1 फरवरी को बजट पेश होने से पहले जानें इसका दिलचस्प इतिहास। हलवा रस्म, बजट लीक का किस्सा और ब्रीफकेस से टैबलेट तक के सफर की पूरी जानकारी।

भारतीय बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि इसके पीछे 77 वर्षों का रोमांचक इतिहास और कई गुप्त परंपराएं छिपी हैं। आइए जानते हैं बजट से जुड़े वो रोचक तथ्य, जो इसे खास बनाते हैं:
बजट की छपाई शुरू होने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा रस्म निभाई जाती है। इसके बाद, बजट बनाने वाले 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी मंत्रालय के बेसमेंट में बंद हो जाते हैं। वे अगले 10 दिनों तक बाहरी दुनिया, इंटरनेट और अपने परिवार से पूरी तरह कटे रहते हैं ताकि गोपनीयता बनी रहे।
साल 2001 तक बजट शाम 5 बजे पेश होता था, क्योंकि यह ब्रिटिश संसद के समय (सुबह 11:30) के अनुसार तय था। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस औपनिवेशिक परंपरा को तोड़ा और पहली बार सुबह 11 बजे बजट पेश कर भारतीय समय को प्राथमिकता दी।
दशकों तक वित्त मंत्री बजट के लिए चमड़े का ब्रीफकेस लाते थे। साल 2019 में निर्मला सीतारमण ने इसकी जगह पारंपरिक लाल 'बही-खाता' अपनाया। वहीं, 2021 में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए देश का पहला पेपरलेस बजट एक टैबलेट के जरिए पेश किया गया।
लंबाई का रिकॉर्ड: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020 में 2 घंटे 42 मिनट का सबसे लंबा भाषण दिया था।
शब्दों का रिकॉर्ड: साल 1977 में हीरूभाई मुलजीभाई पटेल ने मात्र 800 शब्दों का सबसे संक्षिप्त बजट भाषण पढ़ा था।
संसदीय इतिहास में तीन बार ऐसा हुआ जब देश के प्रधानमंत्री ने ही बजट पेश किया। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला और बजट पेश किया।
साल 1950 में बजट के कुछ हिस्से राष्ट्रपति भवन में छपाई के दौरान लीक हो गए थे। इसके बाद वित्त मंत्री जॉन मथाई को इस्तीफा देना पड़ा। इसी घटना के बाद बजट की छपाई को राष्ट्रपति भवन से हटाकर दिल्ली के मिंटो रोड और फिर नॉर्थ ब्लॉक के 'सिक्योरिटी प्रेस' में स्थानांतरित कर दिया गया।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84 फीसदी गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था।
देशभर के बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इस सप्ताह सभी बैंक आम दिनों की तरह खुले रहेंगे और कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को टालने का फैसला किया है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह गिरे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार पर हावी रहीं। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
गर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। आज रविवार को भले ही बैंक की शाखाएं खुली हुई हैं और कामकाज चल रहा है, लेकिन आने वाले हफ्ते में बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहने वाली हैं। आम ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और करोड़ों रुपए का वित्तीय लेनदेन अटकने की संभावना है।