रीवा में महीनों से विवादों में फंसी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला को अब कलेक्ट्रेट परिसर में चार कमरे मिल गए हैं। प्रशासन और कृषि विभाग के बीच लंबे खींचतान के बाद प्रयोगशाला की शिफ्टिंग शुरू हुई।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
अंतत: प्रशासन ने मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला को खाली करा ही लिया। महीनों तक जिला प्रशासन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला को खाली कराने के लिए जूझता रहा लेकिन अधिकारी टस से मस नहीं हुए। अब जाकर जब उन्हें कलेक्ट्रेट में नई जगह मिली तब अधिकारी भवन को खाली करने को तैयार हुए।
आपको बता दें कि जीडीसी कॉलेज के पास ही मनकामनेश्वर मंदिर है। इस मंदिर का विस्तार किया जाना है। इस विस्तार की राह में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला रोड़ा बन रहा था। पहले इसका कुछ हिस्सा तोड़ा गया। फिर भी जब काम नहीं बना तो पूरे भवन को ही जिला प्रशासन ने डिस्मेंटल घोषित करा दिया। इसके बाद कलेक्टर ने एक सप्ताह में भवन को खाली कराने का अल्टीमेटम जारी की। इसके बाद भी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के अधिकारी भवन खाली करने को तैयार नहीं हुए। शिल्पी प्लाजा के दूसरे तल पर प्रयोगशाला को शिफ्ट करने में असमर्थता जता दी। इसके बाद तहसीलदार ने समन जारी कर दिया। पूरे भवन को ही अवैध बता दिया और एक सप्ताह में भवन खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया। जेल भेजने की भी धमकी दे दी। इसके बाद भी जेडी कृषि विभाग ने भोपाल पत्र लिख दिया। अन्यत्र जगह उपलब्ध कराने या भवन के लिए बजट स्वीकृत करने की मांग कर दी। इसके बाद ही जिला प्रशासन थोड़ी नरम हुआ और इन्हें हटाने के लिए पुराने तहसील भवन में ही चार कमरे एलॉट कर दिए। अब प्रयोगशाला को जिला कलेक्ट्रेट परिसर में शिफ्ट किया जा रहा है। चार कमरों में ही प्रयोगशाला चलेगा। जबकि नार्मस के अनुसार कम से कम 10 कमरे चाहिए। अधिकारी भी जिला प्रशासन से सीधे तौर पर लड़ना नहीं चाह रहा, इसलिए प्रयोगशाला को कलेक्ट्रेट में ही शिफ्ट कर लिये हैं।
कृषि विभाग की ही पूरी जमीन थी
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिस जमीन की बात जिला प्रशासन कर रहा है। वह पूरी 19.586 हेक्टेयर भूमि कृषि विभाग की थी। पहले उद्यानकी भी कृषि विभाग में ही शामिल था। वर्ष 2012 में इस प्रयोगशाला का निर्माण किया गया था। यह शासकीय विभाग है। बिना स्वीकृति के किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता था। बजट भी सरकार से ही आया। मार्कफेड से निर्माण किया गया था। अब यह भूमि मप्र शासन की दर्ज हो गई। मिट्टी प्रयोगशाला को अवैध और अतिक्रमण बता दिया गया।
जेडी कृषि ने संचालक को लिखा था पत्र
तहसीलदार के बेदखली आदेश के मिलने के बाद फिर से केएस नेताम जेडी कृषि विभाग ने एक पत्र संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विभाग को लिखा था। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला को अन्यत्र स्थानांतरित करने के बदले 10 कमरों का भवन आवंटित कराने की मांग की थी। रीवा कलेक्टर से प्रयोगशाला के लिए उपयुक्त स्थान, भवन उपलब्ध कराने के लिए मांग की थी। पत्र में यह भी जानकारी दी गई है कि मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला भवन का निर्माण विभागीय मद संचालनालय किसान कल्याण तथा कृषि विभाग मप्र भोपाल से प्राप्त राशि 16.94 लाख से वर्ष 2012 में किया गया था। अब इसे अतिक्रमण बता कर बेदखली आदेश जारी किया गया है।

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