भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य घोषित किया गया। जानें पुष्कर पीठ, 60 किन्नरों की घर वापसी और नई नियुक्तियों का पूरा विवरण
By: Star News
Feb 15, 20265:39 PM
भोपाल। स्टार समाचार वेब
झीलों की नगरी और मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में महाशिवरात्रि पर ऐसा हुआ, जिसने सनातन धर्म के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। राजधानी में आयोजित 'किन्नर धर्म सम्मेलन' में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में घोषित कर उनका भव्य पट्टाभिषेक किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच, किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की उपस्थिति में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। हिमांगी सखी अब राजस्थान स्थित पुष्कर पीठ की कमान संभालेंगी, जिसे देश की पहली 'किन्नर शंकराचार्य पीठ' के रूप में मान्यता दी गई है।
मूल रूप से मुंबई की रहने वाली हिमांगी सखी 'मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा' की प्रमुख हैं। वे न केवल एक आध्यात्मिक गुरु हैं, बल्कि दुनिया की पहली किन्नर भागवत कथा वाचक के रूप में भी विख्यात हैं। उनके इस पद पर आसीन होने से किन्नर समाज को धार्मिक और सामाजिक रूप से नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
इस सम्मेलन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू 'घर वापसी' अभियान रहा। आयोजन के दौरान दावा किया गया कि विभिन्न परिस्थितियों के कारण इस्लाम या अन्य धर्म अपना चुके 60 किन्नरों ने पुनः हिंदू धर्म में वापसी की है। शुद्धिकरण की प्राचीन वैदिक प्रक्रियाओं के बाद इन सभी को सनातन धर्म में शामिल किया गया। आयोजकों के अनुसार, किन्नर समुदाय को मुख्यधारा और अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है।
किन्नर समुदाय के भीतर धार्मिक ढांचे को मजबूती देने के लिए सम्मेलन में कई अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गईं। जगतगुरू काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा (राजस्थान), संजना (भोपाल), संचिता (महाराष्ट्र) और महामंडलेश्वर सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर, सागर को नियुक्त किया गया है।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया गया जब किन्नर समुदाय के भीतर गद्दी और उत्तराधिकार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। साथ ही, धर्म परिवर्तन के बढ़ते मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी थी। हिमांगी सखी का पट्टाभिषेक और सामूहिक घर वापसी को इन विवादों के समाधान और समुदाय की एकजुटता के रूप में देखा जा रहा है।