स्वास्थ्य विभाग की संभागीय समीक्षा बैठक में 'एमडी मैडम' की सख्ती ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए। अधूरी रिपोर्टिंग, ढीली कार्यशैली और प्राइवेट राजनीति को लेकर तीखी फटकार लगी। सतना से लेकर सांसद की ड्योढ़ी तक हड़कंप मचा। सालभर से सुस्त पड़े अस्पताल में अचानक सफाई अभियान और रजिस्टर भराई शुरू हो गई। पढ़िए बृजेश पाण्डेय की विशेष रिपोर्ट।

मैडम साहिबा ने उतारी खुमारी
संभागीय स्तर पर हुई स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में 'एमडी मैडम' ने अपनी सख्ती से अधिकारियों को हैरान कर दिया। सतना जिले के प्रदर्शन पर जब सवाल-जवाब का दौर शुरू हुआ, तो कई आला अधिकारी, जो आवभगत की उम्मीद में आए थे, जवाब देने में नाकाम रहे और सिर झुकाते नजर आए। माहौल किसी कड़क क्लास रूम जैसा हो गया, जहाँ होमवर्क न करने वाले बच्चों की तरह अधिकारी परेशान दिखे। कई अफसरों का ब्लड प्रेशर तक बढ़ने लगा। मैडम ने ढीली कार्यशैली और अधूरी रिपोर्टों पर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। कहा- यह कोई 'शादी की पार्टी' नहीं है। एक वरिष्ठ महिला अधिकारी, जिनकी 15 साल की सेवा थी, रिपोर्टिंग न कर पाने पर उनका नाम मैडम ने अपनी डायरी में दर्ज कर लिया। एमडी मैडम की डेड लाइन देने से अधिकारी सकते में आ गए।
काश, रोज आएं बड़े अधिकारी
काश 'राज्य स्तर' के अधिकारी हर हफ्ते 'जिला अस्पताल' के भ्रमण पर आ जाएं तो 'मरीजों' का कल्याण हो जाए। दो दिन रोज सुबह कोई यह बोल देता था कि शायद आज 'मैडम' अस्पताल आ आ सकती हैं, फिर क्या पूरा स्टाफ साफ-सफाई में लग जाता था। दो दिनों में 'मरीजों' ने आराम और 'अस्पताल स्टाफ' ने खूब काम किया। मैडम साहिबा के आने के चलते कई 'डॉक्टरों में गुटबाजी' की खबरें भी सामने आईं। इस गुटबाजी में यह सामने आया कि अगर मैडम ने जरा सा भी कुछ कहा तो हमे पूरा ठीकरा 'प्रशासक' के सिर पर फोड़ देना है। साहिबा के भ्रमण की आहट में अस्पताल का कोना-कोना साफ था। सालभर से खाली पड़े रजिस्टर मेंटेन हो गए। बीमार अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी गई। शाम वाली ओपीडी की लाइटें भी चालू कर दी गई। 'फर्श' को चिकनाने में 'डॉक्टर' तक लग गए और वार्ड के 'चादर' बिछाने में नर्स। ये सब देखकर वहां मौजूद एक मरीज के बुजुर्ग परिजन बोले-काश बड़े अधिकारी रोज आते रहें।
दागी डॉक्टर ने दिखाए तेवर
कुछ दिनों पहले ही 'दागी' हुए 'हड्डी के डॉक्टर' ने भी अपने तेवर दिखाए। उन्होंने कई 'एएनएम' कार्यकतार्ओं के वेतन रोकने की सिफारिश 'बड़े साहब' से कर दी। बड़े साहब से यह भी कहा कि कोई भी कर्मचारी मेरा कहना नहीं मानते और न ही मुझे अधिकारी मानते हैं। क्यों न इन कर्मियों के ऊपर आपके द्वारा कोई कार्रवाई की जाए। बस इतना सुनते ही 'बड़े साहब' को गुस्सा आया और उन्होंने उल्टा उन्हें ही ज्ञान दे दिया, कि आप खुद अधिकारियों का कहा नहीं मानते, क्यों न सबसे पहले आप पर कार्रवाई की जाए? बस इतना सुनते ही हड्डी रोग विशेषज्ञ के पैरो तले जमीन खिसक गई।
याद आई 'सांसद की ड्योढ़ी'
जिले की 'एक चिकित्सक और अधिकारी से कई विकासखंडों के 'हेल्थ आॅफिसर' पीड़ित हैं। हों भी क्यों न क्योंकि इन अधिकारी 'मैडम' ने जब 'आईएएस अधिकारी' को नहीं बख्शा, उसे भी 'जेल' भिजवा दिया, तो ये हेल्थ आॅफिसर किस खेत की मूली है। मैडम से बचने के लिए 'सांसद की ड्योढ़ी' चुनी गई। अल सुबह एक सैकड़ा कर्मचारी गुहार लगाने सांसद के निवास पहुंच गए। अधिकारी मैडम को पद से हटाने ज्ञापन भी सौंपा। उनमें से कुछ 'खबरीलाल' ने सांसद के कानों में कहा कि यह वही 'महिला डॉक्टर' हैं जिसने उसके निजी अस्पताल की जांच में गए 'आईएएस' तक को निपटा दिया था। सांसद ने मौके पर ही स्वास्थ्य आयुक्त को फोन मिलाया और कुंडली तलब कर ली।


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