साल 2025 में निवेश के मामले में चांदी ने सबको पीछे छोड़ दिया है। 163.5% रिटर्न के साथ चांदी की कीमतें ₹2.36 लाख के पार पहुँचीं। जानें क्यों बढ़ रहे हैं दाम और क्या है विशेषज्ञों की राय।

वित्तीय वर्ष 2025 निवेश के दृष्टिकोण से 'चांदी' के नाम रहा है। सुरक्षित निवेश और औद्योगिक क्षेत्र की भारी मांग के चलते चांदी ने इस साल रिटर्न के मामले में न केवल सोने को पीछे छोड़ा, बल्कि शेयर बाजार को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है। जहाँ निवेशकों को शेयर बाजार (निफ्टी) से महज एक अंक की बढ़त मिली, वहीं चांदी ने अपने निवेशकों की संपत्ति को ढाई गुना से भी ज्यादा कर दिया है।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों ने इतिहास रच दिया। चांदी 9,350 रुपये की विशाल छलांग लगाकर 2,36,350 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। तुलनात्मक रूप से देखें तो 31 दिसंबर 2024 को चांदी का भाव 89,700 रुपये था, जो अब तक 1,46,650 रुपये प्रति किलो की चमत्कारी बढ़त दर्ज कर चुका है।
इस साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो चांदी निवेश का सबसे आकर्षक माध्यम बनकर उभरी है:
| निवेश विकल्प | वार्षिक रिटर्न (लगभग) |
| चांदी | 163.50% |
| सोना | 80.24% |
| निफ्टी 50 | 7.0% |
| निफ्टी 500 | 5.1% |
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे कई ठोस कारण हैं:
औद्योगिक क्रांति: एआई (Artificial Intelligence), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और सौर ऊर्जा (Clean Energy) जैसे क्षेत्रों में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है।
आपूर्ति में कमी: लगातार पांचवें साल बाजार में चांदी की सप्लाई उसकी मांग की तुलना में कम रही है।
सुरक्षित निवेश का आकर्षण: डॉलर की अस्थिरता और सरकारी बॉन्ड के मुकाबले निवेशकों ने चांदी को एक ठोस विकल्प के रूप में चुना है।
डॉलर के मुकाबले रुपया: रुपये में आई करीब 5% की गिरावट ने भी घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों को ऊपर धकेलने का काम किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती और ईटीएफ (ETF) में बढ़ते निवेश के कारण अगले साल भी चांदी की चमक बरकरार रह सकती है। चांदी अब केवल आभूषणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आधुनिक तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक अनिवार्य धातु बन चुकी है, जो इसकी कीमतों को लंबी अवधि तक मजबूती प्रदान करेगी।

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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84 फीसदी गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था।
देशभर के बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इस सप्ताह सभी बैंक आम दिनों की तरह खुले रहेंगे और कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को टालने का फैसला किया है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह गिरे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार पर हावी रहीं। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
गर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। आज रविवार को भले ही बैंक की शाखाएं खुली हुई हैं और कामकाज चल रहा है, लेकिन आने वाले हफ्ते में बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहने वाली हैं। आम ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और करोड़ों रुपए का वित्तीय लेनदेन अटकने की संभावना है।