पाकिस्तान के बलूचिस्तान के निर्वासित बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है। पत्र में भारत और बलूचिस्तान के बीच ऐतिहासिक संबंधों के बारे में बताते हुए सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है।
By: Arvind Mishra
Jan 02, 202610:43 AM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
पाकिस्तान के बलूचिस्तान के निर्वासित बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है। पत्र में भारत और बलूचिस्तान के बीच ऐतिहासिक संबंधों के बारे में बताते हुए सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। बलोच नेता ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की और मोदी सरकार की साहसिक और दृढ़ कार्रवाई की सराहना की। दरअसल, बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्रीजयशंकर को एक खुला पत्र लिखते हुए भारत सरकार और भारतीय जनता को नए वर्ष 2026 की शुभकामनाएं दी हैं। पत्र में उन्होंने भारत के साथ ऐतिहासिक रिश्तों, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, पाकिस्तान के खिलाफ बलूचिस्तान के संघर्ष और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। पत्र में हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) को दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया है।
ऑपरेशन सिंदूर की सराहना
मीर यार ने मोदी सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ की गई कार्रवाई की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तानी सैन्य ढांचे और आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना साहसिक और न्यायपूर्ण कदम था, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
आतंक का शिकार बलूचिस्तान
पत्र में कहा गया कि बलूचिस्तान पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तान के कब्जे, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का शिकार रहा है। मीर यार बलोच ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस समस्या को जड़ से खत्म किया जाए ताकि बलूचिस्तान को स्थायी शांति और संप्रभुता मिल सके।
भारत को पूर्ण समर्थन का ऐलान
बलोच नेता ने स्पष्ट कहा कि बलूचिस्तान की जनता भारत और उसकी सरकार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने शांति, विकास, व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा चुनौतियों और छिपे खतरों से निपटने के लिए भारत के साथ भरोसेमंद साझेदारी की इच्छा जताई।
बयानबाजी नहीं, सहयोग की जरूरत
मीर यार बलोच ने कहा-वर्तमान समय में केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस और पारस्परिक सहयोग की आवश्यकता है। भारत और बलूचिस्तान दोनों को जिन खतरों का सामना है, वे वास्तविक और तत्काल हैं, इसलिए रिश्तों को भी उतना ही मजबूत और प्रभावी होना चाहिए।
पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर चेतावनी
पत्र में पाकिस्तान और चीन की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को बेहद खतरनाक बताया गया है। मीर यार ने चेतावनी दी कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जो क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ सकता है। उन्होंने चेताया कि यदि बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं को समर्थन नहीं मिला, तो आने वाले महीनों में चीनी सेना की तैनाती बलूचिस्तान में हो सकती है।