जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी के बयानों के कारण पार्टी की जमकर किरकिरी हुई। उनका बयान आईपीएल को लेकर था। वहीं नाराज जेडीयू ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दरअसल, वरिष्ठ नेता केसी त्यागी का पार्टी में अध्याय अब समाप्त हो चुका है।
By: Arvind Mishra
Jan 10, 202612:34 PM
पटना। स्टार समाचार वेब
जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी के बयानों के कारण पार्टी की जमकर किरकिरी हुई। उनका बयान आईपीएल को लेकर था। वहीं नाराज जेडीयू ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दरअसल, वरिष्ठ नेता केसी त्यागी का पार्टी में अध्याय अब समाप्त हो चुका है। हाल के दिनों में केसी त्यागी के कुछ बयानों और गतिविधियों को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई थीं। त्यागी ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया था, जिसके बाद जेडीयू नेतृत्व ने उन्हें दूरी बनाने का फैसला किया। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन के हालिया बयान से यह साफ हो गया है कि जेडीयू का अब केसी त्यागी से कोई औपचारिक संबंध नहीं रह गया है।
दोनों के बीच सम्मानजनक अलगाव
दोनों के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल केसी त्यागी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया है। इसकी वजह पार्टी से उनके लंबे और पुराने संबंध बताए जा रहे हैं। जेडीयू के भीतर यह माना जा रहा है कि त्यागी ने पार्टी के साथ लंबे समय तक अहम भूमिकाएं निभाई हैं, जिसे देखते हुए नेतृत्व किसी तरह का टकराव नहीं चाहता। त्यागी अब जेडीयू की नीतियों, फैसलों और आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान
भविष्य में पार्टी की ओर से जारी होने वाले बयानों और राजनीतिक रुख में उनका कोई दखल नहीं होगा। जेडीयू नेतृत्व ने इस मुद्दे पर फिलहाल संतुलित रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि यह अलगाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से हुआ है। जेडीयू के अंदरूनी हलकों में इसे एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व आगे की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
त्यागी ने यह दिया था बयान
त्यागी ने कहा था-खेल का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में, खासकर पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ, स्थिति तनावपूर्ण है। पाकिस्तान सीमा पर आतंकवाद का दोषी है और बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई घटनाओं से भारतीय समाज आक्रोशित है। इसका खेल भावना पर असर पड़ता है। बीसीसीआई का फैसला शायद इन्हीं भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया होगा, लेकिन व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि राजनीति को खेलों पर ज्यादा हावी नहीं होना चाहिए। जब बांग्लादेश ने हिंदू क्रिकेटर लिट्टन दास को अपनी टीम का कप्तान नियुक्त किया है, तो हमें इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।