रिकॉर्ड 40 दिन बाद अमेरिकी सरकार को फिर से खोलने की सहमति से कच्चे तेल की कीमतों में 0.98% का उछाल आया। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों ने कहा है कि मांग में स्थिर वृद्धि के अभाव में तेल बाजार में व्यापक मंदी का दृष्टिकोण बना रहेगा। जानें विशेषज्ञों की राय।

नई दिल्ली. स्टार समाचार वेब
अमेरिका में सरकारी कामकाज फिर से शुरू होने की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की गई। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 0.98 प्रतिशत बढ़कर 60.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गईं। बाजार ने इस वृद्धि को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में नीतिगत अनिश्चितता में कमी आने के संकेत के रूप में देखा। इस तेजी को इस आशावाद से बल मिला कि शटडाउन के समाधान से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में विश्वास बहाल होगा।
अमेरिकी सीनेटरों ने रविवार को रिकॉर्ड 40 दिनों के आंशिक बंद के बाद सरकार को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की। इस समझौते के तहत, सरकार को 30 जनवरी तक के लिए वित्त पोषण मिलेगा। यह कदम कम से कम आठ सीनेट डेमोक्रेट्स के समर्थन से उठाया गया है, और इसमें दिसंबर में 'अफोर्डेबल केयर एक्ट' सब्सिडी बढ़ाने पर मतदान भी शामिल है। सीनेट द्वारा जल्द ही इस प्रस्ताव पर मतदान किए जाने की उम्मीद है।
अल्पकालिक सुधार के बावजूद, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि व्यापक तेल बाजार के लिए समग्र दृष्टिकोण मंदी का बना हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने स्पष्ट किया, "जब तक हम मांग में एक स्थिर वृद्धि नहीं देखते, तब तक तेल की कीमतों में मंदी का रुख कायम रहेगा।" उनके अनुसार, शटडाउन समाप्त होने की उम्मीद से बाजार की धारणा में सुधार और कीमतों में मामूली वृद्धि हो सकती है। हालांकि, बाजार की व्यापक धारणा तब तक मंदी की ही रहेगी जब तक कि मांग में उल्लेखनीय वृद्धि न हो जाए या भू-राजनीतिक अथवा प्राकृतिक कारणों से आपूर्ति में कोई बड़ा व्यवधान न आए। बाजार सहभागियों ने सीनेट डेमोक्रेट्स के सरकार को दोबारा खोलने और कई विभागों को अगले वित्तीय वर्ष तक वित्त पोषित करने के समझौते को नीतिगत अनिश्चितता में कमी के संकेत के रूप में लिया है।
कहा जा रहा है कि इस उछाल के बावजूद, आपूर्ति पक्ष के निरंतर दबावों के कारण व्यापक तेल बाजार सतर्क बना हुआ है। ओपेक+ और उसके सहयोगी देशों ने दिसंबर के लिए उत्पादन में हल्की वृद्धि की है। हालांकि, उन्होंने 2026 की पहली तिमाही के दौरान और वृद्धि पर संयम बरतने का संकेत दिया है, ताकि अधिक आपूर्ति को रोका जा सके। इसके अलावा, गैर-ओपेक उत्पादकों का बढ़ता उत्पादन भी बाजार संतुलन की चिंताओं को बढ़ा रहा है।

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टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर टाटा ट्रस्ट्स में दरार आ गई है। सीनियर ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने बिना सलाह के फैसले लेने पर आपत्ति जताई है।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84 फीसदी गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था।
देशभर के बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इस सप्ताह सभी बैंक आम दिनों की तरह खुले रहेंगे और कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को टालने का फैसला किया है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह गिरे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार पर हावी रहीं। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
गर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। आज रविवार को भले ही बैंक की शाखाएं खुली हुई हैं और कामकाज चल रहा है, लेकिन आने वाले हफ्ते में बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहने वाली हैं। आम ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और करोड़ों रुपए का वित्तीय लेनदेन अटकने की संभावना है।