छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में ईडी ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन आबकारी आयुक्त आईएएस निरंजन दास सहित 31 आबकारी अफसरों की 38.21 करोड़ रुपए मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है।
By: Arvind Mishra
Jan 05, 20261:42 PM

रायपुर। स्टार समाचार वेब
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में ईडी ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन आबकारी आयुक्त आईएएस निरंजन दास सहित 31 आबकारी अफसरों की 38.21 करोड़ रुपए मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत की गई है। ईडी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य के राजस्व को 2,800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जिसकी राशि आगे की जांच में और बढ़ सकती है। ईडी द्वारा कुर्क की गई कुल 275 संपत्तियों में 78 अचल और 197 चल संपत्तियां शामिल हैं। अचल संपत्तियों की अनुमानित कीमत 21.64 करोड़ है, जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम रिहायशी कॉलोनियों में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि शामिल है। 16.56 करोड़ मूल्य की चल संपत्तियों में एफडी, बैंक खातों में जमा राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां, इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश शामिल हैं।
समानांतर आबकारी व्यवस्था का खुलासा
ईडी की जांच में सामने आया है कि अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों से जुड़ा एक आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग को नियंत्रित कर रहा था। तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और तत्कालीन सीईओ अरुण पति त्रिपाठी ने मिलकर एक समानांतर आबकारी व्यवस्था खड़ी की, जिसके जरिए सरकारी नियमों को दरकिनार कर अवैध कमाई की गई।
पार्ट-बी योजना से अवैध शराब बिक्री
जांच के अनुसार, सरकारी शराब दुकानों के जरिए पार्ट-बी योजना चलाई गई। इसके तहत अवैध देसी शराब का निर्माण और बिक्री की गई। नकली होलोग्राम, गैर-कानूनी बोतलों का उपयोग किया गया और सरकारी गोदामों को बायपास कर सीधे भट्टियों से दुकानों तक शराब पहुंचाई गई। यह पूरी प्रक्रिया आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित होती थी।
प्रति केस 140 रुपए फिक्स था कमीशन
ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को प्रति केस 140 रुपए का कमीशन दिया जाता था। अकेले निरंजन दास ने 18 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित आय हासिल की, जबकि कुल 31 अधिकारियों ने मिलकर करीब 89.56 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की।