ईरान में बढ़ती हिंसा और 2500 से ज्यादा मौतों के बीच भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों को तुरंत वहां से निकलने को कहा है। जानें विदेश मंत्रालय के मुख्य निर्देश।

तेहरान/नई दिल्ली: स्टार समाचार वेब
ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी भीषण हिंसा और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत सरकार ने वहां रह रहे अपने नागरिकों के लिए एक कड़ी सुरक्षा एडवाइजरी (Security Advisory) जारी की है। विदेश मंत्रालय ने बिगड़ते हालातों को देखते हुए सभी भारतीयों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने का निर्देश दिया है।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ईरान में सुरक्षा स्थिति तेजी से बदल रही है। ऐसे में वहां मौजूद छात्र, तीर्थयात्री, कारोबारी और पर्यटक जो भी साधन उपलब्ध हो (जैसे कमर्शियल उड़ानें), उनका उपयोग कर सुरक्षित रूप से देश से बाहर निकल आएं। कहा गया है कि सभी भारतीय नागरिक अपना पासपोर्ट, पहचान पत्र और इमिग्रेशन से जुड़े कागजात हर समय अपने पास तैयार रखें। नागरिकों को किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन, भीड़भाड़ वाले स्थानों और अशांत क्षेत्रों से दूर रहने को कहा गया है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक तुरंत दूतावास से संपर्क करें।
ईरान में जारी इस अशांति ने अब तक 2,572 लोगों की जान ले ली है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि यह संख्या 1979 की क्रांति के बाद सबसे अधिक है। वहीं, ईरान के प्रशासन ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई और फांसी की सजा के संकेत दिए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर हलचल तेज है।
ईरान में वर्तमान में जारी विद्रोह और अशांति के पीछे कई गहरे आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक कारण हैं। इस विद्रोह की शुरुआत मुख्य रूप से 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई थी, जो अब पूरे देश में फैल चुका है।
मुद्रा की गिरावट: ईरान की करेंसी 'रियाल' (Rial) का मूल्य रिकॉर्ड स्तर तक गिर गया है। स्थिति यह है कि यूरोप के कई देशों में इसका मूल्य 'शून्य' माना जा रहा है।
महंगाई: खाने-पीने की चीजों की कीमतें 70% से अधिक बढ़ गई हैं। आम लोगों के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
सब्सिडी खत्म करना: जनवरी 2026 की शुरुआत में सरकार ने जरूरी वस्तुओं के आयात पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म करने का फैसला किया, जिससे जनता में भारी आक्रोश फैल गया।
12-दिवसीय युद्ध: जून 2025 में इजरायल और ईरान के बीच हुए भीषण हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया।
प्रतिबंध (Sanctions): अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।
धार्मिक शासन का विरोध: प्रदर्शनकारी अब केवल महंगाई का नहीं, बल्कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से चले आ रहे धार्मिक शासन के खात्मे की मांग कर रहे हैं।
रजा पहलवी की चर्चा: ईरान के अंतिम शाह के बेटे, रजा पहलवी, इस विद्रोह में एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। कई प्रदर्शनकारी उनके समर्थन में नारे लगा रहे हैं और लोकतांत्रिक बदलाव की मांग कर रहे हैं।
ईरान के कई हिस्सों में पानी की गंभीर कमी, बार-बार बिजली कटौती (Power Outage) और बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं और व्यापारियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई हिंसक कार्रवाई, इंटरनेट पर पाबंदी और हजारों लोगों की गिरफ्तारी ने आग में घी का काम किया है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 2,500 के पार पहुँच चुकी है।
प्रमुख घटनाक्रम और कारण:
| कारण | प्रभाव |
| मुद्रा अवमूल्यन | रियाल का मूल्य डॉलर के मुकाबले लगभग खत्म होना। |
| सब्सिडी में कटौती | खाद्य पदार्थों और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में भारी वृद्धि। |
| इजरायल-ईरान संघर्ष | राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध और सैन्य खर्च में 150% की वृद्धि। |
| राजनीतिक मांग | धार्मिक शासन का अंत और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग। |
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