सतना और मैहर जिलों में दस्तक अभियान के दौरान 0 से 5 साल के 9 हजार से अधिक बच्चे एनीमिया से ग्रसित पाए गए हैं, जिनमें 18 सीवियर एनीमिक हैं। यह आंकड़े बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता पैदा कर रहे हैं।

3 हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
सतना व मैहर जिले में 0 से 5 साल के अधिकतर बच्चे एनीमिया से ग्रसित पाए जा रहे हैं। ये हकीकत हम नहीं बल्कि दस्तक अभियान की रिपोर्ट बयां कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक दस दिनों में 10 हजार से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग में 9 हजार से अधिक बच्चे एनीमिया से पीड़ित पाए गए। उलेखनीय है कि सतना-मैहर जिले में 22 जुलाई से दस्तक अभियान कार्यक्रम चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत जिले के 2 लाख से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में 0 से 5 साल के बच्चों की स्क्रीनिंग कर उनमे निमोनिया, कुपोषण, एनीमिया, डायरिया, विटामिन ए एवं अन्य शारीरिक बीमारियों की पहचान किया जाना है। अति गंभीर बच्चे को हायर सेंटर रेफर किया जाना है। 45 दिनों तक चलने वाला यह अभियान 16 सितम्बर तक चलेगा।
मोप-अप राउंड में होगी छूटे बच्चों की स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले में 0 से पांच साल के कुल 2 लाख 97 हजार 234 बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। जिसमे से 93 फीसदी बच्चों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है, यानि कि 2 लाख 77 हजार 422 बच्चों को डाटा फीड कर लिया गया, जिनकी स्क्रीनिंग करना है। छूटे हुए बच्चों का बाद में मोप-अप राउंड में घर भेट आधारित कार्यक्रम में स्क्रीनिंग की जाएगी। बताया गया कि दस दिनों में एक अगस्त तक 134 फीसदी अर्थात 10 हजार 741 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
133 फीसदी बच्चे एनीमिक
रिपोर्ट के अनुसार दस दिनों की स्क्रीनिंग में पूर्वानुमानित लक्ष्य की तुलना में 133 फीसदी बच्चे अर्थात 9579 एनीमिक पाए गए हैं। इसके अलावा 18 बच्चे सीवियर एनीमिक पाए गए हैं। 13 बच्चे कमजोर व दुबले पाए गए, वहीं 38 बच्चे निमोनिया से पीड़ित पाए गए। विभाग के लिए राहत की बात यह कि अभी तक कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं मिला है। केन्द्रवार 123 फीसदी यानि 9917 ओआरएस के पैकेट एवं 8410 बच्चों को जिंक की टेबलेट बाटी गई। 137 फीसदी बच्चे अर्थात 9333 बच्चों को विटामिन ए का घोल दिया गया। इसी तरह 2787 बच्चों को आईएफए सप्लीमेंट दिया गया।

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