मध्यप्रदेश में माननीय मनमानी पर उतारू हैं। उनके रुतबे में कोई कमी नहीं दिख रही है। संगठन की हिदायत भी हवा में नजर आ रही है। इससे संगठन के दिग्गजों का टेंशन बढ़ रहा है। वाह-वही कम और किरकिरी ज्यादा हो रही है। दरअसल, मध्यप्रदेश में अफसरों और नेताओं के बीच पिछले एक साल में टकराव की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं।

विधायक ने कलेक्टर को मुक्का मारने के लिए हाथ उठा दिया।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में माननीय मनमानी पर उतारू हैं। उनके रुतबे में कोई कमी नहीं दिख रही है। संगठन की हिदायत भी हवा में नजर आ रही है। इससे संगठन के दिग्गजों का टेंशन बढ़ रहा है। वाह-वही कम और किरकिरी ज्यादा हो रही है। दरअसल, मध्यप्रदेश में अफसरों और नेताओं के बीच पिछले एक साल में टकराव की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। टकराव अब तक तू-तू मैं-मैं तक सीमित था, मगर अब तो हाथापाई तक पहुंच गया है। अफसरों से टकराव में कांग्रेस के विधायक भी पीछे नहीं है। इससे अफसरों की लॉबी भी नेताओं के खिलाफ मुखर है। हाल ही में भिंड के विधायक नरेंद्र कुशवाह और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के बीच खाद और रेत के विवाद पर मारपीट होते-होते बची। 27 अगस्त को भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह खाद की समस्या को लेकर समर्थकों के साथ कलेक्टर बंगले पर पहुंचे। विधायक और समर्थकों की नारेबाजी चली। कलेक्टर बाहर नहीं निकले तो समर्थक और विधायक ने दरवाजा खोलकर बंगले में घुसने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। जब हंगामा बढ़ा तो कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव बाहर आए। दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई। देखते ही देखते तू-तू-मैं-मैं तक जा पहुंची। कलेक्टर ने विधायक को उंगली दिखाई तो विधायक ने भी कलेक्टर को मुक्का मारने के लिए हाथ उठा दिया। विधायक के समर्थक कलेक्टर चोर है के नारे लगाने लगे। यही नहीं विधायक ने कलेक्टर मोबाइल फोन भी छीन लिया और पांच मिनट तक नहीं दिया।
इधर, रविवार को बैतूल दौरे पर पहुंचे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा- हर व्यक्ति की अपनी सीमाएं होती हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों पर समाज और जनता की समस्याओं का दबाव रहता है, जिसके कारण उनसे ऐसा व्यवहार हो जाता है, जो नहीं होना चाहिए। इसी तरह अधिकारियों को भी परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार करना चाहिए। जनता की समस्या सर्वोपरि है, इसलिए दोनों वर्गों को सामंजस्य और संयम से काम लेना चाहिए। खंडेलवाल ने बताया कि प्रदेश में हाल ही में सामने आई दो-तीन घटनाओं पर संगठन ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने भी इस पर बातचीत की है। भविष्य में कोशिश की जाएगी कि इस तरह की घटनाएं न हों। मानव स्वभाव है, गाइडलाइन कितनी भी बना दो, परिस्थिति के कारण कभी-कभी विवाद की स्थिति बन जाती है। लेकिन हमारा निरंतर प्रयास है कि जनप्रतिनिधि और ब्यूरोक्रेट्स के बीच सामंजस्य बना रहे।

इधर, मध्यप्रदेश में विधायकों के बयानों को लेकर संगठन ने सख्ती दिखाई और जमकर फटकार भी लगा रहा है। साथ ही अनुशासन-मर्यादा में रहने की हिदायत दे रहा है। फिर भी कोई फर्क नहीं नजर आ रहा है। अब भिंड विधायक नरेंद्र कुशवाह को भाजपा प्रदेशध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने पार्टी दफ्तर बुलाया। उनसे कहा कि आपका बर्ताव पार्टी लाइन के खिलाफ है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में इस तरह का आचरण स्वीकार्य नहीं होगा। इससे पहले भाजपा हाईकमान ने अप्रैल में मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल, देवरी नगर पालिका अध्यक्ष समेत कई नेताओं को भोपाल तलब कर फटकार के साथ समझाइश दी थी। पिछले साल अक्टूबर में भी विधायक प्रदीप पटेल, प्रीतम लोधी, ब्रज बिहारी पटेरिया को भोपाल तलब कर पार्टी लाइन में चलने की हिदायत दी गई थी।

गत 25 जुलाई की रात रीवा के चोरहटा थाने में कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के खिलाफ एफआईआर की मांग को लेकर पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। इस दौरान वहां तैनात महिला सीएसपी रितु उपाध्याय से उनकी बहस हो गई। त्रिपाठी ने गुस्से में कहा- इसे मेरी नजरों से दूर ले जाओ। ये असंवेदनशील औरत है। जब सीएसपी ने उन्हें तमीज में रहने की हिदायत दी, तो समर्थकों ने हंगामा कर दिया। इस दौरान समर्थक सीएसपी की ओर हमलावर अंदाज में बढ़े। थाना प्रभारी सीएसपी को थाने के भीतर ले गए, लेकिन भीड़ थाने में घुस गई। हालांकि बाद में त्रिपाठी को माफी मांगनी पड़ी।
भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री ओम प्रकाश धुर्वे 19 अगस्त को कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान पहुंचे थे। धुर्वे कलेक्टर नेहा मारव्या की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए नाराज हो गए। जनसुनवाई के लिए कार्यालय पहुंचे कई लोगों की शिकायतों को सुना और कलेक्टर पर इनकी सुनवाई न करने के आरोप लगाए। विधायक ने यह भी कहा कि जनसुनवाई की बजाय गरीबों को अलग-अलग विभागों में लिखकर भेज दिया जाता है, जबकि सभी विभाग के अधिकारी वहां मौजूद थे। इस दौरान धुर्वे ने कहा कि कलेक्टर जनता के नौकर होते हैं, मुख्यमंत्री ने इनको सेवा के लिए भेजा है और ये यहां मुर्गा खाएं, बकरा खाएं, ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पिछोर विधायक प्रीतम लोधी अपने बयानों की वजह से हमेशा ही सुर्खियों में बने रहते हैं। अप्रैल में विधायक लोधी ने शिवपुरी में एक सभा के दौरान अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था- अधिकारियों ने हमारे काम नहीं किए तो मैं उनके नल, बिजली के कनेक्शन काट दूंगा। उनका पानी तो छोड़ो, पेशाब तक बंद करा दूंगा। एसपी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि हमारे कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचारों के मामले में सही कार्रवाई नहीं कर रहे। एसपी मेरी कॉल रिकॉर्डिंग करवा रहे हैं और कांग्रेस के साथ मिलकर हत्या करवाना चाहते हैं।
मंत्रियों ने भी कई बार सीमा रेखा का उल्लंघन किया है। मंत्री विजय शाह ने तो आपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बता दिया था। इंदौर के महू में एक सभा में शाह ने कहा था- उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा। हालांकि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
धार में एक जनसभा में छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- छिंदवाड़ा कलेक्टर इतने डरपोक हंै कि भाजपा का गुलाम हो गए हैं। मैंने कहा है कि अगर गुलाम है तो भाजपा, आरएसएस की चड्डी पहन लें। कलेक्टर हो, नौकरी जॉइन करते हो तो कहा जाता है कि जनता का नौकरशाह, लेकिन ये तो भाजपा के नौकर बन गए।


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