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नए जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा की ताजपोशी के साथ कांग्रेस सतना में पोस्टर पॉलिटिक्स में उलझी, अजय सिंह राहुल की तस्वीर गायब होने से बढ़ा गुटबाजी का विवाद

सतना में कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा की नियुक्ति के बाद पार्टी गुटबाजी और पोस्टर पॉलिटिक्स में उलझ गई है। स्वागत पोस्टरों से कद्दावर कांग्रेसी नेता अजय सिंह राहुल की तस्वीर गायब होने पर नाराजगी बढ़ी। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह कदम पार्टी को और अधिक बिखराव की ओर ले जा रहा है।

By: Yogesh Patel

Aug 27, 20258:10 PM

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नए जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा की ताजपोशी के साथ कांग्रेस सतना में पोस्टर पॉलिटिक्स में उलझी, अजय सिंह राहुल की तस्वीर गायब होने से बढ़ा गुटबाजी का विवाद

हाइलाइट्स

  • नए जिलाध्यक्ष के स्वागत पोस्टरों से अजय सिंह राहुल की तस्वीर गायब होने पर बवाल।
  • कांग्रेस में एकजुटता की बजाय गुटबाजी और असंतोष बढ़ता दिख रहा है।
  • सिद्धार्थ कुशवाहा के सामने सभी गुटों को साधने की बड़ी चुनौती।

सतना, स्टार समाचार वेब

कांग्रेस ने हाल ही में सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा डब्बू को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है, लेकिन इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। शहर में नए जिलाध्यक्ष के स्वागत के लिए लगाए गए बैनर-पोस्टरों से कांग्रेस एक बार पुन:सतना में पोस्टर पालिटिक्स में उलझती नजर आ रही है। दरअसल पोस्टर से विंध्य के  कद्दावर नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल की तस्वीर नदारद है, जिससे पार्टी का एक बड़ा वर्ग नाराज है।

मंशा थी एकजुटता की पर बढ़ रहा बिखराव 

कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश नेताओं की पैरवी पर सिद्धार्थ कुशवाहा को जिलाध्यक्ष इसलिए बनाया है ताकि रसातल में जा रहा पार्टी का जनाधार सतना में बढ़ाया जा सके और किरचा-किरचा बिखरी पार्टी को एकसूत्र में पिरोकर संगठित किया जा  सके लेकिन यहां जिस प्रकार की पोस्टर पालिटिक्स छिड़ी हुई है उससे कांग्रेस आलाकमान की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। जिलाध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस में टूट और बिखराव ज्यादा बढ़ता नजर आ रहा है। पार्टी अनुशासन की डोर में बंधे कांग्रेसी बेशक मुखर होकर विरोध न जता पा रहे हों लेकिन संगठन में भीतर ही भीतर उबाल नजर आ रहा है। कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं समेत स्थानीय कार्यकर्ताओं  का कहना है कि पार्टी अब ‘ व्यक्ति विशेष’  की पार्टी बनकर रह गई है जिसे हर प्रकार की सौगातों से नवाजा जा रहा है। सवाल तो यहां तक उठ रहे हैं कि महज 9 साल पहले पार्टी में आए व्यक्ति को हर चुनाव की टिकट व संगठन के कई पद आखिर कैसे दे दिए गए? संभवत: यही कारण है कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पार्टी को व्यथित मन से छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं जिससे यहां भाजपा लगातार सशक्त हो रही है। 

इसलिए बढ़ी नाराजगी 

दरअसल कांग्रेस का नया  जिलाध्यक्ष बनने के बाद सिद्धार्थ कुशवाहा के शहर में बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर में राष्टÑीय व प्रदेश स्तर तक के कांग्रेस नेताओं के साथ साथ विंध्य व सतना के नेताओं की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्टर में विंध्य व सतना के  कमलेश्वर पटेल,पूर्व विस उपाध्यक्ष व अमरपाटन विधायक डा. राजेंद्र सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष दिलीप मिश्रा, पूर्व शहर अध्यक्ष मकसूद अहमद समेत कई नेताओं की फोटो है लेकिन सतना की कांग्रेसी राजनीति में अच्छा खासा जनाधार रखने वाले विंध्य के कद्दावर  कांग्रेसी अजय सिंह राहुल की तस्वीर को लगाने से परहेज किया गया है , श्री कुशवाहा को कांग्रेस की राजनीति की एबीसीडी पढ़ाकर पार्टी ज्वाइन कराने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ही थे।   बावजूद इसके पूर्व नेता प्रतिपक्ष को बैनर-पोस्टर से गायब करने के मसले ने उनके भारी तादाद में मौजूद समर्थकों को नाराज कर दिया है। कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि नए जिलाध्यक्ष द्वारा जानबूझकर कांग्रेस के पुराने और लोकप्रिय नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे पार्टी का जनाधार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। कई कांग्रेसियों का मानना है कि यह निर्णय न केवल वरिष्ठता का अपमान है बल्कि पार्टी को जातिगत आधार पर बांटने की साजिश भी है।

सबको साथ लेकर चलने की चुनौती 

जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा के समक्ष कांग्रेसियों को साथ में लेकर चलने की एक बड़ी चुनौती मुंह बाए खड़ी है। सतना की राजनीति पर पैनी नजर गड़ाने वाले राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अब तक एक विशेष वोट बैंक की आड़ लेकर अपनी राजनीति को चमकाने वाले सतना विधायक व जिलाध्यक्ष श्री कुशवाहा की असली संगठनात्मक क्षमता परखने का समय अब आया है जिसमें उनका राजनीतिक व संगठनात्मक कौशल राजनीति की कसौटी पर कसा जाएगा। सभी गुटों को एकजुट कर उन्हें जनोन्मुखी राजनीति के लिए प्रेरित करने के लिए नए जिलाध्यक्ष क्या रणनीति अपनाएंगे, यह तो वक्त बताएगा लेकिन उनकी ताजपोशी के प्रारंभिक चरण में ही जिस प्रकार से विवाद सामने आ रहे हैं, उससे उनके  साथ साथ कांग्रेस की भी राह सतना में आसान नहीं होगी।

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