सतना जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया के 17 मरीजों की पहचान की गई है, जिनमें 12 को नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है। 2025 की शुरुआत से अब तक 1410 गर्भवती महिलाओं की जांच में 535 पॉजिटिव पाई गई हैं।

चौंकाने वाले आंकड़े: जिला अस्पताल में 1410 सैंपल में से 535 गर्भवती महिलाएं पॉजिटिव
सतना, स्टार समाचार वेब
वर्ष 2025 में सिकिल सेल जैसी जटिल बीमारी के 17 मरीज चिन्हित किये गए हैं जिनका इलाज जिला अस्पताल में किया जा रहा है। इनमे से 12 मरीजों को खून की कमी या अन्य समस्याओं पर नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जाता है। जिला अस्पताल में चौंकाने वाले आंकड़ों में गर्भवतियों की जांच है जिसमें 535 महिलाएं पॉजिटिव मिली हैं। राष्ट्रीय स्वास्थय मिशन के निर्देश पर जिले के सभी स्वास्थय संस्थाओं पर 19 जून को मरीजों की सिकिल सेल से संबंधित जांच कर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।
जानकारी के मुताबिक सिकल सेल एनीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर के रेड ब्लड सेल्स अर्धचंद्राकार (हंसिये/ सिकल के आकार) के हो जाते हैं और रक्त प्रवाह में रुकावट उत्पन्न करते हैं। इससे थकान, दर्द, संक्रमण और अंगों को नुकसान तक हो सकता है।
समय रहते जांच और इलाज से इस रोग की गंभीरता को नियंत्रित किया जा सकता है। जिला अस्पताल में वर्तमान में 17 मरीज रजिस्टर्ड हैं जिनमे 12 मरीजों को खून की कमी होने या कोई अन्य समस्या पर नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जाता है जबकि पांच मरीज कभी कभार ही जिला अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं।
गर्भवती महिलाओं की हो रही जांच
जिला अस्पताल में 10 अक्टूबर 2024 को सिकल सेल की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके बाद से गर्भवती महिलाओं का विशेष रूप से परीक्षण किया जा रहा है। यह जांच खासतौर पर उन महिलाओं पर केंद्रित है जो गर्भावस्था के पांचवें महीने तक की स्थिति में हैं। इस साल के शुरूआती चार महीनों में कुल 1410 महिलाओं के सैंपल एकत्र किए गए, जिनमें से 535 सैंपल पॉजिटिव और 875 सैंपल निगेटिव पाए गए हैं। जिला अस्पताल के जिला समन्वयक अभिजीत सिंह सिसोदिया ने जानकारी दी कि प्रतिदिन औसतन 15 गर्भवती महिलाओं के सैंपल लिए जाते हैं, जिनमें से 8 से 10 महिलाएं सिकल सेल पॉजिटिव पाई जाती हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सतना जिले में सिकल सेल की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है।
पत्नी के पॉजिटिव होने पर पति की भी जांच
जिन महिलाओं की रिपोर्ट सिकल सेल पॉजिटिव आती है, उनके पति का भी सैंपल लिया जाता है। पति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय की जाती है। अगर पति की रिपोर्ट नॉर्मल होती है, तो महिला को गर्भावस्था जारी रखने की सलाह दी जाती है। यदि पति भी पॉजिटिव निकलते हैं, तो दंपति को रीवा जीएमसी भेजा जाता है, जहां भ्रूण की स्क्रीनिंग करवाई जाती है। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाता है कि जन्म लेने वाले बच्चे को गंभीर स्तर पर सिकल सेल की बीमारी न हो।
इस तरह की जांच और समय रहते की गई पहचान से न केवल भविष्य की जटिलताओं को रोका जा सकता है, बल्कि गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है। यह अभियान न सिर्फ महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा करता है, बल्कि भावी पीढ़ी को गंभीर रोगों से बचाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
डॉ. विजेता राजपूत, सिकिल सेल नोडल अधिकारी, जिला अस्पताल


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