रीवा रेलवे स्टेशन के टैक्सी स्टैंड में मनमानी वसूली, बदसलूकी और वाहनों से डीजल-पेट्रोल गायब होने की शिकायतें।
By: Yogesh Patel
Jan 28, 20264:37 PM
हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
25 वर्ष पहले रेलवे स्टेशन के टैक्सी स्टैण्ड में इक्का-दुक्का वाहन खड़ा हुआ करते थे। आज समय पूरी तरह से बदल चुका है। अब टैक्सी स्टैण्ड के लिए ठेका पद्धति लागू है और लोग इसे हासिल करने के लिए सिफारिशों के साथ-साथ एडी चोटी का जोर लगाते हैं। टैक्सी स्टैण्ड में वाहनों को खड़ा करने के नाम पर अराजकता चरम पर है। सबसे दुखद बात यह है कि यहां आने वाले लोगों को टैक्सी स्टैण्ड के गुर्गों की लाल-लाल आंखों एवं अश्लील शब्दों से आए दिन दो-चार होना पड़ रहा है। जहां आने वाले मुसाफिरों के वाहनों के टायर से हवा व टंकी से डीजल-पेट्रोल गायब होना सामान्य बात हो चली है। शिकायत करने पर स्टेशन प्रबंधन भी मामले को अनसुनी करता आ रहा है। यही वजह है कि ठेका कर्मचारियों द्वारा आम नागरिकों के साथ बदसलूकी की जा रही है।
प्रबंधन भी नहीं दे रहा ध्यान
शहर से दूर स्टैण्ड होने की वजह से लोगों को अपने वाहन वहां पार्क करना मजबूरी बना हुआ है। यदि लोगों द्वारा वाहन पार्क किया गया और टैक्सी स्टैण्ड के कर्मचारियों के साथ नियम को लेकर बहसबाजी की गई तो ठेकेदार के गुर्गे मौका पाकर वाहनों की हवा निकालने से गुरेज नहीं करते हैं। अब यदि किसी वाहन के टायर की हवा निकल जाए तो संबंधित को कम से कम दो किलोमीटर तक धक्का मारकर ले जाना पड़ता है। जिससे उसकी विरोध करने की शक्ति नहीं बचती है। जिसका फायदा टैक्सी स्टैण्ड के गुर्गों द्वारा उठाया जा रहा है।
सूची के अनुसार नहीं लेते किराया
रेलवे द्वारा टैक्सी स्टैण्ड के लिए टेंडर किया जाता है जिसके बाद एक निश्चित समय के लिए संस्था को वसूली के लिए अनुबंधित किया जाता है। जिसमें दोपहिया, तीन पहिया, चार पहिया के लिए अलग-अलग दर घंटे के हिसाब से निर्धारित रहती है। रेलवे के नियम की मानें तो स्टैण्ड में किराया सूची चस्पा होना अनिवार्य है। यहां गड़बड़ बात यह है कि किराया सूची के अनुसार पैसा नहीं लिया जाता है बल्कि यहां मौजूद ठेकेदार के गुर्गे अपनी मर्जी से वसूली करते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी निर्धारित समय के लिए वाहन खड़ा करके जाता है और वापसी में उसे जो स्लिप पकड़ाई जाती है उसमें मनमर्जी समय का उल्लेख दर्ज रहता है और उसी के आधार पर वसूली की जाती है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जिस व्यक्ति से 20 रुपए सामान्यत: लिया जाना था उससे न केवल बहसबाजी की जाती है बल्कि दोगुना, तीन गुना वसूला जाता है।