकसान होता है तो भरपाई उसी से होगी। लेकिन शहरवासियों के लिए परेशानी और खतरा तो बरकरार ही रहेगा।
बारिश में काम बंद, बड़ा जोखिम
बारिश का मौसम शुरू होते ही ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है। उपयंत्री नगरपालिका मोहनी कौरी का कहना है कि साइट पर कीचड़ होने की वजह से निर्माण संभव नहीं है। लेकिन काम जल्द पूरा कराया जाएगा। सवाल यह है कि जब कलेक्टर ने पहले ही बारिश पूर्व काम पूरा करने को कहा था, तब ढील क्यों दी गई? अब बारिश के बीच कटाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है। नुकसान की जिम्मेदारी भी ठेकेदार पर ही आएगी।
खतरे की आशंका
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार यदि पारासरी नदी लबालब हो गई तो पुल के पास स्लोप से मिट्टी का कटाव शुरू हो सकता है। इससे पहुंच मार्ग कमजोर हो जाएगा। भारी वाहन निकलने से सड़क घिस सकती है। परिणामस्वरूप ट्रैफिक को शहर के भीतर से निकालना पड़ेगा। इससे बस्तियों में जाम हादसों का खतरा बढ़ेगा।
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