आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार भारत की विकास दर 7.2% तक जा सकती है। जानें कैसे कमजोर रुपया, सस्ता सोना और EU व्यापार समझौता आपकी जेब पर असर डालेंगे।

नई दिल्ली. स्टार समाचार वेब
संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक लेकिन सतर्क रोडमैप तैयार किया है। जहाँ एक ओर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक कारकों के कारण महंगाई और व्यापारिक चुनौतियों का साया भी मंडरा रहा है।
सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ रेट 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि घरेलू मांग और बुनियादी ढांचे में निवेश के दम पर भारत अपनी रफ्तार बनाए रखने में सक्षम है।
सर्वेक्षण में महंगाई को लेकर दोतरफा तस्वीर दिखाई गई है:
चुनौतियां (इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन): रुपये की गिरती कीमत आयात को महंगा बना रही है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना, चांदी और तांबे की ऊंची कीमतें 'कोर इन्फ्लेशन' (Core Inflation) पर दबाव डाल सकती हैं।
राहत के संकेत: अच्छी फसल की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रसोई का बजट संतुलित रहने की उम्मीद है। सर्वे का मानना है कि महंगाई RBI के तय दायरे (2% - 6%) के भीतर ही रहेगी।
भारत-यूरोपीय संघ (India-EU) मुक्त व्यापार समझौते के कारण बिजनेस जगत में हलचल है:
सस्ती होंगी लग्जरी कारें: यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क 110% से घटकर महज 10% पर आने की संभावना है। इससे टाटा और महिंद्रा जैसी दिग्गज घरेलू कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलेगी।
वाइन इंडस्ट्री पर दबाव: आयातित वाइन सस्ती होने से 'सुला विनयार्ड्स' जैसी भारतीय कंपनियों के मार्केट शेयर पर असर पड़ सकता है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि विकास को गति देने के लिए RBI अगले सप्ताह ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो होम लोन और कार लोन की किस्तों में कमी आएगी, जो उपभोक्ताओं के लिए इस सीजन की बड़ी राहत होगी।
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टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर टाटा ट्रस्ट्स में दरार आ गई है। सीनियर ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने बिना सलाह के फैसले लेने पर आपत्ति जताई है।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84 फीसदी गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था।
देशभर के बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इस सप्ताह सभी बैंक आम दिनों की तरह खुले रहेंगे और कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को टालने का फैसला किया है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह गिरे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार पर हावी रहीं। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
गर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। आज रविवार को भले ही बैंक की शाखाएं खुली हुई हैं और कामकाज चल रहा है, लेकिन आने वाले हफ्ते में बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहने वाली हैं। आम ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और करोड़ों रुपए का वित्तीय लेनदेन अटकने की संभावना है।