सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में निगेटिव ब्लड ग्रुप पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। ओ पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव के सीमित यूनिट बचे हैं। एचआईवी कांड के बाद रक्तदान में आई कमी से थैलीसीमिया, सिकिल सेल, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की जान पर संकट गहरा गया है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में निगेटिव ग्रुपों के ब्लडों का स्टॉक खत्म हो गया है। अब ओ पॉजिटिव का एक यूनिट एवं एबी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के केवल 11 यूनिट शेष हैं। जानकारी के अनुसार गुरुवार को पॉजिटिव यूनिट के ब्लड ग्रुप भी खत्म होने की कगार में हैं। ऐसे में यदि किसी मरीज को इमरजेंसी हालत में ब्लड गु्रप की जरूरत पड़ जाए तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। हालात ऐसे हैं कि थैलीसीमिया और सिकिल सेल एनीमिया के मरीज दिन- रात ब्लड का इंतजार करते नजर आते हैं। हालांकि ब्लड बैंक द्वारा जैसे ही कोई ब्लड उस मरीज के हिसाब से आता है उन्हें तुरन्त दिया जाता है। ब्लड बैंक की यह स्थिति पहले कभी नहीं थी लेकिन वर्तमान में रक्तदाताओं के रक्तदान से परहेज के चलते यह निर्मित हो रही है। बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि गरीब, मध्यम वर्गीय पीड़ित परिवार कैसे ब्लड अरेंज करे?
रेयर गुु्रप के मरीज खाली हाथ लौटे & सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते दो दिनों से ब्लड बैंक में निगेटिव ब्लड गु्रप के लिए आ रहे गंभीर मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हालांकि प्रबंधन द्वारा अथक प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन स्थिति सुधर नहीं रही है। निगेटिव ग्रुप के ब्लड का प्रबंध करना आसान नहीं है। ये ग्रुप वैसे भी रेयर माने जाते हैं।
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स्टॉक में सिर्फ पॉजिटिव बैग के 12 यूनिट ब्लड
ब्लड बैंक से मिली जानकारी के अनुसार दिनोंदिन ब्लड बैंक से ब्लड का स्टॉक खत्म हो रहा है। गुरुवार को शाम 7 बजे की स्थिति के अनुसार केवल पॉजिटिव यूनिट के 12 बैगों का स्टॉक बचा था। इसमें ओ पॉजिटिव का एक यूनिट एवं एबी पॉजिटिव के 11 यूनिट बैग बचे हुए थे। निगेटिव यूनिट के ब्लड पूरी तरह खत्म हैं। जिले में ही यह स्थिति नहीं है, जिले के अलावा भी संचालित मैहर और नागौद ब्लड बैंकों में भी ऐसे ही हालात हैं।
क्यों पैदा हुई यह स्थिति
ब्लड बैंक की यह स्थिति एचआईवी कांड के बाद पैदा हुई है, हाल ही में जिला अस्पताल में थैलीसीमिया से पीड़ित चार बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान एचआईवी ब्लड चढ़ाया गया था जिसके बाद चारों बच्चों में एचआईवी की पुष्टि हुई थी। एचआईवी बच्चों की जांच के दौरान पता चला था कि किसी एचआईवी पॉजिटिव डोनर के द्वारा ही संक्रमित ब्लड डोनेट किया गया था। इसके बाद से रक्तदाताओं ने रक्तदान करने से परहेज कर लिया है।
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गंभीर मरीजों और गर्भवतियों को समस्या
राज्य शासन के आदेशानुसार थैलीसीमिया पीड़ित, सिकिल सेल, एनीमिया पीड़ित एवं गंभीर गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जाता है लेकिन ब्लड बैंक में ब्लड का स्टॉक खत्म होेने के चलते इन मरीजों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। कई गर्भवती महिलाएं जिन्हें सीजर के पहले ब्लड चढ़ाने की सलाह दी जा रही है उन मरीजों के परिजन ब्लड बैंक का चक्कर काट रहे हैं। कई मरीज दलाल के चंगुल में फंस रहे हैं। गुरुवार को ऐसे ही कई मरीज ब्लड डोनर ढूंढ़ते नजर आए। कईयों ने निजी ब्लड बैंक का भी सहारा लिया।
ब्लड बैंक में ब्लड का स्टॉक खत्म हो रहा है, कई गंभीर मरीजों के लिए ब्लड बैंक के स्टॉक द्वारा ब्लड मुहैया कराया गया है। गुरुवार को नागौद की समाजसेवी संस्था से मुलाकात कर रक्तदान की चर्चा की गई है। रक्तदाताओं को सभी भ्रमों को छोड़ते हुए गंभीर मरीजों के लिए आगे आना होगा, तभी मरीजों की जान बचेगी।
डॉ. अंकिता पांडेय, ब्लड बैंक प्रभारी जिला अस्पताल सतना


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