
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना से जुड़ी पत्नी और उसकी नाबालिग बेटी की मौत के केस में दोषी पति की आजीवन कारावास की सजा घटाकर 10 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि दहेज निषेध अधिनियम, 1961 लागू होने के बावजूद दहेज प्रताड़ना और दहेज मृत्यु आज भी गंभीर सामाजिक अपराध बने हुए हैं।














































