सतना जिला अस्पताल में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। फायर एनओसी के बिना अस्पताल संचालित हो रहा है। एक्सपायरी रहित सिलेंडर, अधूरा फायर सेफ्टी कार्य और ठेकेदार की लापरवाही मरीजों की जान पर खतरा बन रही है।
सतना के एक निजी अस्पताल में आग की घटना ने जिले की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल समेत करीब 30 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम बिना फायर एनओसी और सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे हैं। नोटिसों की अनदेखी, जिम्मेदारों की चुप्पी और मरीजों की जान खतरे में।
जयपुर अस्पताल हादसे के बाद सतना जिला अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था की हकीकत सामने आई है। अस्पताल में न तो फायर एनओसी है और न ही स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर का काम पूरा हुआ है। करीब 70 लाख की लागत वाला सेफ्टी प्रोजेक्ट ठेकेदार और प्रबंधन के विवाद में फंसा है। अगर किसी वार्ड में आग लगती है तो सैकड़ों मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।
सतना जिले में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बिना एनओसी के विद्युत विभाग द्वारा पोल गाड़े जा रहे हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और सौ से ज्यादा पेड़ों की कटाई से क्षेत्र में नाराजगी है। पत्राचार तक सीमित पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल।
















