मध्यप्रदेश में सुशासन दिवस पर 'ई-जीरो एफआईआर' सेवा शुरू। ₹1 लाख से ज्यादा की सायबर धोखाधड़ी में अब घर बैठे दर्ज होगी FIR। जानें गोल्डन ऑवर का महत्व और 5-चरणीय प्रक्रिया

भोपाल | स्टार समाचार वेब
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती 'सुशासन दिवस' के अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों की सायबर सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 'सायबर सुरक्षित भारत' विज़न के अनुरूप राज्य में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था शुरू की गई है। यह प्रणाली विशेष रूप से उन पीड़ितों के लिए है जिन्होंने ₹1 लाख से अधिक की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी का सामना किया है।
जुलाई 2024 से लागू नई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत 'जीरो एफआईआर' को वैधानिक मान्यता दी गई है। इसी का लाभ उठाते हुए मध्यप्रदेश पुलिस ने इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप (ई-जीरो एफआईआर) में ढाला है। अब पीड़ित को क्षेत्राधिकार या थाने की सीमाओं में उलझने की जरूरत नहीं होगी; वे देश के किसी भी कोने से डिजिटल माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
सायबर अपराध की दुनिया में शुरुआती 2 घंटे 'गोल्डन ऑवर' कहलाते हैं। ई-जीरो एफआईआर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके माध्यम से आईपी लॉग (IP Log) और ट्रांजैक्शन आईडी जैसे डिजिटल साक्ष्य तत्काल सुरक्षित कर लिए जाते हैं। इससे बैंकिंग चैनल और I4C (भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र) तुरंत सक्रिय हो जाते हैं, जिससे ठगी गई राशि के अपराधी के खाते में पहुंचने से पहले ही 'फ्रीज' होने की संभावना बढ़ जाती है।
शिकायत: पीड़ित हेल्पलाइन 1930 या NCRP पोर्टल पर रिपोर्ट करता है।
ऑटोमेशन: ₹1 लाख से अधिक के मामलों में डेटा भोपाल स्थित सायबर हब पहुंचता है और स्वतः ई-जीरो एफआईआर में बदल जाता है।
नंबर अलॉटमेंट: पीड़ित को तुरंत डिजिटल एफआईआर नंबर मिल जाता है।
हस्तांतरण: राज्य सायबर पुलिस समीक्षा के बाद केस संबंधित क्षेत्रीय थाने को भेजती है।
नियमितीकरण: शिकायतकर्ता को 3 दिनों के भीतर नजदीकी थाने जाकर इसे रेगुलर एफआईआर में बदलना होता है।
यह व्यवस्था पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा और एडीजी श्री ए. साई मनोहर के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। इस प्रणाली के एकीकरण (NCRP, I4C और CCTNS) से अब नागरिक अपने केस की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे। पोर्टल पर सीधे स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड करने की सुविधा से दस्तावेजीकरण भी आसान हो गया है।

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