सतना जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र के टिकुरिया टोला में शनिवार दोपहर बाइक सवार बदमाशों ने डीजे संचालक अंकुर गुप्ता को गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल अंकुर को जिला अस्पताल से रीवा रेफर किया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी जितेंद्र बसोर ने डीजे देने से मना करने पर हमला किया। इस घटना ने एक बार फिर सतना में बढ़ते अपराध और अवैध हथियारों के कारोबार पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
शनिवार को कोलगवां थानांतर्गत टिकुरिया टोला में बाइक सवार युवकों द्वारा दिन दहाड़े एक डीजे संचालक को गोली मार देने की घटना ने हड़कंप मचा दिया। डीजे संचालक को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया है जहां उसकी हालत गंभीर होने पर संजय गांधी अस्पताल रीवा के लिए रेफर किया गया है। इस घटना ने एक बार पुन: शहर की कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। हालात यह हैं कि बाइकर्स गैंग कहीं दिन दहाड़े गोली मार रहे हैं तो कहीं लूट व ठगी को अंजाम दे रहे हैं।
डीजे के लिए किया था मना
बताया जाता है कि टिकुरिया टोला लखन चौराहा में 25 वर्षीय अंकुर गुप्ता पिता कृष्णकुमार गुप्ता बाबा डीजे नाम से दुकान का संचालन करता है। बताया जाता है कि शुक्रवार की शाम जितेंद्र बसोर नामक युवक ने अंकुर को फोन कर डीजे बुक करने के लिए कहा लेकिन पहले से ही डीजे बुक होने के कारण अंकुर ने डीजे देने में असमर्थता जताई। बताया जाता है कि रात में तो जितेंद्र ने अपशब्द कहकर फोन काट दिया लेकिन सुबह 9 बजे पुन: फोन कर अंकुर पर डीजे के लिए दबाव बनाया। अंकुर ने पुन: मना किया तो अश्लील गालियां और देख लेने की धमकी दी गई। बताया जाता है कि शनिवार को अपरान्ह 3 बजे जब अंकुर डीजे का सामान वाहन से अनलोड करा रहा था तभी बाइक में सवार होकर तीन युवक डालीबाबा की ओर से पहुंचे और अंकुर को सरेआम गोली मार दी। जब तक वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते तब तक काली अपाचे बाइक में सवार होकर पहुंचे हमलावर चंपत हो चुके थे। इधर गोली लगने से रक्तरंजित हुए अंकुर को आनन फानन अनिकेत व डीजे आपरेटर विकास जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उनका प्राथमिक इलाज किया। अंकुर ने तीन युवकों में से एक की पहचान जितेंद्र बसोर के रूप में की है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।
ढूढ़े नहीं मिला कारतूस, रीवा रेफर
घटना की सूचना मिलते ही कोलगवां थाना प्रभारी सुदीप सोनी के साथ सिटी कोतवाली टीआई भी अस्पताल पहुंच गए । अंकुर का इलाज शुरू तो हुआ लेकिन सीने के बाई ओर गोली नसों में पैवश्त हो गई जिसे सतना में नसों का स्पेशलिस्ट न होने के कारण बरामद नहीं किया जा सका, नतीजतन जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने प्राथमिक तौर पर उपचार मुहैया करा अंकुर को संजय गांधी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया है।
आखिर शहर में कहां से पहुंच रहे अवैध हथियार
विंध्य की औद्योगिक राजधानी सतना इन दिनों दिन दहाड़े घट रही घटनाओं से दहल रहा है। इसमें सबसे अहम भूमिका निभा रहा है अवैध हथियारों का कारोबार जिसके चलते अपराधियों के साथ साथ स्कूली बच्चों तक आसानी से हथियारों की पहुंच बन रही है। इन्हीं के दम पर जिले का युवा अपराध की ओर उन्मुख हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस आए दिन अवैध हथियारों पर तो कार्रवाई करती है लेकिन हथियार के मूल विक्रेताओं की ओर निहारती तक नहीं है। उदाहरण के लिए 4 सितंबर को बढ़इया टोला में एक छात्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई। कोलगवां पुलिस ने इस मामले में निश्चित तौर पर सक्रियता का परिचय देते हुए कार्रवाई की लेकिन इस मामले में आरोपियों को पकड़ भी लिया लेकिन उनके पास हथियार कहां से आए, किससे खरीदे , यह अभी भी राज ही बना हुआ है। इसी प्रकार 6 अगस्त को चाणक्यपुरी कालोनी में बंदूकें लहराई गर्इं जिसके आरोपियों को पुलिस ने पकड़ा लेकिन हथियारों की खरीदी कहां से हुई और उन पर क्या कार्रवाई हुई, यह रहस्य अभी भी अनसुलझा है। ये तो केवल कुछ उदाहरण हैं, ऐसे मामलों की लंबी फे हरिश्त है कि जिसमें पुलिस ने हथियार इस्तेमाल करने वाले आरोपियों को तो पकड़ा लेकिन हथियार बेचने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की। अपराध नियंत्रण से जुड़े एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी बताते हैं कि अवैध हथियारों पर अंकुश लगाए बिना ऐसे अपराधों की रोकथाम बेहद मुश्किल होती है और पुलिस की कार्रवाई सांप निकलने के बाद लकीर पीटने जैसी हो जाती है। बहरहाल कारण कुछ भी हो लेकिन सतना में हथियारों के खुले इस्जेमाल ने कानून व्यवस्था की हालत को बेपटरी कर दिया है जिस पर अंकुश लगाने की चुनौती पुलिस के सामने मुंह बा खडी है।
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